{"_id":"6a85d07ad6f0353681011ad4","slug":"amravati-ashram-school-students-new-hostel-supernatural-belief-counselling-2026-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्मा के डर से घर लौटीं अमरावती के आश्रम स्कूल की 600 छात्राएं: अब मिलेगा नया हॉस्टल, जानें भूतिया कहानी का सच","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आत्मा के डर से घर लौटीं अमरावती के आश्रम स्कूल की 600 छात्राएं: अब मिलेगा नया हॉस्टल, जानें भूतिया कहानी का सच
Wed, 19 Aug 2026 09:19 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, अमरावती
पीटीआई, अमरावती
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 19 Aug 2026 09:19 PM IST
सार
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित एक सरकारी आवासीय स्कूल की करीब 600 छात्राएं कुछ सहपाठियों के असामान्य व्यवहार के बाद डर के कारण घर चली गई थीं। प्रशासन ने अब छात्राओं को बेहतर व्यवस्था देने के लिए परिसर में तैयार नए छात्रावास में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू होगी। मामले की मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में डर, तनाव और स्थानीय अंधविश्वासों को घटनाक्रम से जुड़ा बताया गया है।
विज्ञापन
600 छात्राओं के घर लौटने के बाद जागा प्रशासन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक सरकारी आवासीय स्कूल की छात्राओं को जल्द ही परिसर में बने नए छात्रावास में स्थानांतरित किया जाएगा। इस स्कूल की करीब 600 छात्राएं कुछ छात्राओं पर "आत्मा का साया" होने का दावा करते हुए घर चली गई थीं। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, चिखलदरा तहसील के डोमा स्थित इस आश्रम स्कूल में छात्राओं का मौजूदा छात्रावास लंबे समय से क्षमता से अधिक भरा हुआ था। अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त संदीप गोलैत ने बताया कि स्कूल परिसर में छात्राओं के लिए अलग नया छात्रावास बनाया गया है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को एक सितंबर से नए छात्रावास में भेजा जाएगा।
नए छात्रावास में होगी क्या सुविधाएं?
अधिकारी के मुताबिक, नए छात्रावास में सभी छात्राओं को रखने के लिए बंक बेड की व्यवस्था की गई है। इससे पहले अधिकारियों के सामने उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई थी, जब करीब 600 आदिवासी छात्राएं यह दावा करते हुए घर चली गईं कि स्कूल की कुछ छात्राओं पर "आत्मा का साया" है। अधिकारियों ने इस स्थिति को मानसिक तनाव से जोड़ा था।
विज्ञापन
यह मामला 22 जुलाई को शुरू हुआ था। उस दिन चार छात्राएं अजीब व्यवहार करने लगीं। वे लगातार रो और हंस रही थीं। अधिकारियों को आशंका थी कि इसका संबंध मानसिक तनाव से हो सकता है। उत्तरी महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में स्थित यह आवासीय स्कूल मुंबई से 700 किलोमीटर से अधिक दूर है। अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल में 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं।
भूत-प्रेत की बातें हॉस्टल में कहां से आईं?
अधिकारियों की ओर से तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद इसे लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगीं। बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी इसी तरह के मानसिक लक्षण दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि आश्रम स्कूल की जगह पर एक 'महुआ' का पेड़ था, जिस पर आत्माओं का वास था। स्कूल प्रबंधन ने पेड़ काट दिया और माना गया कि इससे आत्माएं नाराज हो गईं और छात्रों को परेशान करने लगीं।
एक अन्य वजह यह बताई गई कि आश्रम स्कूल के पीछे स्थित उनके देवी-देवता के मंदिर पर स्कूल की जल निकासी व्यवस्था का असर पड़ा या उसका अतिक्रमण हुआ, जिससे देवी-देवता नाराज हो गए। रिपोर्ट में तीसरी वजह के तौर पर बताया गया कि स्कूल के पास एक खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हो गई थी और उसकी आत्मा भूत बन गई।
छात्राओं की क्यों करनी पड़ी काउंसलिंग?
रिपोर्ट में इस असामान्य स्थिति को अंधविश्वास, डर, तनाव और आत्माओं से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं से जोड़ा गया है। अंधविश्वास उन्मूलन के लिए काम करने वाली महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी छात्राओं से मुलाकात की और उन्हें समझाया था।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, चिखलदरा तहसील के डोमा स्थित इस आश्रम स्कूल में छात्राओं का मौजूदा छात्रावास लंबे समय से क्षमता से अधिक भरा हुआ था। अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त संदीप गोलैत ने बताया कि स्कूल परिसर में छात्राओं के लिए अलग नया छात्रावास बनाया गया है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को एक सितंबर से नए छात्रावास में भेजा जाएगा।
विज्ञापन
नए छात्रावास में होगी क्या सुविधाएं?
अधिकारी के मुताबिक, नए छात्रावास में सभी छात्राओं को रखने के लिए बंक बेड की व्यवस्था की गई है। इससे पहले अधिकारियों के सामने उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई थी, जब करीब 600 आदिवासी छात्राएं यह दावा करते हुए घर चली गईं कि स्कूल की कुछ छात्राओं पर "आत्मा का साया" है। अधिकारियों ने इस स्थिति को मानसिक तनाव से जोड़ा था।
विज्ञापन
यह मामला 22 जुलाई को शुरू हुआ था। उस दिन चार छात्राएं अजीब व्यवहार करने लगीं। वे लगातार रो और हंस रही थीं। अधिकारियों को आशंका थी कि इसका संबंध मानसिक तनाव से हो सकता है। उत्तरी महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में स्थित यह आवासीय स्कूल मुंबई से 700 किलोमीटर से अधिक दूर है। अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल में 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं।
भूत-प्रेत की बातें हॉस्टल में कहां से आईं?
अधिकारियों की ओर से तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद इसे लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगीं। बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी इसी तरह के मानसिक लक्षण दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि आश्रम स्कूल की जगह पर एक 'महुआ' का पेड़ था, जिस पर आत्माओं का वास था। स्कूल प्रबंधन ने पेड़ काट दिया और माना गया कि इससे आत्माएं नाराज हो गईं और छात्रों को परेशान करने लगीं।
एक अन्य वजह यह बताई गई कि आश्रम स्कूल के पीछे स्थित उनके देवी-देवता के मंदिर पर स्कूल की जल निकासी व्यवस्था का असर पड़ा या उसका अतिक्रमण हुआ, जिससे देवी-देवता नाराज हो गए। रिपोर्ट में तीसरी वजह के तौर पर बताया गया कि स्कूल के पास एक खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हो गई थी और उसकी आत्मा भूत बन गई।
छात्राओं की क्यों करनी पड़ी काउंसलिंग?
रिपोर्ट में इस असामान्य स्थिति को अंधविश्वास, डर, तनाव और आत्माओं से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं से जोड़ा गया है। अंधविश्वास उन्मूलन के लिए काम करने वाली महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी छात्राओं से मुलाकात की और उन्हें समझाया था।