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Land For Jobs Case: सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया, लालू प्रसाद यादव को पेशी से मिली छूट
Mon, 13 Apr 2026 12:13 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 13 Apr 2026 12:13 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से इस घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन लालू यादव को निचली अदालतों में व्यक्तिगत पेशी से छूट मिलना एक अहम राहत है। मामले का भविष्य दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय पर टिका है, जो सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करेगा।
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लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को निचली अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान की है।
यह भी पढ़ें - सुप्रीम कोर्ट फर्जी मतदान पर सख्त: क्या बायोमेट्रिक सिस्टम से मतदान? अदालत ने केंद्र-चुनाव आयोग से मांगा जवाब
यह फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय को जल्द सुनवाई का निर्देश भी दिया है।
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क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?
जमीन के बदले नौकरी घोटाला कथित तौर पर उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीनें ली गईं। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। लालू यादव ने इस मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वह सीधे तौर पर निचली अदालत की कार्यवाही को नहीं रोक सकता। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता को पहले संबंधित अदालतों में अपनी बात रखनी चाहिए। हालांकि, लालू यादव को व्यक्तिगत रूप से अदालतों में पेश होने की बाध्यता से छूट देकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ राहत जरूर दी है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य कारणों या अन्य व्यस्तताओं के चलते बार-बार अदालत जाने से मुक्ति मिलेगी।
यह भी पढ़ें - Assembly Elections: बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप तेज, भाजपा बोली- TMC कर रही नियमों का उल्लंघन; ECI जांच में जुटा
मामले में आगे क्या होगा?
अब दिल्ली उच्च न्यायालय सीबीआई की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करेगा। इस मामले में आगे की कार्यवाही उच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि उच्च न्यायालय इस मामले में जल्द ही अपना निर्णय देगा।
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यह फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय को जल्द सुनवाई का निर्देश भी दिया है।
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क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?
जमीन के बदले नौकरी घोटाला कथित तौर पर उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीनें ली गईं। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। लालू यादव ने इस मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वह सीधे तौर पर निचली अदालत की कार्यवाही को नहीं रोक सकता। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता को पहले संबंधित अदालतों में अपनी बात रखनी चाहिए। हालांकि, लालू यादव को व्यक्तिगत रूप से अदालतों में पेश होने की बाध्यता से छूट देकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ राहत जरूर दी है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य कारणों या अन्य व्यस्तताओं के चलते बार-बार अदालत जाने से मुक्ति मिलेगी।
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मामले में आगे क्या होगा?
अब दिल्ली उच्च न्यायालय सीबीआई की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करेगा। इस मामले में आगे की कार्यवाही उच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि उच्च न्यायालय इस मामले में जल्द ही अपना निर्णय देगा।
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