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New Medicine Rule: वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल और कैंसर की दवाओं पर क्यूआर कोड जरूरी; जानें कब से लागू होगा नियम

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 25 Jun 2026 03:45 PM IST
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सार

सरकार ने नकली और घटिया दवाओं पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब टीके, कैंसर, एंटीबायोटिक और मादक-मनोरोगी दवाओं पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा। इससे दवाओं की पहचान और सत्यापन आसान होगा। 

QR codes mandatory for vaccines, antimicrobials, and cancer ; find out when the rule comes into effect.
दवाई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सरकार ने नकली और घटिया दवाओं पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी एंटीबायोटिक (रोगाणुरोधी) दवाओं, टीकों, कैंसर की दवाओं और मादक व मनोरोग संबंधी दवाओं पर भी क्यूआर कोड आधारित ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम लागू किया जाएगा। 

क्यूआर कोड चिपकाना जरूरी 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है, जिसके तहत दवाओं की इन श्रेणियों को अनुसूची एच2 के अंतर्गत लाया गया है, जिसमें उत्पाद की पहचान और सत्यापन के लिए बार कोड या त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआर) कोड का उपयोग अनिवार्य है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रावधानों के तहत, निर्माताओं को दवा के प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर या स्थान की कमी होने पर द्वितीयक पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड चिपकाना जरूरी होगा।

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क्यूआर कोड से क्या काम करेगा?
यह कोड आपूर्ति श्रृंखला में सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के माध्यम से दवाओं के प्रमाणीकरण और सत्यापन करेगा। मंत्रालय के अनुसार, क्यूआर कोड में उत्पाद की प्रमुख जानकारी जैसे कि एक विशिष्ट उत्पाद पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, निर्माता का नाम और पता, बैच संख्या, निर्माण और समाप्ति तिथियां, निर्माण लाइसेंस संख्या और जहां लागू हो वहां सहायक पदार्थों का विवरण शामिल होगा।

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मंत्रालय ने कहा कि यह आवश्यकता पहले देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों पर ही लागू थी। नया संशोधन के साथ, इसका दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया गया है। इसमें मादक औषधि एवं मनोरोग पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत विनियमित सभी टीके, रोगाणुरोधी दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं और मादक एवं मनोरोग दावे शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि  ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क से आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों में उत्पादों के  सत्यापन को सक्षम बनाकर नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की उम्मीद है।

कब से लागू होगा नया नियम?

मंत्रालय ने कहा कि यह उपाय नकली दवाओं के वितरण पर रोक लगाने के प्रयासों में मदद करेंगा। इसके साथ ही नकली और घटिया रोगाणुरोधी उत्पादों की बेहतर पहचान और निगरानी को सुविधाजनक बनाकर रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के खिलाफ भारत की लड़ाई में योगदान देगा। अधिसूचना में कहा गया है कि टीकों, कैंसर रोधी दवाओं और मादक एवं मनोरोगी दवाओं से संबंधित प्रावधान इस वर्ष 1 जुलाई से लागू होंगे। वहीं, रोगाणुरोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे।

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