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TMC Split: Will 20 TMC MPs join the NDA? Letter written to Om Birla!
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TMC Split : TMC के 20 सांसद होंगे NDA में शामिल? ओम बिरला को लिखा पत्र!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 08 Jun 2026 06:56 PM IST
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पर मंडरा रहा राजनीतिक संकट अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है। पहले पार्टी के भीतर विधायकों की बगावत और अब संसद में सांसदों के असंतोष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा घटनाक्रम में टीएमसी की वरिष्ठ लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ऐसा दावा किया है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मचा दी है।
काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा गया है, जिसमें एनडीए के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई गई है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में काकोली घोष ने कहा कि यह फैसला पार्टी के कई सांसदों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह अभी भी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की मुख्य सचेतक हैं और सांसदों के एक बड़े वर्ग की भावना को सामने रख रही हैं।
यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रही है। विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ नेताओं ने खुलकर विरोध भी दर्ज कराया है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है।
वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। ऐसे में यदि काकोली घोष का दावा सही साबित होता है तो यह न केवल टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा, बल्कि संसद में भी नए समीकरण बन सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर सांसदों की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विपक्षी राजनीति में लंबे समय तक मजबूत क्षेत्रीय ताकत मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस के सामने अब अस्तित्व और संगठन दोनों को बचाए रखने की चुनौती है। बंगाल चुनाव में हार के बाद शुरू हुई राजनीतिक उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। पहले विधायकों की बगावत और अब सांसदों के एनडीए की ओर झुकाव की खबरों ने पार्टी के भीतर अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन काकोली घोष के दावे ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह सिर्फ नाराज सांसदों का दबाव बनाने का प्रयास है या फिर वास्तव में टीएमसी में किसी बड़े राजनीतिक विभाजन की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटते हैं, यह बंगाल ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
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