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एआई और ड्रोन तकनीक पर सेना का फोकस: भविष्य की चुनौतियों के लिए देश तैयार, राजनाथ सिंह ने क्या निर्देश दिए?

Fri, 23 Oct 2026 09:18 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 23 Oct 2026 09:18 PM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना कमांडरों से अगले 20-30 साल की रणनीतिक तैयारी करने और एआई, ड्रोन, साइबर सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीक पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया और थल युद्ध सिद्धांत जारी किया। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंचा। क्या भारत भविष्य के युद्धों के लिए तैयार है? सेना की रणनीति और तकनीक में कौन-से बदलाव अहम होंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Army Focuses on AI and Drone Technology: Is India Ready for Future Challenges what rajnath singh says
ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले राजनाथ सिंह? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों से भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अगले 20 से 30 साल की रणनीतिक तैयारी करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना को न केवल मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा, बल्कि बदलती तकनीक और युद्ध के तरीकों को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के हिसाब से भी अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी। नई दिल्ली में सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत के अनुसार रणनीति बदलने पर जोर दिया।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें बदलते हालात के अनुसार समय पर बदलाव किया जा सके। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि नए विचारों, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, मजबूत समन्वय और आधुनिक हथियारों ने इस अभियान की सफलता में योगदान दिया। उनके मुताबिक, इस अभियान ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सेना की बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता की सराहना की और कहा कि भविष्य की तैयारी के साथ तत्काल सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी बनाए रखनी होगी।
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सेना को अगले 20-30 साल के लिए कैसी तैयारी करनी होगी?
रक्षा मंत्री ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे दुनिया और आसपास के क्षेत्रों में हो रहे बदलावों का बारीकी से आकलन करें। युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए सेना की योजनाएं भी समय के साथ बदलनी चाहिए। उन्होंने सेना में पुनर्गठन के प्रयासों की सराहना करते हुए ड्रोन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही, सैन्य क्षमताओं का लगातार आकलन करने और कमियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुधार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका असर सेना की वास्तविक संचालन क्षमता में भी दिखाई देना चाहिए।
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आधुनिक युद्ध में AI और ड्रोन की भूमिका क्यों बढ़ रही है?
राजनाथ सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, स्वायत्त प्रणालियों, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम करने की जरूरत बताई। इन तकनीकों से सेना को जानकारी जुटाने, खतरों का आकलन करने और तेजी से फैसले लेने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन तक सीमित नहीं है। हवाई क्षेत्र, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में भी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद थल युद्ध और जमीनी सैनिकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने आधुनिक युद्ध के लिए एकीकृत व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली सैन्य क्षमताओं और संयुक्त अभियानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता में भारत ने कितनी प्रगति की?
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 38 हजार करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। राजनाथ सिंह ने वर्ष 2025 को सुधारों का वर्ष बताते हुए कहा कि सुधार लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और उनकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने सेना में मानव संसाधन प्रबंधन बेहतर करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया।


सेना कमांडरों के सम्मेलन में कौन-से अहम फैसले और पहल हुईं?
सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने थल युद्ध सिद्धांत जारी किया। यह दस्तावेज बदलते युद्ध के स्वरूप और भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने का व्यापक ढांचा उपलब्ध कराता है। उन्होंने वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जर्नल का भी अनावरण किया और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया। इन जवानों की पेशेवर क्षमता, सेवा और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन का उद्देश्य सेना की मौजूदा पहलों की समीक्षा करना, भविष्य की प्राथमिकताएं तय करना और तकनीक से लैस, बदलाव के अनुकूल तथा भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना बनाने की दिशा में नीतिगत फैसलों पर विचार करना था।

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