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INDIA Alliance Meeting: Who is upset ahead of the INDIA alliance meeting? Will the alliance fall apart?
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INDIA Alliance Meeting: इंडिया गठबंधन की मीटिंग से पहले कौन हुआ नाराज? बिखर जाएगा गठबंधन?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sun, 07 Jun 2026 08:27 PM IST
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क्या विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है? क्या भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के लिए बना INDIA गठबंधन अब अंदरूनी खींचतान का शिकार हो चुका है? और क्या 8 जून की अहम बैठक से पहले सामने आए घटनाक्रम विपक्षी राजनीति की दिशा बदल सकते हैं?
बैठक अभी हुई भी नहीं है, लेकिन उससे पहले ही गठबंधन के कई बड़े सहयोगी दलों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, कुछ सहयोगी दूरी बना रहे हैं, तो कुछ सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं। केरल से लेकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल तक राजनीतिक हलचल तेज है। वहीं भाजपा इन घटनाओं को विपक्षी एकता के बिखरने का संकेत बता रही है।
आखिर 8 जून की बैठक से पहले ऐसा क्या हुआ कि INDIA गठबंधन के भीतर असंतोष की आवाजें तेज हो गईं? कौन-कौन से दल नाराज हैं और इसका विपक्ष की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है? आइए समझते हैं पूरी कहानी इस वीडियो में।
विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की 8 जून को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर कई क्षेत्रीय दलों की नाराजगी अब सार्वजनिक हो चुकी है, जिससे विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर सीपीआई(एम) ने कांग्रेस पर चुनावी लाभ के लिए झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया है, वहीं डीएमके ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। इस बीच भाजपा ने इन घटनाक्रमों को विपक्षी गठबंधन की कमजोरी बताते हुए तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि INDIA गठबंधन कभी भी वैचारिक आधार पर नहीं बना था। उनके अनुसार यह केवल चुनावी मजबूरियों और राजनीतिक स्वार्थों का गठबंधन था। उन्होंने कहा कि अब चुनाव समाप्त होते ही सहयोगी दलों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। सुमन ने दावा किया कि कई क्षेत्रीय दल कांग्रेस के रवैये से असंतुष्ट हैं और भविष्य में इनमें से कुछ दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के करीब आ सकते हैं।
दरअसल, 8 जून की बैठक से पहले सबसे बड़ा विवाद कांग्रेस और सीपीआई(एम) के बीच देखने को मिला है। सीपीआई(एम) महासचिव एम. ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर पार्टी की नाराजगी जाहिर की है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बैठक में शामिल होगी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे, लेकिन साथ ही कांग्रेस के रवैये पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।
अपने पत्र में एम. ए. बेबी ने आरोप लगाया कि केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने लगातार यह प्रचार किया कि सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच कोई गुप्त समझौता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार ऐसे आरोप लगाए, जिससे विपक्षी एकता कमजोर हुई। बेबी ने कहा कि भाजपा और आरएसएस के खिलाफ संघर्ष में सीपीआई(एम) के अनेक कार्यकर्ताओं ने अपनी जान गंवाई है, इसलिए पार्टी पर भाजपा से समझौते का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार और अनुचित है।
सीपीआई(एम) की नाराजगी का एक कारण राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रचार के दौरान केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर लगाए गए आरोप भी बताए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस ने चुनावी लाभ के लिए विपक्षी सहयोगियों को ही निशाना बनाया, जिससे गठबंधन की भावना को नुकसान पहुंचा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके ने भी INDIA गठबंधन की बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार डीएमके कांग्रेस के कुछ हालिया राजनीतिक फैसलों से नाराज है। विशेष रूप से तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन दिए जाने को डीएमके ने विश्वासघात माना है। पार्टी का कहना है कि इस कदम से उसके कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ और गठबंधन सहयोगियों के बीच भरोसे को नुकसान पहुंचा।
आम आदमी पार्टी भी पिछले कुछ समय से INDIA गठबंधन की गतिविधियों से अपेक्षाकृत दूरी बनाए हुए है। ऐसे में विपक्षी मोर्चे के प्रमुख घटकों का असंतोष कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि इन मतभेदों को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो गठबंधन की भविष्य की रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों की चर्चाओं के बीच सांसद अभिषेक बनर्जी के बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को भी विपक्षी एकता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया है।
भाजपा नेताओं ने विपक्षी दलों के मतभेदों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि INDIA गठबंधन धीरे-धीरे टूटने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि डीएमके का रुख यह दर्शाता है कि सहयोगी दल कांग्रेस के व्यवहार से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी ने दावा किया कि विपक्षी दलों का एक मंच पर टिके रहना अब कठिन होता जा रहा है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी कहा कि विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कमी और आंतरिक संघर्ष अब खुलकर सामने आ चुका है।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों और सहयोगी दलों की नाराजगी को लेकर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्षी दलों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी है और बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे विपक्ष की बजाय अपने सहयोगियों और आंतरिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।
राजनीतिक दृष्टि से 8 जून की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी दल अपनी आगे की रणनीति, संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की योजना तथा भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करने वाले हैं। लेकिन बैठक से पहले सामने आए मतभेदों ने विपक्षी एकता की मजबूती को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस सहयोगी दलों की नाराजगी दूर कर पाएगी या फिर INDIA गठबंधन के भीतर दरार और गहरी होगी।
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