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कौन हैं नंदन नीलेकणि: कभी कांग्रेस से लड़े चुनाव, फिर बने PM मोदी के खास, अब मिली परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी

Sun, 26 Jul 2026 07:18 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 26 Jul 2026 07:18 PM IST
सार

डिजिटल इंडिया को गति देने में आज आधार कार्ड ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। इस आधार कार्ड की व्यवस्था का ईजाद किसी और ने नहीं, बल्कि नंदन नीलेकणि ने ही किया, जो कि इंफोसिस के सीईओ भी रह चुके हैं। 

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PM Narendra Modi announces High Powered Task Force Examination Committee Nandan Nilekani to lead Profile news
नंदन नीलेकणि। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल इंडिया को गति देने में आज आधार कार्ड ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। आधार हमारे देश का काफी जरूरी दस्तावेज बन गया है। देश के 130 करोड़+ लोगों के पास आज आधार है। इंस्टेंट बैंक अकाउंट या डीमैट अकाउंट खुलवाना हो, डिजी लॉकर, ओटीपी सिक्योरिटी, सरकार द्वारा लोगों को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर द्वारा दी जा रही सब्सिडी आदि कई जरूरी सेवाओं को सरकार आधार कार्ड की मदद से ही लोगों तक पहुंचा पा रही है। आधार कार्ड आने के बाद सरकारी सिस्टम में एक पारदर्शिता आई है। नंदन नीलेकणि वही शख्स हैं,, जिन्होंने देश को आधार कार्ड जैसी अहम सुविधा देकर डिजिटल इंडिया की तरफ कदम बढ़ाने में मदद की। इतना ही नहीं आज यूपीआई, फास्टैग, जीएसटी जैसी टेक्नोलॉजी देकर डिजिटल इंडिया की बुनियाद रखने में भी उनका बड़ा योगदान है। 
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नंदन नीलेकणि का शुरुआती जीवन?

नंदन नीलेकणि का जन्म देश के आईटी हब कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में 2 जून, 1955 को हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई बिशप कॉटन बॉय स्कूल में हुई। वहीं इन्होंने अपने हाई स्कूल की पढ़ाई सेंट जॉसेफ हाई स्कूल से पूरी की। उसके बाद नंदन नीलेकणि ने अपने इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के दम पर आईआईटी बॉम्बे में दाखिला पाया था।
 

नारायण मूर्ति के साथ मिलकर की इंफोसिस की शुरुआत

साल 1978 में उनकी मुलाकात नारायण मूर्ति से होती है। इन दोनों की मुलाकात के बाद ही इंफोसिस की शुरुआत हुई। ये 80 का दशक था। उस दौरान आज के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप काफी अलग था। इस दौर में किसी स्टार्टअप का ग्रो करना काफी मुश्किल काम था। करीब 10 वर्षों तक इंफोसिस काफी मुश्किल हालातों में चलती रही। वहीं साल 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए मेजर रिफॉर्म ने मानों इंफोसिस को एक नया रास्ता दे दिया हो।

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साल 1992 में इस कंपनी ने अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में लॉन्च किया। इसके बाद दुनिया भर में कई बड़ी कंपनियां इंफोसिस द्वारा बनाए सॉफ्टवेयर का उपयोग करने लगीं। यही नहीं इस दौरान कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी काफी तेजी से बढ़ने लगा था। साल 1999 में इंफोसिस NASDAQ पर लिस्ट होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी। लिस्ट होने के तुरंत बाद इस कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन एक अरब डॉलर के बैंचमार्क को पार कर दिया। साल 2002 में नंदन नीलेकणि को कंपनी का सीईओ बनाया गया।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने दी थी 'आधार' प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी

नंदन नीलेकणि की इसी काबिलियत को देखते हुए साल 2009 में तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें यूआईडीएआई प्रोजेक्ट का चेयरमेन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। डिजिटल इंडिया को आकार देने में यूआईडीएआई एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। आज दुनियाभर में आधार को सबसे बड़े बायोमीट्रिक सिस्टम के रूप में जाना जाता है। यूआईडीएआई हमारे बायोमेट्रिक डाटा को इकट्ठा करके इन्हें सेंट्रलाइज डाटा बेस में रखता है। आधार कार्ड आने के बाद आज कई सरकारी सेवाओं को बेहद ही कम समय में लोगों तक पहुंचाना संभव हो पाया है। आधार की मदद से आप ऑनलाइन पेमेंट, पेंशन आदि कई सेवाओं को बेहद ही कम समय में एक्सेस कर सकते हैं। 
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कांग्रेस से आजमा चुके हैं चुनाव में किस्मत

साल 2014 में नंदन नीलेकणि कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव भी लड़े। हालांकि, इस चुनाव में वो भाजपा के उम्मीदवार अनंत कुमार से बड़े अंतर से हार गए। हालांकि, कांग्रेस के बाद बनी भाजपा सरकार में उनकी हैसियत लगातार बढ़ती चली गई। मोदी सरकार में डिजिटल इंडिया को तेजी से बढ़ावा दिया गया। इसके चलते नंदन नीलेकणि सीधे पीएम मोदी के संपर्क में रहे। सरकार ने उन्हें कई जिम्मेदारियां दीं। इनमें डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने से लेकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम की निगरानी तंत्र के लिए उन्हें जिम्मेदारी दी गई है। खुद नंदन नीलेकणि ने कुछ मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तकनीक को समझने की त्वरित क्षमता और उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी चर्चा के दौरान नए विचारों पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं और आधुनिक टेक्नोलॉजी के विजन को तुरंत समझकर उसे लागू करने के लिए तत्पर रहते हैं।

यूपीआई और फास्टैग को किया डिजाइन

आपको शायद ही पता होगा कि आज जिस यूपीआई सिस्टम से हम लोग ऑनलाइन भुगतान करते हैं, वह नंदन नीलेकणि द्वारा ही डिजाइन किया गया है। 2014 के बाद नंदन नीलेकणि ने भारत की डिजिटल पेमेंटिंग सिस्टम में क्रांति लाने के बारे में सोचा। यही नहीं स्टैंडर्डाइजिंग इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम को डिजाइन करने का काम भी नंदन नीलेकणि और उनकी टीम ने किया। ऐसे में ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि भारत में आधार, जीएसटी, यूपीआई, फास्टैग जैसे सिस्टम को भारत में लाकर उन्होंने डिजिटल इंडिया के सपने को साकार किया है।

ओएनडीसी प्रोजेक्ट पर भी किया काम

आज भी नंदन नीलेकणि देश को एक नया आकार देने के लिए कई काम कर रहे हैं। आज वो भारत सरकार के साथ मिलकर देश में फ्री एक्सिसेबल ऑनलाइन सिस्टम को डिजाइन कर रहे हैं, जहां पर व्यापारी और ग्राहक एक छोटी चीज से लेकर बड़ी-बड़ी चीजों को खरीद सकेंगे। इस प्रोजेक्ट का नाम ओएनडीसी (ONDC Open Network For Digital Commerce) है, जो कि भारत में ई-कॉमर्स कंपनियों, जैसे- फ्लिपकार्ट और अमेजन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। 



 
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