Mohan Bhagwat: 'अवैध बांग्लादेशियों को निकालना सरकार की जिम्मेदारी', हैदराबाद में बोले आरएसएस प्रमुख भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान व निर्वासन सरकार की जिम्मेदारी है, आम नागरिक केवल सूचना दे सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले लेने चाहिए और इसके लिए देश का आर्थिक-सामाजिक रूप से मजबूत होना जरूरी है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान करना और उन्हें निर्वासित करना सरकार की जिम्मेदारी है। आम नागरिक तो इस मामले को अधिकारियों के संज्ञान में ही ला सकते हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देश अपने हितों से प्रेरित होते हैं, और भारत को भी बिना किसी समझौते के अपना मार्ग स्वयं तय करना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए देश का आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है। आरएसएस द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, भगवत ने रविवार को 'संघ की 100 साल की यात्रा - नए क्षितिज' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बातें कही, जिसमें चुनिंदा आमंत्रित लोग उपस्थित थे। इस दौरान उन्होंने शहर की अपनी यात्रा के दौरान संघ की शताब्दी के अवसर पर फिल्म जगत की हस्तियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी मुलाकात की।
वैश्विवक उथल-पुथल पर क्या बोले भागवत
वैश्विक उथल-पुथल पर उन्होंने कहा कि भारत पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि हमारे यहां पारिवारिक व्यवस्था और सोने की बचत जैसे पहलुओं के साथ-साथ देश की आर्थिक गतिविधियां परिवार-उन्मुख हैं।भागवत ने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए संघ का हिस्सा बनकर अनुभव प्राप्त करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई आरएसएस को सतही तौर पर समझता है, तो उसे गलत भी समझा जा सकता है। संघ इस बात पर जोर देता है कि राष्ट्र के विकास में नागरिकों की अहम भूमिका है, जबकि सरकारें, पार्टियां और नेता अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का सिद्धांत उत्कृष्ट राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से व्यक्तिगत विकास है।
पंच परिवर्तन की व्याख्या की
उन्होंने देश के समग्र विकास के लिए आरएसएस के पंच परिवर्तन सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पंच परिवर्तन के पांच घटकों यानी पारिवारिक जागृति (भजन और अन्य), पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों की व्याख्या भी की।
