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Rabri Devi Security Row: Political battle over withdrawal of security in Bihar, workers take charge at Rabri D
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Rabri Devi Security Row: बिहार में सुरक्षा लौटाने पर सियासी जंग,राबड़ी आवास पर कार्यकर्ताओं ने संभाला मोर्चा
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 07 Jun 2026 04:30 AM IST
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बिहार की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा सरकारी सुरक्षा लौटाने का फैसला चर्चा का विषय बन गया। इस कदम को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इसे सम्मान, स्वाभिमान और राजनीतिक प्रतिरोध का प्रतीक बताया है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन इसे जनता की सहानुभूति हासिल करने की एक राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। सुरक्षा लौटाने के फैसले के बाद पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड आवास पर शनिवार को असामान्य दृश्य देखने को मिला। जहां पहले सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी रहती थी, वहां अब राजद कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में जुटे नजर आए। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव स्वयं आवास के बाहर कुर्सी लगाकर बैठ गए और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान राजद समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के प्रमुख नेताओं को राजनीतिक रूप से परेशान करने के लिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
राजद नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। पार्टी का दावा है कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण निर्धारित मानकों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है तथा इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। इस बीच राबड़ी देवी के बड़े भाई ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में तानाशाही जैसी स्थिति पैदा की जा रही है और गरीबों के नेता लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब जनता स्वयं उनके साथ खड़ी है तो सुरक्षा हटाने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि जनता ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि आवास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा किया गया।
इस मुद्दे पर राजद कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकता है। फिलहाल सुरक्षा लौटाने का यह निर्णय बिहार की राजनीति में बहस और आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र बन गया है, जहां दोनों पक्ष इसे अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से जनता के सामने प्रस्तुत करने में जुटे हुए हैं।
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