{"_id":"6963701a738843702504986d","slug":"rss-chief-mohan-bhagwat-address-event-organised-at-sangh-delhi-office-2026-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: 'संघ धीरे-धीरे विकसित हो रहा, नए रूप ले रहा है', दिल्ली में आरएसएस के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: 'संघ धीरे-धीरे विकसित हो रहा, नए रूप ले रहा है', दिल्ली में आरएसएस के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Sun, 11 Jan 2026 03:10 PM IST
विज्ञापन
सार
RSS Chief Mohan Bhagwat: दिल्ली स्थित संघ के कार्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक संघ बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो रहा है।
मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (11 जनवरी) को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो रहा है और बस सामने आ रहा है। मोहन भागवत दिल्ली स्थित संगठन के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जहां आने वाली फिल्म 'शतक' के गाने के एल्बम को लॉन्च किया गया। यह फिल्म आरएसएस के 100 साल के सफर की कहानी बताती है।
संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है: संघ प्रमुख
आरएसएस प्रमुख भागवत ने अपने संबोधन में कहा, 'संगठन (RSS) अपनी शताब्दी मना रहा है। लेकिन जैसे-जैसे संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है, लोग इसे बदलते हुए देखते हैं। हालांकि यह असल में बदल नहीं रहा है बस धीरे-धीरे सामने आ रहा है।' बता दें कि इस मौके पर सिंगर सुखविंदर सिंह, डायरेक्टर आशीष मल्ल, को-प्रोड्यूसर आशीष तिवारी और आरएसएस पदाधिकारी भैयाजी जोशी मौजूद रहे।
संघ को लेकर दिया ये उदाहरण
उन्होंने आगे कहा, 'जैसे एक बीज से अंकुर निकलता है और फलों और फूलों से लदा हुआ परिपक्व पेड़ का एक अलग रूप होता है, ये दोनों रूप अलग-अलग हैं। फिर भी पेड़ मूल रूप से उसी बीज जैसा है, जिससे वह उगा है।" भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक 'जन्मजात देशभक्त' थे और उन्होंने बचपन में ही अपना जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
ये भी पढ़ें: MP News: मोहन भागवत बोले-मत-पंथ,भाषा,जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हमें जोड़ती है
'संघ और डॉक्टर साहब पर्यायवाची शब्द'
उन्होंने कहा, 'संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) पर्यायवाची शब्द हैं। वो जब सिर्फ 11 साल के थे, जब उनके माता-पिता का प्लेग से निधन हो गया था, लेकिन उन्हें उस उम्र में या बाद में भी, बात करने या भरोसा करने वाला कोई नहीं मिला। मोहन भागवत ने कहा कि जब इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सदमा लगता है, तो इंसान अकेला हो जाता है और उसके स्वभाव और व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हेडगेवार के साथ ऐसा नहीं हुआ।'
ये भी पढ़ें: UP: 'हिंदू समाज दूसरे की वीरता से नहीं, आपसी फूट से हारा', संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले- भेदभाव मुक्त हो भारत
उन्होंने आगे कहा, 'उनके व्यक्तित्व में बड़े से बड़े झटकों को भी सहने की क्षमता थी, बिना अपने विश्वास या स्वभाव को थोड़ा भी डगमगाने दिए – यह बेहतरीन मानसिक स्वास्थ्य, एक मजबूत और स्वस्थ दिमाग की निशानी है, जो उनमें शुरू से ही था।' उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि डॉक्टर साहब की साइकोलॉजी भी अध्ययन और रिसर्च का विषय हो सकती है।
अन्य वीडियो
Trending Videos
संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है: संघ प्रमुख
आरएसएस प्रमुख भागवत ने अपने संबोधन में कहा, 'संगठन (RSS) अपनी शताब्दी मना रहा है। लेकिन जैसे-जैसे संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है, लोग इसे बदलते हुए देखते हैं। हालांकि यह असल में बदल नहीं रहा है बस धीरे-धीरे सामने आ रहा है।' बता दें कि इस मौके पर सिंगर सुखविंदर सिंह, डायरेक्टर आशीष मल्ल, को-प्रोड्यूसर आशीष तिवारी और आरएसएस पदाधिकारी भैयाजी जोशी मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संघ को लेकर दिया ये उदाहरण
उन्होंने आगे कहा, 'जैसे एक बीज से अंकुर निकलता है और फलों और फूलों से लदा हुआ परिपक्व पेड़ का एक अलग रूप होता है, ये दोनों रूप अलग-अलग हैं। फिर भी पेड़ मूल रूप से उसी बीज जैसा है, जिससे वह उगा है।" भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक 'जन्मजात देशभक्त' थे और उन्होंने बचपन में ही अपना जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
ये भी पढ़ें: MP News: मोहन भागवत बोले-मत-पंथ,भाषा,जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हमें जोड़ती है
'संघ और डॉक्टर साहब पर्यायवाची शब्द'
उन्होंने कहा, 'संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) पर्यायवाची शब्द हैं। वो जब सिर्फ 11 साल के थे, जब उनके माता-पिता का प्लेग से निधन हो गया था, लेकिन उन्हें उस उम्र में या बाद में भी, बात करने या भरोसा करने वाला कोई नहीं मिला। मोहन भागवत ने कहा कि जब इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सदमा लगता है, तो इंसान अकेला हो जाता है और उसके स्वभाव और व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हेडगेवार के साथ ऐसा नहीं हुआ।'
ये भी पढ़ें: UP: 'हिंदू समाज दूसरे की वीरता से नहीं, आपसी फूट से हारा', संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले- भेदभाव मुक्त हो भारत
उन्होंने आगे कहा, 'उनके व्यक्तित्व में बड़े से बड़े झटकों को भी सहने की क्षमता थी, बिना अपने विश्वास या स्वभाव को थोड़ा भी डगमगाने दिए – यह बेहतरीन मानसिक स्वास्थ्य, एक मजबूत और स्वस्थ दिमाग की निशानी है, जो उनमें शुरू से ही था।' उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि डॉक्टर साहब की साइकोलॉजी भी अध्ययन और रिसर्च का विषय हो सकती है।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन