QA: दिल्ली में कल गुणवत्ता आश्वासन उद्योग सम्मेलन, जहाज निर्माण और रक्षा उपकरण में गुणवत्ता पर होगा मंथन
13 फरवरी को नई दिल्ली में गुणवत्ता आश्वासन उद्योग सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इसमें नौसेना, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत मिलकर जहाज निर्माण और उपकरणों की गुणवत्ता पर चर्चा करेंगे।
विस्तार
नई दिल्ली में कल यानी 13 फरवरी को एक अहम क्वालिटी एश्योरेंस (क्यूए) इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत के बड़े अधिकारी मिलकर जहाज निर्माण और संबंधित उपकरणों की भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। रक्षा निर्माण में आज गुणवत्ता सिर्फ तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन चुकी है। युद्धपोत हों, कॉम्बैट सिस्टम हों या स्पेयर पार्ट्स, हर उपकरण की विश्वसनीयता सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में यह जरूरी है कि हर जहाज और उपकरण उच्च गुणवत्ता वाला हो।
कॉन्क्लेव का आयोजन नई दिल्ली के मानेकशॉ ऑडिटोरियम में होगा। इसकी थीम है ‘ट्रेसबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट' टेक्नोलॉजी के जरिए स्मार्ट क्वालिटी एश्योरेंस’। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, नौसेना, शिपयार्ड, रक्षा पीएसयू और निजी कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे। उद्देश्य है रक्षा निर्माण में गुणवत्ता की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सामान बनाना काफी नहीं है। हर पार्ट की पूरी जानकारी होना जरूरी है, यह कहां बना, कैसे बना और किस स्टेज पर जांच हुई। डिजिटल तकनीक से इस पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जा सकता है। कॉन्क्लेव में यह भी चर्चा होगी कि कैसे टेक्नोलॉजी की मदद से मंजूरी और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए और इंडस्ट्री और नौसेना के बीच भरोसा मजबूत किया जाए।
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तकनीकी सत्रों में खासकर किन मुद्दों पर चर्चा होगी
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जहाज निर्माण में डिजिटल क्वालिटी सिस्टम
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नीतियों का पालन और इंडस्ट्री के साथ तालमेल
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स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई में गुणवत्ता
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हर स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न होने की व्यवस्था
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कुछ अहम पहलें भी शुरू की जाएंगी
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‘इंडियन नेवल एंड मरीन इंडस्ट्री- 'ए कैपेबिलिटी कैटलॉग’ जारी होगा, जिससे इंडस्ट्री की क्षमता एक जगह देखी जा सकेगी।
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कॉम्बैट सिस्टम और सेंसर डेटा को बेहतर मैनेज करने के लिए संयुक्त दिशा-निर्देश जारी होंगे।
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अच्छा क्वालिटी रिकॉर्ड रखने वाली कंपनियों को ‘ग्रीन चैनल स्टेटस’ और ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ की सुविधा दी जाएगी, ताकि मंजूरी प्रक्रिया तेज हो सके।
इस कॉन्क्लेव को रक्षा निर्माण को अधिक आधुनिक, डिजिटल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की साख भी वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।
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