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Tamil Nadu: तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर 365 दिन की मैटरनिटी लीव, कांग्रेस ने उठाए सवाल; क्यों गरमाई सियासत?

Wed, 19 Aug 2026 10:17 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, चेन्नई।
पीटीआई, चेन्नई। Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 19 Aug 2026 10:17 PM IST
सार

तमिलनाडु सरकार ने तीसरे बच्चे वाली महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव 12 हफ्ते से बढ़ाकर 365 दिन करने का प्रस्ताव रखा है। फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया, लेकिन तीसरे बच्चे और परिवार नियोजन को लेकर सवाल उठाए।

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Tamil Nadu Third-Child Maternity Leave Congress Questions 365-Day Benefit for Women Employees Sparks Debate
मैटरनिटी लीव बढ़ी तो तीसरे बच्चे पर क्यों उठे सवाल? - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

तमिलनाडु सरकार के तीसरे बच्चे वाली महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव बढ़ाने के प्रस्ताव ने राज्य में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सरकार ने मौजूदा 12 हफ्ते की छुट्टी को बढ़ाकर 365 दिन करने का प्रस्ताव रखा है। तमिलनाडु के मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री डी. सारथकुमार ने विधानसभा में अपने विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए इस प्रस्ताव की जानकारी दी।

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अभी क्या है मैटरनिटी लीव का नियम?

मौजूदा प्रावधानों के तहत सरकारी क्षेत्र में काम करने वाली विवाहित महिलाओं को, जिनके दो से कम बच्चे हैं, 365 दिन यानी एक साल की मैटरनिटी लीव मिलती है। वहीं, जिन महिलाओं के पहले से दो या उससे अधिक बच्चे हैं, उन्हें फिलहाल अधिकतम 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलती है। सरकार के प्रस्ताव के बाद तीसरे बच्चे के मामले में भी छुट्टी की अवधि बढ़ाकर एक साल करने को लेकर बहस शुरू हो गई है।

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कांग्रेस ने तीसरे बच्चे पर क्या सवाल उठाए?

सत्तारूढ़ TVK की सहयोगी कांग्रेस ने मैटरनिटी लीव बढ़ाने का स्वागत किया, लेकिन तीसरे बच्चे को लेकर नीति पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने एक्स पर लिखा "मैटरनिटी लीव का स्वागत है, पितृत्व अवकाश पर भी विचार किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार को परिवारों में तीसरे बच्चे को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। क्या परिवारों के पास तीसरे बच्चे की परवरिश के लिए पर्याप्त संसाधन हैं?"

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कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने क्या कहा?

कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने भी महिलाओं को ज्यादा सहायता देने वाले इस कदम का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने तीसरे बच्चे के लिए छुट्टी बढ़ाने के फैसले के असर पर विचार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा "मैटरनिटी लीव महिलाओं को ज्यादा सहयोग और समय देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान मां को होने वाली चुनौतियों को देखते हुए हम तमिलनाडु सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन सवाल तीसरे बच्चे को लेकर है। यह महत्वपूर्ण है कि क्या तमिलनाडु सरकार ने इस पहलू पर पूरी तरह विचार किया है।" टैगोर ने कहा कि दो बच्चों की नीति से तीसरे बच्चे की ओर बढ़ना बड़ा कदम है, खासकर ऐसे राज्य में जहां परिवार नियोजन को व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है।

DMK ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?

विपक्षी DMK ने भी सरकार के रुख की आलोचना की। पार्टी के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि सरकार की नीति तीसरे बच्चे को बढ़ावा देने जैसी है। उन्होंने कहा, "यह वास्तव में सरकार की नीति है, जिसमें केवल दो बच्चों की बात है। तीसरे बच्चे के लिए हमने छुट्टी कम रखी है, क्योंकि हम किसी भी घर में तीसरा बच्चा नहीं चाहते। यह आबादी को नियंत्रित करने के लिए है, बस। लेकिन यह सरकार आबादी को नियंत्रित नहीं करना चाहती।" उन्होंने TVK सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके पास नई योजनाएं नहीं हैं।

शिवसेना ने फैसले को कैसे देखा?

शिवसेना ने कहा कि सरकार के फैसले के उद्देश्य पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन यह गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को ज्यादा सहायता देने की कोशिश भी है। शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, "तमिलनाडु सरकार के फैसले के उद्देश्य और मंशा पर सवाल जरूर उठेंगे। हालांकि, वे महिलाओं के लिए ज्यादा प्रावधान देने की नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं, क्योंकि मैटरनिटी लीव जरूरी है। हम इस महिला-केंद्रित फैसले का स्वागत करते हैं।" इस फैसले के साथ तमिलनाडु में मैटरनिटी लीव, तीसरे बच्चे और परिवार नियोजन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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