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सशक्त भारत के लिए कर्मयोग अभियान: शुभारंभ के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा- नैतिकता-आध्यात्मिकता बिना विकास अधूरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 13 Feb 2026 07:21 PM IST
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सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में 'सशक्त भारत के लिए कर्मयोग' अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की के लिए आर्थिक विकास के साथ नैतिक मूल्य और आध्यात्मिकता अनिवार्य हैं। बिना नैतिकता के विकास समाज और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। कर्मयोग से ही एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।

President launches Karma Yoga for a Strong India campaign says development is incomplete without morality
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सात फरवरी को छत्तीसगढ़ आएंगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक विशेष अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ब्रह्म कुमारी संस्थान के देशव्यापी अभियान 'सशक्त भारत के लिए कर्मयोग' की शुरुआत की। राष्ट्रपति ने गुरुग्राम में स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।
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संबोधन में राष्ट्रपति ने क्या कहा?
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि देश के संतुलित विकास के लिए केवल भौतिक प्रगति काफी नहीं है। इसके साथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि आर्थिक उन्नति से समृद्धि आती है और तकनीक से काम में कुशलता बढ़ती है। ये दोनों चीजें एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखती हैं। लेकिन अगर विकास में नैतिकता नहीं होगी, तो समाज का संतुलन बिगड़ सकता है।
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राष्ट्रपति ने कहा अनैतिक आर्थिक प्रगति धन और संसाधनों के केंद्रीकरण नुकसान और समाज के कमजोर वर्गों के शोषण का कारण बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नैतिक मूल्यों के बिना तकनीक का इस्तेमाल पूरी मानवता के लिए विनाशकारी हो सकता है।

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नैतिकता और आध्यात्मिकता को बताया समाज के लिए जरूरी
आध्यात्मिकता के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमें ईमानदारी, दया और अहिंसा जैसे गुण सिखाती है। ये गुण एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए आवश्यक हैं। जब हमारे विचार आध्यात्मिक होते हैं, तो हम स्वार्थ छोड़कर सबके भले के बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व आध्यात्मिकता के आधार पर ही निष्पक्ष फैसले ले सकता है। ऐसे फैसले किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सबके कल्याण के लिए होते हैं। इससे समाज में भरोसा बढ़ता है।

राष्ट्रपति ने ब्रह्म कुमारी संस्थान के राजयोग और कर्मयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि कर्मयोग का अर्थ अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए ऊंचे सिद्धांतों पर चलना है। लाखों लोग कर्मयोग अपनाकर सार्थक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हर नागरिक कर्मयोग अपनाकर भारत के विकास में योगदान दे सकता है। इससे भारत पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श बनेगा।

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