CRPF: सीआरपीएफ में आत्महत्या जैसे मामलों को रोकने के लिए कमेटी गठित, 10 अफसरों का समूह हर माह करेगा समीक्षा
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में कर्मियों द्वारा खुद को नुकसान पहुंचाना (आत्महत्या) या साथियों पर फायरिंग करना, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डीजी जीपी सिंह की अध्यक्षता में एक कोर ग्रुप का गठन किया गया है। इस ग्रुप में डीजी के अलावा 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं। बल में ऐसी घटनाएं न हों, उन्हें रोकने के लिए क्या किया जाए, इस बाबत कोर ग्रुप द्वारा उपाय सुझाए जाएंगे। ऐसे केसों की गहन समीक्षा होगी। यह कोर ग्रुप हर माह सीआरपीएफ मुख्यालय में बैठक करेगा। बल मुख्यालय में कार्यरत डीआईजी (कल्याण) को ग्रुप का संयोजक बनाया गया है।
कोर ग्रुप में शामिल हैं ये अधिकारी
एसडीजी (ऑपरेशन्स)
एसडीजी (प्रशासन)
एडीजी (मुख्यालय)
आईजी (ऑपरेशन्स)
आईजी (कार्मिक)
आईजी (प्रशासन)
आईजी (चिकित्सा)
डीआईजी (ओपीएस-2)
डीआईजी (कल्याण)/संयोजक
क्या काम करेगा ये कोर ग्रुप
कोर ग्रुप हर महीने एक बार (अधिमानतः महीने के तीसरे सप्ताह में) बैठक करेगा। पिछली अवधि में सामने आई खुद को नुकसान पहुंचाने की सभी घटनाओं की विस्तृत समीक्षा करेगा। समीक्षा में कारण, घटना की परिस्थितियाँ, कल्याण/चिकित्सा/मनोवैज्ञानिक सहायता तंत्र की उपलब्धता और उपयोग, उठाए गए रोकथाम के उपाय और सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता वाले किसी भी प्रणालीगत मुद्दे शामिल होंगे। खुद को नुकसान पहुंचाने के प्रत्येक मामले के संबंध में, संबंधित बटालियन/कार्यालय के एचओओ/कमांडेंट ऑनलाइन वीसी के माध्यम से कोर ग्रुप के सामने 4/5 स्लाइड की एक व्यवस्थित प्रस्तुति देंगे।
उठाए गए विशिष्ट उपाय शामिल होंगे
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जो प्रस्तुति होगी, उसमें घटना का कारण, व्यक्ति की प्रासंगिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियां, यूनिट/कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाई, प्रदान की गई कल्याणकारी और चिकित्सा सहायता, प्रारंभिक जाँच/पड़ताल के निष्कर्ष और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए उठाए गए विशिष्ट उपाय शामिल होंगे। जिस यूनिट/कार्यालय में घटना हुई है, वहां का पर्यवेक्षी परिचालन पदानुक्रम (यानी परिचालन नियंत्रण रखने वाले संबंधित डीआईजी, आईजी, एडीजी/एसडीजी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे।
हर मामले की निष्पक्ष जांच करेगा कोर ग्रुप
कोर ग्रुप हर मामले की निष्पक्ष रूप से जांच करेगा। जहां भी जरूरी हो, बचाव, कल्याण, प्रशासन, चिकित्सा और अन्य उचित उपाय सुझाएगा। समिति समीक्षा किए गए मामलों से सामने आने वाले आम रुझानों और बार-बार होने वाले जोखिम कारकों की पहचान भी करेगी और फोर्स के स्तर पर उचित संस्थागत कदम उठाएगी। समिति का गठन और मासिक समीक्षा व्यवस्था को संस्थागत बनाने का मकसद सीआरपीएफ कर्मियों के बीच खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को कम करने के लिए लगातार निगरानी, समय पर हस्तक्षेप, जवाबदेही और बचाव के उपायों को मज़बूत करना है।
कौन रखेगा कार्रवाई का रिकॉर्ड
डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (कल्याण) ग्रुप की बैठकों के समन्वय और संचालन, मामले-वार जानकारी संकलित करने, एजेंडा/सामग्री/बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) प्रसारित करने और सिफारिशों व उन पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखने के लिए संयोजक के तौर पर काम करेंगे। समिति की सिफारिशों को उचित रूप से दर्ज किया जाएगा और संबंधित फॉर्मेशन/यूनिट/कार्यालयों द्वारा उनके पालन की निगरानी की जाएगी। बता दें कि पिछले दिनों राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस वर्ष सीआरपीएफ के 19 जवानों द्वारा की गई आत्महत्या के मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए केंद्रीय गृह सचिव और डीजी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। दोनों शीर्ष अधिकारियों को दो सप्ताह में यह रिपोर्ट देने के लिए कहा गया।
पांच वर्षों में कुल 281 जवानों ने की आत्महत्या
पिछले पांच वर्षों में कुल 281 सीआरपीएफ जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें से लगभग 216 जवान ड्यूटी पर थे। सीआरपीएफ ने 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 आत्महत्याओं के मामले दर्ज किए हैं। सीआरपीएफ, देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल हैं। लगभग 3.25 लाख कर्मियों वाले इस बल को अहम मोर्चों पर तैनात किया जाता है। आतंकवाद या नक्सल से प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ की बड़े पैमाने पर तैनाती रही है। उत्तर पूर्व के उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में भी सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा' को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।