{"_id":"6981c704d47ad43a1e09f814","slug":"kerala-high-court-wife-who-deserted-husband-not-entitled-to-past-maintenance-2026-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kerala High Court: पति को छोड़कर अलग रहने वाली पत्नी को पिछला भरण-पोषण नहीं मिलेगा; केरल हाईकोर्ट का अहम फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kerala High Court: पति को छोड़कर अलग रहने वाली पत्नी को पिछला भरण-पोषण नहीं मिलेगा; केरल हाईकोर्ट का अहम फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 03 Feb 2026 03:29 PM IST
विज्ञापन
सार
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी बिना उचित कारण पति को छोड़ देती है, तो वह अलग रहने की अवधि के लिए पिछला भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं होगी। अदालत ने तलाक अधिनियम, 1869 के तहत ‘परित्याग’ की व्याख्या भी की।
केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण पारिवारिक कानून से जुड़े फैसले में कहा है कि जो पत्नी बिना किसी उचित कारण के अपने पति को छोड़कर अलग रहती है, वह उस अवधि के लिए पिछला भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सतीश निनन और न्यायमूर्ति पी कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने की।
Trending Videos
अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति को पत्नी को पिछला भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था, जबकि उसी अदालत ने पत्नी द्वारा पति को छोड़े जाने के आधार पर तलाक भी मंजूर किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब यह साबित हो जाए कि पत्नी ने बिना किसी वैध या उचित कारण के पति का परित्याग किया है, तो वह उससे भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने अपने फैसले में कहा जब यह निष्कर्ष निकल चुका है कि पत्नी ने पति को छोड़ा है, तो ट्रायल कोर्ट को उसे पिछला भरण-पोषण देने का आदेश नहीं देना चाहिए था।
तलाक अधिनियम पर कोर्ट की व्याख्या
पत्नी की ओर से यह दलील दी गई थी कि तलाक अधिनियम, 1869 में ‘परित्याग’ की परिभाषा में बिना कारण शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने उद्देश्यपूर्ण व्याख्या अपनाते हुए कहा कि ‘परित्याग का अर्थ केवल अलग रहना नहीं है, बल्कि बिना उचित कारण के विवाह को त्यागना ही परित्याग माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि उचित कारण से अलग रहने वाले जीवनसाथी को भी दोषी माना जाए, तो यह संवैधानिक समानता (अनुच्छेद 14) और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के खिलाफ होगा।
ये भी पढ़ें:- Kerala: 'सदन में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ', विपक्ष के हंगामे पर बरसे सीएम विजयन, घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
फैमिली कोर्ट बनाम हाईकोर्ट
फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच चले विवाद में पति को तलाक देने की अनुमति दी थी और साथ ही पति को पत्नी के 28 सोने के सिक्के या उनकी बाजार कीमत लौटाने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, अदालत ने पत्नी को ₹25,500 और नाबालिग बच्चे को ₹8,000 की राशि पिछली अवधि के भरण-पोषण के रूप में देने का भी आदेश पारित किया था।
वहीं, इस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने सोने के गहनों को लौटाने संबंधी फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन पत्नी को पिछला भरण-पोषण देने के निर्देश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि चूंकि पत्नी ने बिना उचित कारण पति का परित्याग किया था, इसलिए वह अलग रहने की अवधि के लिए भरण-पोषण की हकदार नहीं है।
पूरा मामला क्या था?
मामले के तथ्यों के अनुसार, दंपति की शादी जून 2003 में ईसाई रीति-रिवाजों के तहत हुई थी। शादी के कुछ समय बाद पत्नी गर्भवती होने पर अपने मायके चली गई, जहां उसने बच्चे को जन्म दिया। दिसंबर 2005 में बच्चे के जन्म के बाद भी पति-पत्नी साथ नहीं रह पाए और दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसके बाद पति ने पारिवारिक न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की, जबकि पत्नी ने सोने के गहनों, विवाह के समय दिए गए पैसों की वापसी और अपने व बच्चे के भरण-पोषण की मांग को लेकर अलग याचिका दाखिल की।
अन्य वीडियो:-
Kerala High Court judgment, wife desertion maintenance, past maintenance denied, Divorce Act 1869, family court judgment, desertion meaning law, पति पत्नी भरण पोषण मामला, केरल हाईकोर्ट फैसला
🔹 Powerful Focus Keyword
Wife desertion maintenance Kerala High Court
🔹 Secondary Keywords
English:
Past maintenance denied
Desertion under Divorce Act
Kerala High Court family law
Christian marriage divorce law
Hindi:
पत्नी द्वारा परित्याग
भरण-पोषण का अधिकार
तलाक कानून 1869
पारिवारिक न्यायालय फैसला
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
