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अमेरिका में पीएम मोदी: विदेश में कैसे होती है भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा, कौन संभालता है जिम्मेदारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 13 Feb 2025 08:37 PM IST
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पीएम मोदी की सुरक्षा में जुटीं एजेंसियां।
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अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका पहुंच चुके हैं। यहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होनी है। पीएम मोदी ने इससे पहले अमेरिका पहुंचने के ठीक बाद ट्रंप सरकार में राष्ट्रीय खुफिया विभाग (डायरेक्टोरेट ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस) की निदेशक तुलसी गबार्ड से मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों का भी अभिवादन किया।इस बीच प्रधानमंत्री मोदी के आसपास लगातार सुरक्षा का एक घेरा देखा गया। इनमें भारत की खुफिया एजेंसी के कर्मियों के साथ-साथ विदेशी सुरक्षाकर्मी भी नजर आए। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर विदेश दौरे पर पीएम मोदी की सुरक्षा कैसे होती है? उन्हें सुरक्षा कौन देता है? इसके मानक कैसे तय होते हैं? इसके अलावा रॉ, आईबी और अन्य एजेंसियों की सुरक्षा में क्या भूमिका होती है? इसके लिए क्या-क्या इंतजाम किए जाते हैं? साथ ही अमेरिकी एजेंसियां क्या भूमिका निभाती हैं? आइये जानते हैं...
अमेरिका और अन्य देशों में कैसे होती है पीएम मोदी की सुरक्षा?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे के वक्त आमतौर पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी उस देश की शीर्ष खुफिया और सरकारी एजेंसियों की होती है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारतीय एजेंसियों की वहां कोई भूमिका नहीं होती। बल्कि विदेश के अनजान माहौल में भारतीय पीएम को संभावित खतरे से बचाने के लिए एजेंसियों को अतिरिक्त तैयारियां करनी पड़ती हैं।
भारत के प्रधानमंत्री जब विदेश दौरे पर जाते हैं, तब उनकी सुरक्षा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के 100 से 150 कमांडो लगातार साथ रहते हैं। लेकिन यह व्यवस्था दौरे वाली जगह की संवेदनशीलता और जटिलताओं के हिसाब से बदली भी जाती रही है। दरअसल, अमेरिका में विदेश के राष्ट्राध्यक्षों को सुरक्षा मुहैया कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षा देने वाली एजेंसी- 'सीक्रेट सर्विस' की होती है। इस एजेंसी का काम मुख्यतः एसपीजी की तरह ही होता है।
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे के वक्त आमतौर पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी उस देश की शीर्ष खुफिया और सरकारी एजेंसियों की होती है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारतीय एजेंसियों की वहां कोई भूमिका नहीं होती। बल्कि विदेश के अनजान माहौल में भारतीय पीएम को संभावित खतरे से बचाने के लिए एजेंसियों को अतिरिक्त तैयारियां करनी पड़ती हैं।
भारत के प्रधानमंत्री जब विदेश दौरे पर जाते हैं, तब उनकी सुरक्षा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के 100 से 150 कमांडो लगातार साथ रहते हैं। लेकिन यह व्यवस्था दौरे वाली जगह की संवेदनशीलता और जटिलताओं के हिसाब से बदली भी जाती रही है। दरअसल, अमेरिका में विदेश के राष्ट्राध्यक्षों को सुरक्षा मुहैया कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षा देने वाली एजेंसी- 'सीक्रेट सर्विस' की होती है। इस एजेंसी का काम मुख्यतः एसपीजी की तरह ही होता है।
भारतीय पीएम की सुरक्षा के लिए सीक्रेट सर्विस भारत की एजेंसियों की मदद भी लेती है। उदाहरण के तौर पर...
पहले जानें- क्या होता है रॉ और आईबी की भूमिका?
भारत के प्रधानमंत्री का विदेश दौरा सुनिश्चित होने के बाद सबसे पहले R&AW और आईबी से जुड़े अधिकारी अमेरिका पहुंच जाते हैं। पीएम के शेड्यूल के हिसाब से यह अधिकारी उन जगहों का मुआयना करते हैं जहां-जहां प्रधानमंत्री का दौरा तय होता है। सुरक्षा अधिकारी इन जगहों पर पैदा होने वाले खतरों को भी भांपने की कोशिश करते हैं और अपनी पहचान छिपाकर जरूरी जानकारी जुटाते हैं।
अमेरिका में सुरक्षा के उच्च मानकों के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को अपने विश्लेषणों को सीमित रखना पड़ता है। उन्हें बेरोकटोक हर इलाके में जांच-पड़ताल करने की इजाजत नहीं होती। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका की सीक्रेट सर्विस और एफबीआई जैसी अन्य एजेंसियां इस काम में भारतीय खुफिया एजेंसियों की अतिरिक्त मदद करती हैं।
भारत के प्रधानमंत्री का विदेश दौरा सुनिश्चित होने के बाद सबसे पहले R&AW और आईबी से जुड़े अधिकारी अमेरिका पहुंच जाते हैं। पीएम के शेड्यूल के हिसाब से यह अधिकारी उन जगहों का मुआयना करते हैं जहां-जहां प्रधानमंत्री का दौरा तय होता है। सुरक्षा अधिकारी इन जगहों पर पैदा होने वाले खतरों को भी भांपने की कोशिश करते हैं और अपनी पहचान छिपाकर जरूरी जानकारी जुटाते हैं।
अमेरिका में सुरक्षा के उच्च मानकों के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को अपने विश्लेषणों को सीमित रखना पड़ता है। उन्हें बेरोकटोक हर इलाके में जांच-पड़ताल करने की इजाजत नहीं होती। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका की सीक्रेट सर्विस और एफबीआई जैसी अन्य एजेंसियां इस काम में भारतीय खुफिया एजेंसियों की अतिरिक्त मदद करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में आईबी की क्या जिम्मेदारी?
दूसरी तरफ इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीमें अमेरिका में भारतीय दूतावास, वाणिज्य दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में रहती हैं। आईबी प्रधानमंत्री के दौरे वाले इलाके में स्थानीय सुरक्षाबल के साथ हालात की समीक्षा करती है और पीएम के दौरे पर होने वाले प्रदर्शनों या जुटाव की निगरानी करती हैं। आईबी के एजेंट अमेरिका की घरेलू सुरक्षा एजेंसियों (सीक्रेट सर्विस-एफबीआई) के साथ भी तालमेल बिठा कर रखते हैं।
हर स्थिति से निपटने के लिए योजना तैयार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमेरिका दौरे पर होते हैं, तब एसपीजी के कमांडो साये की तरह उनके साथ ही रहते हैं। यहां तक कि एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले बेड़ों में भी स्थानीय एजेंसियों के साथ-साथ एसपीजी के जवान शामिल होते हैं। इन एजेंसियों के बीच साझा तौर पर हर परिस्थिति से निपटने के लिए योजना भी पहले ही तैयार कर ली जाती है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमेरिका दौरे पर होते हैं, तब एसपीजी के कमांडो साये की तरह उनके साथ ही रहते हैं। यहां तक कि एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले बेड़ों में भी स्थानीय एजेंसियों के साथ-साथ एसपीजी के जवान शामिल होते हैं। इन एजेंसियों के बीच साझा तौर पर हर परिस्थिति से निपटने के लिए योजना भी पहले ही तैयार कर ली जाती है।
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