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Rahul-Naravane Memoir Row: संसद में बयानों पर कितने नियम या प्रतिबंध, क्या कहते हैं संसदीय मामलों के विशेषज्ञ?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 03 Feb 2026 01:35 PM IST
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सार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद में पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करने पर विवाद हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। जाने संसदीय मामलों के विशेषज्ञ का इस पर क्या कहना है? 

Rahul-Naravane Memoir Row How many rules or restrictions are there on statements in Parliament
लोकसभा में राहुल गांधी। - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब-संसद टीवी
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विस्तार
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र किया। इसको लेकर उठे विवाद के बीच संसदीय प्रक्रियाओं के एक विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि नियम 349 सदन के कार्य से संबंधित मामलों को छोड़कर किसी भी पुस्तक, समाचार पत्र या पत्र को पढ़ने से सदस्यों को रोकता है। हालांकि, नियम में प्रकाशित या अप्रकाशित के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया है।
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नियम 349 का हवाला देकर रोका
सोमवार को लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला और गांधी के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया, जब अध्यक्ष ने सदन के नियम का हवाला देते हुए विपक्ष के नेता को पूर्व सेना प्रमुख के 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर लिखे अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र करने से रोक दिया। उन्होंने नियम 349 का हवाला दिया। सदन में सदस्यों द्वारा पालन किए जाने वाले नियम 349 के अंतर्गत आते हैं। इस नियम में विभिन्न मुद्दों से संबंधित 23 उपखंड हैं।

कोई पुस्तक, समाचार पत्र या पत्र नहीं पढ़ने का नियम
उपखंड एक सदस्यों द्वारा दस्तावेजों से उद्धरण देने से संबंधित है। इसमें लिखा है "जब सदन की बैठक चल रही हो, तो कोई सदस्य (i) सदन के कामकाज के अलावा कोई पुस्तक, समाचार पत्र या पत्र नहीं पढ़ेगा।" लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने पीटीआई को बताया, "इसका अर्थ यह भी है कि सदन की कार्यवाही से संबंधित होने पर कोई भी सदस्य इनमें से किसी का भी उल्लेख कर सकता है।" उन्होंने कहा कि हालांकि यह नियम नकारात्मक रूप से तैयार किया गया है, लेकिन इसका सकारात्मक अर्थ भी है, जो सदस्यों को सदन की कार्यवाही से संबंधित दस्तावेजों से उद्धरण देने की अनुमति देता है।
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सदन को केवल सच ही बताने का नियम
उन्होंने कहा कि सोमवार को सदन के समक्ष राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव था, जिसमें संभवत विदेश नीति या संबंधों का जिक्र किया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि यह नियम में नहीं है, लेकिन सदन के अध्यक्षों ने अतीत में यह फैसला सुनाया है कि सदन में कुछ उद्धृत करने के इच्छुक सदस्यों को इसे प्रमाणित करना चाहिए। संविधान विशेषज्ञ ने कहा, "उन्हें यह उल्लेख करना होगा कि वे अपने कथन पर कायम हैं और उद्धृत किए जा रहे दस्तावेज की सामग्री को भी सत्यापित करना होगा।" आचार्य के अनुसार, दस्तावेज के प्रमाणित हो जाने के बाद, वक्ता सदस्य को उसका उद्धरण देने की अनुमति देता है। इसके बाद सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह जवाब दे और वक्ता की भूमिका समाप्त हो जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि सदन को केवल सच ही बताया जाना चाहिए और गलत या फर्जी दस्तावेज से उद्धरण देने वाले सदस्य को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है।"


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