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RERA: सुप्रीम कोर्ट ने रेरा को लगाई कड़ी फटकार, कहा- वह सिर्फ दिवालिया बिल्डरों के लिए काम करता है
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 12 Feb 2026 04:42 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की कार्यप्रणाली पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह संस्था दिवालिया होने वाले बिल्डरों की मदद करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है और अब समय आ गया है कि सभी राज्य इसके गठन पर दोबारा विचार करें।
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'रेरा को खत्म करने पर मुझे आपत्ति नहीं होगी'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के हितों की रक्षा के लिए रेरा बनाया गया था, वे पूरी तरह उदास, निराश और हताश हैं और उन्हें कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही। कोर्ट ने यहां तक कहा कि यदि इस संस्था को समाप्त भी कर दिया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
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राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि शिमला में भीड़ कम करने और प्रशासनिक कारणों से कार्यालय स्थानांतरण का निर्णय लिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने पीठ को बताया कि सरकार रेरा को धर्मशाला शिफ्ट करना चाहती है। विरोधी पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि रेरा के लगभग 90 प्रतिशत प्रोजेक्ट और 92 प्रतिशत लंबित शिकायतें शिमला, सोलन, परवाणू और सिरमौर जिलों से संबंधित हैं, जो 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं, जबकि धर्मशाला में केवल 20 प्रोजेक्ट हैं।
सुनवाई के दौरान जब पीठ को बताया गया कि रेरा में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की गई है, तो मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कई राज्यों में ऐसी संस्थाएं रिहैबिलिटेशन सेंटर बन गई हैं। याचिका पर नोटिस जारी करते हुए, बेंच ने कहा, राज्य को रेरा का ऑफिस अपनी पसंद की जगह पर शिफ्ट करने की इजाजत है। हालांकि, यह हाईकोर्ट में पेंडिंग रिट पिटीशन के आखिरी नतीजे पर निर्भर करेगा। हिमाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल ने बेंच को बताया कि एक पॉलिसी फैसले के मुताबिक, राज्य पालमपुर, धर्मशाला और दूसरे शहरों को डेवलप कर रहा है।
सीजेआई ने पूछा, "एक सेवानिवृत्त अधिकारी को रखने का क्या लॉजिक है? वह पालमपुर को विकसित करने में कैसे मदद कर पाएगा। आपको किसी ऐसे आर्किटेक्ट की सर्विस लेनी होगी जो पर्यावरण संरक्षक हो, जो पालमपुर एरिया, धर्मशाला एरिया और इन सभी एरिया को जानता हो। सिर्फ़ वही लोग मदद करेंगे। बेंच को यह भी बताया गया कि शिमला के जिला जज रेरा के पास किए गए ऑर्डर के खिलाफ अपील सुनते हैं।
बेंच ने कहा, "यह पक्का करने के लिए कि रेरा के ऑर्डर से प्रभावित लोगों को अपील फाइल करने के लिए शिमला आने में कोई दिक्कत न हो, यह भी निर्देश दिया जाता है कि अपील करने की शक्ति शिमला के मुख्य जिला जज से धर्मशाला के मुख्य जिला जज को स्थानांतरित की जाए।
9 फरवरी को एक अलग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस अंतरिम ऑर्डर को रद्द कर दिया था जिसमें ओबीसी आयोग को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले पॉलिसी से जुड़े फैसलों से जुड़े होते हैं और आमतौर पर ज्यूडिशियल डोमेन में नहीं आते हैं।