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Hindi News ›   India News ›   Rajnath Singh will induct indigenous stealth frigate Mahendragiri into the Indian Navy Project 17A frigate

Defence: आज नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि, समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत; क्या है खासियत?

Sat, 11 Jul 2026 01:16 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/विशाखापत्तनम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/विशाखापत्तनम Published by: अमन तिवारी Updated Sat, 11 Jul 2026 01:16 AM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम में स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल करेंगे। यह बेहद आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट स्वदेशी तकनीक से बना है। इसके शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी।

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Rajnath Singh will induct indigenous stealth frigate Mahendragiri into the Indian Navy Project 17A frigate
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज नौसेना में शामिल करेंगे स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज यानि शनिवार 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल करेंगे। यह कार्यक्रम विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित होगा। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने इस अवसर को देश और भारतीय नौसेना के लिए एक गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह आधुनिक युद्धपोत हमारे आत्मनिर्भर भारत के सपने और घरेलू रक्षा उद्योगों की ताकत का एक बड़ा प्रमाण है।
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आधुनिक तकनीकों और हथियारों से है लैस
इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने किया है। महेंद्रगिरि में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, रडार से बचने की क्षमता और उच्च स्तर का ऑटोमेशन (स्वचालन) शामिल है। यह युद्धपोत हवा, सतह और पानी के अंदर होने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए आधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस है। इसके अलावा, यह समुद्री सुरक्षा अभियानों, खोज और बचाव कार्यों, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी पूरी तरह सक्षम है। यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भी लंबे समय तक तैनात रहने की क्षमता रखता है।
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पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला पर रखा गया नाम
इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। भारतीय नौसेना के इतिहास में इस नाम का यह पहला युद्धपोत है, जो अपने आप में अनूठा है। इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में एमएसएमई (MSMEs) सहित कई भारतीय उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे देश के रक्षा आधार को मजबूती मिली है और रोजगार पैदा हुए हैं। इस युद्धपोत का आदर्श वाक्य शक्तिशाली-भव्य-अतुलनीय (Mighty-Majestic-Matchless) है।
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विशाखापत्तनम पहुंचे रक्षा मंत्री
इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम को ही विशाखापत्तनम पहुंच गए थे। हवाई अड्डे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हमारे संकल्प को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस युद्धपोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ेगी। यह भारत को युद्धपोत निर्माण में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
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