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क्या राजनीति से संन्यास लेंगे विधायक रहे मदन मित्रा?: बोले- इतनी नफरत है, अब थक चुका हूं; आगे क्या करेंगे?
Fri, 23 Oct 2026 10:39 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Oct 2026 10:39 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल से टीएमसी के बागी विधायक मदन मित्रा निराश हैं। उन्होंने राजनीति में बढ़ती नफरत और आम लोगों की परेशानी का जिक्र करते हुए इसे छोड़ने के संकेत दिए हैं। आखिर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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मदन मित्रा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
कमरहाटी के विधायक मदन मित्रा ने पश्चिम बंगाल के मौजूदा सियासी माहौल को लेकर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति से थक चुके हैं और इसे छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। मित्रा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी छोड़ दी थी। इसके बाद वह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल गुट में शामिल हो गए थे।
मित्रा ने गुरुवार को एक बंगाली टेलीविजन चैनल से बात की। उन्होंने कहा कि लोग डर और परेशानी के बीच जी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान माहौल पिछले वर्षों से काफी अलग था। उन्होंने कहा, पहले की दुर्गा पूजाओं के दौरान इतने आंसू नहीं बहे थे। चारों ओर दुख और परेशानी का माहौल है।
चार बार विधायक रह चुके मित्रा ने आम लोगों की मुश्किलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह उत्तर 24 परगना जिले में अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूम नहीं पा रहे हैं। वह मतदाताओं तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा, जिन लोगों ने मुझे वोट दिया, वे मुझसे मिल भी नहीं पा रहे हैं। मैं असमंजस में हूं। मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता, जिससे लोगों को परेशानी हो।
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राजनीति से क्यों हुए निराश?
मदन मित्रा ने दावा किया कि मौजूदा हालात में लोग परेशान हैं और संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति से दूर होना उन विकल्पों में से एक है, जिन पर वह विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, एक रास्ता राजनीति छोड़ना है। मैं बहुत थक चुका हूं। राजनीति में इतनी नफरत है। मुझे राजनीति से नफरत हो गई है।
ये भी पढ़ें: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में क्यों मची भगदड़?: फोरेंसिक रिपोर्ट में पता चली चूक, न्यायिक समिति ने उठाए सवाल
अधिकारी से क्या चाहते हैं मित्रा?
उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। मित्रा ने कहा कि वह उनसे संपर्क करना चाहते हैं। मित्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ शुभेंदु अधिकारी को भी शुभकामनाएं दीं। इससे संकेत मिला कि राजनीति से उनकी निराशा केवल किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, मैं दीदी (ममता बनर्जी) और अपने छोटे भाई शुभेंदु को शुभकामनाएं देता हूं। मित्रा ने आगे कहा, हमारे मुख्यमंत्री बहुत सक्रिय हैं। वह हर दिन कई कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। लेकिन मैं एक प्रजा के रूप में बस उन तक पहुंचना चाहता हूं।
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मित्रा ने गुरुवार को एक बंगाली टेलीविजन चैनल से बात की। उन्होंने कहा कि लोग डर और परेशानी के बीच जी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान माहौल पिछले वर्षों से काफी अलग था। उन्होंने कहा, पहले की दुर्गा पूजाओं के दौरान इतने आंसू नहीं बहे थे। चारों ओर दुख और परेशानी का माहौल है।
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चार बार विधायक रह चुके मित्रा ने आम लोगों की मुश्किलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह उत्तर 24 परगना जिले में अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूम नहीं पा रहे हैं। वह मतदाताओं तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा, जिन लोगों ने मुझे वोट दिया, वे मुझसे मिल भी नहीं पा रहे हैं। मैं असमंजस में हूं। मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता, जिससे लोगों को परेशानी हो।
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राजनीति से क्यों हुए निराश?
मदन मित्रा ने दावा किया कि मौजूदा हालात में लोग परेशान हैं और संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति से दूर होना उन विकल्पों में से एक है, जिन पर वह विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, एक रास्ता राजनीति छोड़ना है। मैं बहुत थक चुका हूं। राजनीति में इतनी नफरत है। मुझे राजनीति से नफरत हो गई है।
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अधिकारी से क्या चाहते हैं मित्रा?
उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। मित्रा ने कहा कि वह उनसे संपर्क करना चाहते हैं। मित्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ शुभेंदु अधिकारी को भी शुभकामनाएं दीं। इससे संकेत मिला कि राजनीति से उनकी निराशा केवल किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, मैं दीदी (ममता बनर्जी) और अपने छोटे भाई शुभेंदु को शुभकामनाएं देता हूं। मित्रा ने आगे कहा, हमारे मुख्यमंत्री बहुत सक्रिय हैं। वह हर दिन कई कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। लेकिन मैं एक प्रजा के रूप में बस उन तक पहुंचना चाहता हूं।