एसआईआर पर क्यों भड़के सीएम रेवंत रेड्डी?: पीएम मोदी पर लगाया वोट हटाने का आरोप, ज्ञानेश कुमार को भी घेरा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एसआईआर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि इससे देश में वोट देने का अधिकार रखने वाले और इससे वंचित नागरिकों के दो वर्ग बन सकते हैं। उन्होंने आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं का जिक्र किया। कांग्रेस एक नवंबर को दिल्ली में विरोध रैली करेगी। क्या एसआईआर से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होंगे? कांग्रेस के आरोपों पर चुनाव आयोग का क्या रुख है? आइए, विस्तार से जानते हैं कि उन्होंने और क्या कुछ कहा...
विस्तार
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए देश में दो तरह के नागरिक बनाने की कोशिश हो रही है। एक वे, जिन्हें वोट देने का अधिकार होगा और दूसरे वे, जिनका नाम मतदाता सूची से हटने के कारण मतदान का अधिकार छिन सकता है। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए वोट हटाकर चुनाव जीतने की साजिश की जा रही है। हालांकि, ये आरोप मुख्यमंत्री ने लगाए हैं।
हैदराबाद में शुक्रवार को कांग्रेस के विधायकों और अन्य नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए रेवंत रेड्डी ने एसआईआर के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया की मुहिम का समर्थन किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। रेवंत रेड्डी ने इस विवाद की तुलना आजादी की लड़ाई के दौरान साइमन कमीशन के विरोध से की। उस समय ‘साइमन वापस जाओ’ का नारा दिया गया था। उन्होंने इसी तर्ज पर ‘ज्ञानेश वापस जाओ’ का नारा दिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने की अपील की।
रेवंत रेड्डी ने देश में दो तरह के नागरिक बनने की बात क्यों कही?
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए गरीबों और कमजोर वर्गों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमीर लोग होंगे, जिनके पास वोट देने का अधिकार रहेगा, जबकि दूसरी तरफ सबसे गरीब तबके के लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का खतरा होगा। उन्होंने आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं का नाम लेते हुए कहा कि ये वर्ग उनकी नजर में इस विवाद के केंद्र में हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर इन वर्गों के वोट हटा दिए जाते हैं, तो उनके पास अपनी राजनीतिक पसंद जाहिर करने का अधिकार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को चुनाव जीतने की कथित साजिश बताया। ये सभी बातें रेवंत रेड्डी के आरोप हैं।
एसआईआर की तुलना साइमन कमीशन के विरोध से क्यों की गई?
रेवंत रेड्डी ने एसआईआर के खिलाफ इंडिया गठबंधन के आंदोलन की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साइमन कमीशन के विरोध से की। उन्होंने कहा कि उस समय साइमन कमीशन के खिलाफ ‘साइमन वापस जाओ’ का नारा लगाया गया था और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘ज्ञानेश वापस जाओ’ का नारा दिया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि मतदाता सूची से नाम हटने का मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, दिए गए बयान में नाम हटाए जाने के आरोपों के समर्थन में कोई संख्या या विस्तृत आंकड़ा नहीं बताया गया।
दिल्ली की रैली के लिए कांग्रेस ने क्या तैयारी की है?
रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली पार्टी की विरोध रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य से कम से कम 10 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस रैली में पहुंचना चाहिए। यह प्रदर्शन एसआईआर विवाद सहित अन्य मुद्दों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं से इस कार्यक्रम को गंभीरता से लेने और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। रैली के जरिए कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करेगी।
एसआईआर विवाद में कांग्रेस की मुख्य चिंता क्या है?
रेवंत रेड्डी के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को मताधिकार और कमजोर वर्गों की राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर उठा रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए किया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए विरोध तेज करने की अपील की। दूसरी ओर, दिए गए इनपुट में प्रधानमंत्री, चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में नाम हटाने की प्रक्रिया, उसके आधार और उससे प्रभावित मतदाताओं की संख्या को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक जानकारी को देखना जरूरी होगा।