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दाऊदी बोहरा फैसला: पूर्व जज गौतम पटेल के पूरे परिवार को खत्म करने की सुपारी, जर्मनी से आया धमकी भरा खत!

पीटीआई, मुंबई। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 08 Jun 2026 06:17 PM IST
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सार

बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार को दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार मामले में दिए गए फैसले के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अपराधियों ने लंदन में उनकी बेटी को पत्र भेजकर यूट्यूब पर माफी मांगने का दबाव बनाया है, जिसकी जांच अब लंदन पुलिस कर रही है। क्या है मामला? 
 

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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दाऊदी बोहरा समुदाय के 2024 के उत्तराधिकार विवाद मामले में फैसला सुनाने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम पटेल और उनका परिवार इस वक्त गहरे संकट में है। उन्हें भारत से लेकर ब्रिटेन तक लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, पिछले दस महीनों से पूर्व जज के परिवार को डराने-धमकाने के लिए लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं।


लंदन में बेटी को मिला धमकी भरा पत्र
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और ताजा मोड़ पांच जून को आया। जस्टिस पटेल की बेटी, जो लंदन में रहती हैं, उन्हें एक चिट्ठी मिली। इस पत्र में साफ तौर पर हिंसा की चेतावनी दी गई है। पत्र भेजने वाले ने दावा किया है कि इस परिवार को खत्म करने के लिए बाकायदा 'कॉन्ट्रैक्ट' यानी सुपारी दी जा चुकी है। जर्मनी के डाक टिकट वाले इस पत्र के साथ एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस (पेनड्राइव) भी भेजी गई है। फिलहाल इस डिवाइस और पत्र को लंदन पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच में जुट गई है।
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यूट्यूब पर माफी मांगने का भारी दबाव
धमकी देने वाले अपराधी पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल पर एक अजीब और गैर-कानूनी दबाव बना रहे हैं। इन पत्रों के जरिए मांग की जा रही है कि जस्टिस पटेल यूट्यूब पर अपना एक वीडियो रिकॉर्ड करके अपलोड करें। इस वीडियो में उन्हें यह कहना होगा कि 2024 का उत्तराधिकार संबंधी फैसला उन्होंने किसी के दबाव और जबरदस्ती में आकर सुनाया था। इसके साथ ही उनसे इस फैसले के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए भी कहा गया है। इस कायराना हरकत के बाद बॉम्बे बार एसोसिएशन भी मैदान में उतर आया है। एसोसिएशन ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व जज और उनके परिवार को दी जा रही धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सरकार और जांच एजेंसियों से दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।

क्या था 2024 का वह ऐतिहासिक फैसला?
यह पूरा विवाद दाऊदी बोहरा समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु यानी 53वें दाई अल-मुतलक के पद को लेकर है। 24 अप्रैल 2024 को जस्टिस गौतम पटेल की एकल पीठ ने अपने फैसले में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को इस पद पर वैध माना था। कोर्ट ने कहा था कि सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की नियुक्ति पूरी तरह से वैध है। इसके साथ ही कोर्ट ने खुजैमा कुतुबुद्दीन की ओर से 2014 में दायर मुकदमे को खारिज कर दिया था। 

खुजैमा का दावा था कि उनके भाई और 52वें सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने उन्हें गुप्त रूप से अपना उत्तराधिकारी चुना था। 2016 में खुजैमा की मौत के बाद उनके बेटे ताहिर फखरुद्दीन ने इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया। लेकिन जस्टिस पटेल ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने दावे के पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाए। इस फैसले के अगले ही दिन यानी 25 अप्रैल 2024 को जस्टिस पटेल सेवानिवृत्त हो गए थे। वर्तमान में यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने लंबित है।
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