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रूस-यूक्रेन जंग: कांग्रेस ने भाजपा को याद दिलाया, कैसे खाड़ी युद्ध में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए हुआ था सफल ऑपरेशन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 07 Mar 2022 04:48 PM IST
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सार

कांग्रेस पार्टी के नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत सरकार को अपने मौखिक संतुलन बनाए रखने की नीति को रोकना चाहिए। उसे सख्त मांग करनी चाहिए कि रूस यूक्रेन के प्रमुख शहरों की बमबारी को तुरंत रोके। यदि बमबारी रोक दी जाती है, तो यूक्रेन में फंसे विदेशी देश से निकलने में सक्षम हो सकते हैं...

Russia Ukraine War: Congress party remember BJP that India had ensured the safe repatriation of lakhs of Indians during the Gulf War in the past
ऑपरेशन गंगा - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार

कांग्रेस पार्टी ने 'रूस-यूक्रेन जंग' के बीच केंद्र सरकार और भाजपा को याद दिलाया है कि पहले भी देश में ऐसी स्थिति आई है जब विदेशों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए सफल ऑपरेशन किए गए हैं। ये याद रखना महत्वपूर्ण है कि भारत ने अतीत में खाड़ी युद्ध के दौरान भारतीयों को निकालने के लिए अपनी वायु सेना और नौसेना के जरिए बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन कर लाखों भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई थी। लेबनान, लीबिया और इराक से भारतीयों को लाया गया। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि उस वक्त की सरकार ने पक्षपातपूर्ण प्रचार में शामिल हुए बिना इन ऑपरेशनों को पूरा किया था।

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राहुल गांधी ने बताया देश का अपमान

यूक्रेन में भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों केंद्र सरकार से पूछा था, अभी तक कितने छात्र भारत लौट आए हैं, कितने अब भी फंसे हैं। आगे के लिए सरकार का प्लान क्या है। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों द्वारा अपनी निकासी के बदले शौचालय साफ करना, जब ये मीडिया रिपोर्ट आई तो राहुल गांधी ने उसे पूरे देश का अपमान करार दे दिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, मजबूर छात्रों के साथ ऐसा शर्मनाक बर्ताव देश का अपमान है। ऑपरेशन गंगा के इस कड़वे सच ने केंद्र की मोदी सरकार का असली चेहरा दिखाया है। विपक्षी नेताओं ने यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के दौरान केंद्र सरकार के प्रचार पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने चार केंद्रीय मंत्रियों की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा स्वदेश वापसी पर केंद्रीय मंत्री छात्रों का स्वागत कर रहे थे। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन से आए छात्रों के साथ बातचीत की है।

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कांग्रेस पार्टी के नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत सरकार को अपने मौखिक संतुलन बनाए रखने की नीति को रोकना चाहिए। उसे सख्त मांग करनी चाहिए कि रूस यूक्रेन के प्रमुख शहरों की बमबारी को तुरंत रोके। यदि बमबारी रोक दी जाती है, तो यूक्रेन में फंसे विदेशी देश से निकलने में सक्षम हो सकते हैं। केंद्र सरकार को निकासी के आदेश देने में देरी हुई है और यह विश्वास कराने के लिए भी वह दोषी थी कि यूक्रेन में कुछ भी होने की संभावना नहीं है। छात्रों समेत हजारों भारतीयों की जान खतरे में है। भारत को जोर से और बहादुरी से बोलना चाहिए और मांग करनी चाहिए कि रूस तुरंत बमबारी बंद करे।

सद्दाम हुसैन ने की थी मदद

सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने कहा, यूक्रेन में सैन्य संघर्ष के बढ़ने से कांग्रेस पार्टी चिंतित और व्यथित है। निर्दोष लोगों की जान, व्यापक विनाश, लोगों का सामूहिक पलायन और बढ़ती मानवीय पीड़ा अस्वीकार्य है। हम युद्ध क्षेत्रों में फंसे हजारों भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। कांग्रेस पार्टी सभी शत्रुताओं को तत्काल समाप्त करने और दोनों पक्षों द्वारा सम्मानजनक सुरक्षित निकासी के लिए भौगोलिक रूप से परिभाषित मानवीय गलियारों के निर्माण की अपील करती है। रूस-यूक्रेन और नाटो को शांति बहाल करने के आगे आना चाहिए। सभी मुद्दों के स्थायी समाधान के लिए ईमानदारी से बातचीत हो। हमारे नागरिकों को वापस लाने के लिए सभी तरह के प्रयास करना भारत सरकार का कर्तव्य है। उसे यह याद रखना चाहिए कि भारत ने अतीत में खाड़ी युद्ध के दौरान भारतीयों को निकालने के लिए अपनी वायु सेना और नौसेना द्वारा बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन किए हैं। लेबनान, लीबिया और इराक में ये ऑपरेशन किए गए हैं। उस वक्त सरकार ने पक्षपातपूर्ण प्रचार में शामिल हुए बिना इन ऑपरेशन को सफल बनाया था।


खाड़ी युद्ध में जब लाखों भारतीय, कुवैत में फंसे थे, तब इराकी राष्ट्रपति 'सद्दाम हुसैन' ने भारतीयों को कुवैत से अम्मान तक लाने में मदद की थी। उन्होंने बगदाद से बसों की व्यवस्था की थी। दो माह में 1.70 लाख से अधिक भारतीयों को स्वदेश लाया गया था। कुवैत में फंसे भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए अगस्त 1990 में ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। जो ग्रीन कॉरिडोर तैयार हुआ, वह कुवैत से इराक के रास्ते जॉर्डन बॉर्डर तक पहुंचता था। लेबनान के युद्धग्रस्त क्षेत्रों के भीतर जाकर भारतीयों को बाहर निकाला गया था। अगर केंद्र सरकार रूसी राष्ट्रपति पर दबाव डालती तो बात बन सकती थी। भारत सरकार, रूस को कह सकती थी कि आप सैन्य कार्रवाई को रोकिए। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मानवता के आधार पर भी कुछ समय के लिए सीजफायर किया जा सकता है।

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