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रिपोर्ट में दावा: यूक्रेन से ड्रोन तकनीक पाने की कोशिश में जुटा पाकिस्तान, भारत को क्यों सतर्क रहने की जरूरत?
Wed, 19 Aug 2026 08:02 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 19 Aug 2026 08:02 PM IST
सार
पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच संभावित ड्रोन सहयोग को लेकर भारत के लिए चिंता केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं होनी चाहिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के अनुभव से विकसित यूक्रेनी तकनीक अगर पाकिस्तान के रक्षा उद्योग तक पहुंचती है तो उसका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है।
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ड्रोन युद्ध के अगले चरण की आहट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत की मुख्य चिंता पाकिस्तान को यूक्रेन की प्रमुख ड्रोन और मिसाइल निर्माता कंपनी 'फायर पॉइंट' द्वारा विकसित ड्रोन की आपूर्ति को लेकर जरूरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन के पाकिस्तान को इनकी आपूर्ति करने की संभावना कम है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नई दिल्ली को किसी खास हथियार की खरीद से ज्यादा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि दोनों देशों के बीच तकनीक के हस्तांतरण की कोई व्यवस्था विकसित हो रही है या नहीं।
'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान पहले ही मानव रहित हवाई प्रणालियों के तेजी से विस्तार और स्थानीय उत्पादन को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' घोषित कर चुका है। इस्लामाबाद का लक्ष्य ऐसे रक्षा उद्योग से तकनीकी जानकारी हासिल करना है, जिसे युद्ध ने लंबी दूरी के हमले, नेविगेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मजबूती और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसे क्षेत्रों में तेजी से नवाचार करने के लिए मजबूर किया है। इसके लिए वह निजी वाणिज्यिक कंपनियों के साथ काम कर रहा है।"
पाकिस्तान बढ़ा रहा सैन्य ड्रोन बेड़ा
रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को पहले ही बढ़ावा दिया है। घरेलू कंपनियों ने स्वदेशी यूएवी पर अपना काम बढ़ाया है, जिसमें स्थानीय स्तर पर विकसित इंजन और प्रोपल्शन प्रणालियों का परीक्षण भी शामिल है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में युद्ध से मिले अनुभवों को देखते हुए पाकिस्तान ने अपने सैन्य ड्रोन बेड़े का भी विस्तार किया है। ऐसे में आयात किए जाने वाले ड्रोन की संख्या से ज्यादा प्रशिक्षण, उत्पादन में सहायता, कलपुर्जे, सॉफ्टवेयर, निर्माण तकनीक और संचालन का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत के सामने क्या चुनौती?
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की प्रमुख ड्रोन और मिसाइल निर्माता कंपनी फायर पॉइंट द्वारा पाकिस्तान को अपनी तकनीक और युद्ध के अनुभव की पेशकश किए जाने की संभावना से भारत का रणनीतिक बढ़त का पारंपरिक लाभ दबाव में आ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि किसी संभावित ड्रोन समझौते से भारत की सुरक्षा चुनौतियों में एक नया पहलू जुड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की दिलचस्पी अब केवल पाकिस्तान द्वारा फायर पॉइंट के संभावित ड्रोन हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसे यह भी देखना चाहिए कि क्या यह सहयोग स्थानीय उत्पादन, प्रशिक्षण या तकनीक हस्तांतरण तक बढ़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के युद्धक्षेत्र के अनुभव से आंशिक रूप से विकसित पाकिस्तान की उत्पादन क्षमता को नियंत्रित करना कहीं अधिक मुश्किल होगा।
भारतीय सेना को कैसे बढ़ानी होगी ताकत?
