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दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल: सितंबर में 330 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे; स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?
Fri, 23 Oct 2026 08:41 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Oct 2026 08:41 PM IST
सार
सितंबर में 330 दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। दिल्ली में दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम से बनी एक नकली दवा भी मिली। आखिर जांच में क्या सामने आया और ऐसी दवाओं पर क्या कार्रवाई होगी? पढ़िए रिपोर्ट
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद
विस्तार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि सितंबर महीने की दवा चेतावनी रिपोर्ट में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने विभिन्न कंपनियों की ओर से बनाई गई दवाओं के 42 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया। इन नमूनों को 'मानक गुणवत्ता का नहीं' (एनएसक्यू) घोषित किया गया है। इसके अलावा, राज्य औषधि जांच प्रयोगशालाओं ने भी दवाओं के 288 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया है।
दवाओं की गुणवत्ता की जांच कैसे होती है?
मंत्रालय ने बताया कि नियमित नियामक निगरानी गतिविधि के तहत मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई गई और नकली दवाओं की सूची हर महीने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पोर्टल पर जारी की जाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि सितंबर 2026 में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने दवाओं के 42 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया। वहीं, राज्य औषधि जांच प्रयोगशालाओं ने दवाओं के 288 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया।
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गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं मानने का क्या मतलब है?
मंत्रालय ने कहा कि दवा के नमूने को मानक गुणवत्ता का नहीं तब माना जाता है, जब वह तय गुणवत्ता मानकों में से किसी एक या अधिक पर खरा नहीं उतरता। यह कमी सरकारी प्रयोगशाला में जांचे गए दवा के बैच से जुड़ी होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध दूसरी दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल है।
ये भी पढ़ें: टाइगर श्रॉफ गोलीबारी मामला: अंधेरी के होटल में ठहरे थे तीन आरोपी, कमरा सील; अब तक क्या-क्या हुआ?
दिल्ली में भी नकली दवा का एक नमूना मिला
इसके अलावा, दिल्ली से दवा का एक नमूना नकली पाया गया। इसे अनधिकृत निर्माताओं ने बनाया था। उन्होंने इसके लिए एक दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया था। यह ब्रांड नाम उस कंपनी के स्वामित्व में है। मंत्रालय ने बताया कि इस मामले की जांच चल रही है। कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या कार्रवाई होती है?
मंत्रालय ने कहा कि गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली और नकली दवाओं की पहचान के लिए नियमित रूप से कार्रवाई की जाती है। यह कार्रवाई राज्य नियामकों के सहयोग से की जाती है। इसका उद्देश्य ऐसी दवाओं की पहचान करना और उन्हें बाजार से हटाना है।
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दवाओं की गुणवत्ता की जांच कैसे होती है?
मंत्रालय ने बताया कि नियमित नियामक निगरानी गतिविधि के तहत मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई गई और नकली दवाओं की सूची हर महीने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पोर्टल पर जारी की जाती है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि सितंबर 2026 में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने दवाओं के 42 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया। वहीं, राज्य औषधि जांच प्रयोगशालाओं ने दवाओं के 288 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया।
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गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं मानने का क्या मतलब है?
मंत्रालय ने कहा कि दवा के नमूने को मानक गुणवत्ता का नहीं तब माना जाता है, जब वह तय गुणवत्ता मानकों में से किसी एक या अधिक पर खरा नहीं उतरता। यह कमी सरकारी प्रयोगशाला में जांचे गए दवा के बैच से जुड़ी होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध दूसरी दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल है।
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दिल्ली में भी नकली दवा का एक नमूना मिला
इसके अलावा, दिल्ली से दवा का एक नमूना नकली पाया गया। इसे अनधिकृत निर्माताओं ने बनाया था। उन्होंने इसके लिए एक दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया था। यह ब्रांड नाम उस कंपनी के स्वामित्व में है। मंत्रालय ने बताया कि इस मामले की जांच चल रही है। कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या कार्रवाई होती है?
मंत्रालय ने कहा कि गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली और नकली दवाओं की पहचान के लिए नियमित रूप से कार्रवाई की जाती है। यह कार्रवाई राज्य नियामकों के सहयोग से की जाती है। इसका उद्देश्य ऐसी दवाओं की पहचान करना और उन्हें बाजार से हटाना है।