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Mumbai: जेल से सीधे परीक्षा हॉल पहुंचेगा पॉक्सो का आरोपी; नीट री-टेस्ट के लिए कोर्ट ने दी चार दिन की जमानत
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 19 Jun 2026 09:03 AM IST
सार
अदालत ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद आरोपी को 21 जून को होने वाली नीट री-टेस्ट परीक्षा में शामिल होने के लिए चार दिन की अस्थायी जमानत दी है। अदालत ने सख्त शर्तों के साथ राहत देते हुए आरोपी को 22 जून तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुंबई की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद 18 वर्षीय युवक को 21 जून को होने वाली NEET री-टेस्ट परीक्षा में शामिल होने के लिए चार दिन की अस्थायी जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश एस.आर. शर्मा ने गुरुवार को नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल में बंद आरोपी को राहत प्रदान की। यह राहत तब दी गई जब रेप पीड़िता ने अदालत में कोई आपत्ति नहीं जताई, बशर्ते आरोपी जमानत के दौरान उसके परिवार को बदनाम या धमकाने की कोशिश न करे।
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परीक्षा के बाद तुरंत सरेंडर करने का आदेश
अदालत ने आरोपी को 18 जून से 21 जून तक चार दिन की अस्थायी जमानत 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानतदार शर्त पर प्रदान की। कोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पुनर्परीक्षा के अगले दिन यानी 22 जून को दोपहर 2 बजे से पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करेगा।
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दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है मामला
18 वर्षीय आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की रेप संबंधी धाराओं के अलावा, बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत मामला दर्ज है। आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता कपिल विश्वास जोडगे ने दलील दी कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य दोषियों और जेल में बंद व्यक्तियों के पुनर्वास को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि युवक को मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होकर अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर मिलना चाहिए।
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पुलिस निगरानी में परीक्षा का विरोध
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस सुरक्षा में परीक्षा देने से आरोपी की मानसिक स्थिति प्रभावित होगी और उसे परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता है। वहीं, विशेष लोक अभियोजक चैत्राली पांशीकर ने आरोपी की अस्थायी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उस पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं।
अभियोजन ने पुलिस एस्कॉर्ट के साथ परीक्षा की दी थी सलाह
अभियोजन पक्ष ने सुझाव दिया कि आरोपी को केवल एक दिन के लिए पुलिस एस्कॉर्ट के साथ परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत उच्च माध्यमिक परीक्षा प्रमाणपत्र और नीट का अस्थायी प्रवेश पत्र देखने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी को अस्थायी जमानत देने के लिए 'स्पष्ट और वैध आधार' मौजूद हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को आवश्यक शर्तें लगाकर दूर किया जा सकता है।
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पीड़िता से संपर्क पर पूरी तरह रोक
अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह किसी भी प्रकार से पीड़िता से संपर्क नहीं करेगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करने या धमकाने की कोशिश नहीं करेगा। न्यायाधीश ने आरोपी को यह भी निर्देश दिया कि वह परीक्षा में शामिल होने संबंधी एक लिखित आश्वासन प्रस्तुत करे और आत्मसमर्पण के समय परीक्षा में शामिल होने के दस्तावेज भी जमा करे।