लोकमान्य तिलक पुरस्कार पर सियासत क्यों?: संजय राउत पर बरसे परपोते रोहित, बोले- सम्मान को राजनीति से दूर रखें
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के परपोते रोहित तिलक ने संजय राउत की आलोचना पर कहा कि लोकमान्य तिलक पुरस्कार राजनीति से ऊपर है। उन्होंने अजीत डोभाल के योगदान को सम्मान का आधार बताया।
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लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के परपोते और तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष रोहित तिलक ने कहा कि लोकमान्य तिलक पुरस्कार को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने यह प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की उस आलोचना पर दी, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को यह सम्मान दिए जाने पर सवाल उठाए थे।
संजय राउत ने क्या कहा था?
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ 'पुणेकरों' को अमित शाह को आमंत्रित करने पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन चलाने का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री ने दिया था। राउत ने कहा कि इस व्यक्ति के हाथ खून से रंगे हैं और उन्हीं के हाथों बाल गंगाधर तिलक के नाम का पुरस्कार दिया जा रहा है।
रोहित तिलक ने क्या जवाब दिया?
राउत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित तिलक ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लोकमान्य तिलक पुरस्कार राजनीति से ऊपर है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में अजीत डोभाल के योगदान से सभी परिचित हैं।
अमित शाह के हाथों सम्मान दिए जाने पर क्या बोले?
रोहित तिलक ने कहा कि अमित शाह के हाथों अजीत डोभाल को सम्मानित किया जाना एक अच्छा संयोग है, क्योंकि वह देश के गृह मंत्री हैं। उनके अनुसार, इस सम्मान को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।