रिपोर्ट में कहा गया, "भारतीय रक्षा क्षेत्र को भी बहुस्तरीय ड्रोन रोधी और वायु रक्षा क्षमताओं के विकास में तेजी लाने के साथ-साथ लंबी दूरी की मानवरहित प्रणालियों की अपनी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, निष्क्रिय पहचान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लक्ष्य पहचान, निर्देशित ऊर्जा प्रणालियां और कम लागत वाले इंटरसेप्टर तेजी से महत्वपूर्ण होंगे।"
रिपोर्ट ने जोर देकर कहा, "मुख्य सबक स्पष्ट है: भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा का अगला चरण दोनों देशों के पास मौजूद लड़ाकू विमानों की संख्या से कम और बड़ी संख्या में अधिक सक्षम स्वायत्त तथा अर्ध-स्वायत्त हथियारों का उत्पादन, तैनाती और उनसे बचाव करने की क्षमता से अधिक प्रभावित हो सकता है।"
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'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान पहले ही मानव रहित हवाई प्रणालियों के तेजी से विस्तार और स्थानीय उत्पादन को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' घोषित कर चुका है। इस्लामाबाद का लक्ष्य ऐसे रक्षा उद्योग से तकनीकी जानकारी हासिल करना है, जिसे युद्ध ने लंबी दूरी के हमले, नेविगेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मजबूती और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसे क्षेत्रों में तेजी से नवाचार करने के लिए मजबूर किया है। इसके लिए वह निजी वाणिज्यिक कंपनियों के साथ काम कर रहा है।"
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पाकिस्तान बढ़ा रहा सैन्य ड्रोन बेड़ा
रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को पहले ही बढ़ावा दिया है। घरेलू कंपनियों ने स्वदेशी यूएवी पर अपना काम बढ़ाया है, जिसमें स्थानीय स्तर पर विकसित इंजन और प्रोपल्शन प्रणालियों का परीक्षण भी शामिल है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में युद्ध से मिले अनुभवों को देखते हुए पाकिस्तान ने अपने सैन्य ड्रोन बेड़े का भी विस्तार किया है। ऐसे में आयात किए जाने वाले ड्रोन की संख्या से ज्यादा प्रशिक्षण, उत्पादन में सहायता, कलपुर्जे, सॉफ्टवेयर, निर्माण तकनीक और संचालन का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत के सामने क्या चुनौती?
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की प्रमुख ड्रोन और मिसाइल निर्माता कंपनी फायर पॉइंट द्वारा पाकिस्तान को अपनी तकनीक और युद्ध के अनुभव की पेशकश किए जाने की संभावना से भारत का रणनीतिक बढ़त का पारंपरिक लाभ दबाव में आ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि किसी संभावित ड्रोन समझौते से भारत की सुरक्षा चुनौतियों में एक नया पहलू जुड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की दिलचस्पी अब केवल पाकिस्तान द्वारा फायर पॉइंट के संभावित ड्रोन हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसे यह भी देखना चाहिए कि क्या यह सहयोग स्थानीय उत्पादन, प्रशिक्षण या तकनीक हस्तांतरण तक बढ़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के युद्धक्षेत्र के अनुभव से आंशिक रूप से विकसित पाकिस्तान की उत्पादन क्षमता को नियंत्रित करना कहीं अधिक मुश्किल होगा।
भारतीय सेना को कैसे बढ़ानी होगी ताकत?
रिपोर्ट में कहा गया, "भारतीय रक्षा क्षेत्र को भी बहुस्तरीय ड्रोन रोधी और वायु रक्षा क्षमताओं के विकास में तेजी लाने के साथ-साथ लंबी दूरी की मानवरहित प्रणालियों की अपनी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, निष्क्रिय पहचान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लक्ष्य पहचान, निर्देशित ऊर्जा प्रणालियां और कम लागत वाले इंटरसेप्टर तेजी से महत्वपूर्ण होंगे।"
रिपोर्ट ने जोर देकर कहा, "मुख्य सबक स्पष्ट है: भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा का अगला चरण दोनों देशों के पास मौजूद लड़ाकू विमानों की संख्या से कम और बड़ी संख्या में अधिक सक्षम स्वायत्त तथा अर्ध-स्वायत्त हथियारों का उत्पादन, तैनाती और उनसे बचाव करने की क्षमता से अधिक प्रभावित हो सकता है।"