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RSS: मुस्लिमों-ईसाइयों के परिवारों को साधने में जुटा आरएसएस, केरल चुनाव पर कितना पड़ेगा असर

Amit Sharma Amit Sharma
Updated Fri, 13 Mar 2026 06:48 PM IST
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सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) केरल में मुस्लिम और ईसाई परिवारों से भी संपर्क साध रहा है। उसकी कोशिश है कि केरल के इन दोनों प्रमुख समुदायों के बीच संघ को लेकर लोगों की समझ और उसकी स्वीकार्यता बढ़े।

RSS is trying to woo Muslim and Christian families, how much will it affect the Kerala elections?
RSS - फोटो : प्रो जसीम मोहम्मद
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विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) केरल में मुस्लिम और ईसाई परिवारों से भी संपर्क साध रहा है। उसकी कोशिश है कि केरल के इन दोनों प्रमुख समुदायों के बीच संघ को लेकर लोगों की समझ और उसकी स्वीकार्यता बढ़े। संघ का दावा है कि इस शताब्दी वर्ष में ही वह राज्य के 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम घरों में और 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों से संपर्क स्थापित कर चुका है। इन परिवारों के बीच संघ के कार्यकर्ताओं का स्वागत हुआ और लोगों ने संघ के बारे में सुनने और उसको समझने को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। 
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  • मुस्लिम और ईसाई परिवारों से संपर्क करने की संघ की यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में अगले दो-तीन महीने के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संघ के इस संपर्क अभियान के चुनावी अर्थ भी निकाले जा रहे हैं। लेकिन संघ स्वयंसेवकों का कहना है कि यह उनके शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम का हिस्सा है जिसमें वे पूरे देश में सभी वर्ग के लोगों से संपर्क कर रहे हैं। 
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  • समालखा में 13 मार्च से शुरू हुई आरएसएस की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने दावा किया कि संघ शताब्दी वर्ष में अब तक देश के तीन लाख 90 हजार गांवों में 10 करोड़ घरों से संपर्क कर चुका है। अभी यह कार्यक्रम जारी है और इस वर्ष के दशहरा पर्व तक चलेगा।     
  • संघ अपने शताब्दी वर्ष में हिंदू सम्मेलन भी आयोजित कर रहा है। सीआर मुकुंद के अनुसार, अब तक 36 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। ये कार्यक्रम अब भी जारी हैं। इन कार्यक्रमों में भी संघ परिवार हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित कर लोगों को अपने से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। इन कार्यक्रमों से भी उसे केरल में लोगों को अपने साथ जोड़ने में सहायता मिली है।

केरल में मजबूत हुई भाजपा 
केरल में वामपंथी दल और कांग्रेस ही मुख्य राजनीतिक खिलाड़ी रहे हैं। लेकिन हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों में भाजपा के 115 पार्षदों ने जीत हासिल की। इस जीत से उत्साहित भाजपा ने केरल के सभी पार्षदों को दिल्ली बुलाया और यहां उनका स्वागत किया। संघ परिवार और भाजपा इसे लोगों के बीच चल रहे एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के रूप में देख रही है। उसे लगता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए केरल में संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।    

सुरेश गोपी का दांव भी सटीक होता दिख रहा
मलयालम फिल्मों के सुपर स्टार सुरेश गोपी को अपने से जोड़कर भाजपा ने जो दांव चला था, वह भी काफी कारगर होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने भाजपा के लिए न केवल त्रिशूर लोकसभा सीट जीती, बल्कि अपने साथ भारी संख्या में अपने प्रशंसकों को भी भाजपा से जोड़ दिया। पार्टी को इसका भी चुनावी लाभ मिलता दिख रहा है। एक मंत्री के रूप में भी सुरेश गोपी लगातार केरल के लिए विशेष ट्रेन और अन्य सेवाएं शुरु करा रहे हैं। भाजपा को अनुमान है कि उसे इसका भी लाभ मिलेगा।   

लव जिहाद जैसी घटनाओं से ईसाई परिवार भी चिंतित- भाजपा
ईसाई समुदाय से आने वाले भाजपा नेता टॉम वडक्कन ने अमर उजाला से कहा कि केरल में उनकी पार्टी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। इसका बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय और राज्य के अंदर चल रही सामाजिक-राजनीतिक घटनाएं हैं। उन्होंने कहा कि केरल की बड़ी आबादी विदेशों में काम करती है। लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की साख बढ़ी है, इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। 

केवल मध्य पूर्व के देशों में ही नहीं, अमेरिकी-यूरोपीय देशों में भी भारतीयों को देखने के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। विदेश में रहने वाले केरल के मुस्लिम और अन्य वर्गों के युवा इस बदलाव की चर्चा अपने घरों में कर रहे हैं। इसके कारण उनके प्रति लोगों की सोच में परिवर्तन आ रहा है। भाजपा-संघ नेताओं का दावा है कि इस बदलाव का ही परिणाम निकाय चुनावों में दिखाई पड़ा है।  

'लव जिहाद की घटनाएं भी एक कारण'
उन्होंने कहा कि केरल के ईसाई परिवारों में भाजपा के प्रति रुख कुछ उदार हुआ है। इसका एक कारण यह भी है कि राज्य में लव जिहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं और लोगों में अपनी बेटियों और अपनी सामाजिक संस्कृति को लेकर चिंता बढ़ रही है। चूंकि, हम (भाजपा) ही इसके खिलाफ मुखर होकर बोल रहे हैं, लोग हमसे जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा केरल के हर वर्ग में अपना प्रभाव बढ़ा रही है। निकाय चुनाव परिणाम के रूप में इसका असर दिखने लगा है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि विधानसभा चुनावों में भी केरल के सामाजिक परिवेश में आ रहा यह बदलाव चुनाव परिणाम के रूप में दिखाई देगा। 
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