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UP Polls: 'हमने अपनी गलतियों को सुधारा है', ओवैसी ने यूपी चुनावों से पहले BJP-विरोधी गठबंधन के लिए दिया संकेत
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Tue, 16 Jun 2026 06:02 PM IST
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सार
असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम पहली बार खुले तौर पर यूपी में विपक्षी गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जता रही है। वहीं, भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को लेकर चल रही बहस फिर से तेज हो सकती है। कांग्रेस फिलहाल एआईएमआईएम से दूरी बनाए हुए दिखाई दे रही है। लेकिन, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
असदुद्दीन औवेसी, अध्यक्ष, एआईएमआईएम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा है कि अगर भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्षी गठबंधन बनता है, तो उनकी पार्टी उसमें शामिल होने के लिए तैयार है।
2017 की हार स्वीकार की
उत्तर प्रदेश दौरे पर पहुंचे ओवैसी ने माना कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि उस चुनाव से पार्टी ने काफी कुछ सीखा है और अब अपनी कमजोरियों तथा गलतियों को सुधार लिया है। ओवैसी ने कहा कि 2017 में एआईएमआईएम ने चुनाव लड़ा था, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब पार्टी पहले से अधिक मेहनत कर रही है और अपनी पुरानी कमियों को दूर कर चुकी है।
यह भी पढ़ें- Humayun Kabir: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों पर हुमायूं कबीर ने कसा तंज, कहा- हिम्मत होती तो देते इस्तीफा
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2027 चुनाव की तैयारी में जुटी एआईएमआईएम
ओवैसी ने बताया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली और पूरी संगठनात्मक टीम राज्यभर में सक्रिय है। पार्टी बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और जनसंपर्क बढ़ाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जीतकर विधानसभा में प्रतिनिधित्व हासिल करना है।
विपक्षी गठबंधन के लिए तैयार
ओवैसी ने साफ कहा कि यदि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कोई व्यापक विपक्षी गठबंधन बनता है तो एआईएमआईएम उसमें शामिल होने को तैयार है। उन्होंने कहा कि बिहार में भी उन्होंने विपक्षी दलों को साथ आने का प्रस्ताव दिया था। एआईएमआईएम की ओर से गठबंधन के लिए पत्र भी लिखा गया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। बाद में चुनाव परिणामों ने दिखाया कि विपक्षी एकता की कमी का नुकसान हुआ।
वोट काटने के आरोपों का जवाब
एआईएमआईएम पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि वह चुनाव लड़कर विपक्षी वोटों का बंटवारा करती है और इसका फायदा भाजपा को मिलता है। इस आरोप पर जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि केवल उनकी पार्टी को दोष देना गलत है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार उनकी पार्टी बाबू सिंह कुशवाहा के साथ गठबंधन में थी, जो आज समाजवादी पार्टी के सांसद हैं। ओवैसी ने कहा कि कई बार विपक्षी दलों के अपने विधायक भी क्रॉस-वोटिंग करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है। उन्होंने बिहार के हालिया राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद के कुछ विधायकों ने भी अपने गठबंधन का साथ नहीं दिया था।
यह भी पढ़ें- Railways: माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालु ध्यान दें, अब नए रूट से दौड़ेगी कटरा जाने वाली वंदे भारत
कांग्रेस ने गठबंधन की संभावना खारिज की
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने एआईएमआईएम के साथ किसी भी गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया। मसूद ने कहा कि अगर सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़नी है तो हर प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करना होगा। केवल एक प्रकार की सांप्रदायिकता का विरोध करके दूसरी के साथ हाथ नहीं मिलाया जा सकता।
विपक्षी एकता पर जोर
हालांकि, इमरान मसूद ने विपक्षी दलों की एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावी अनुभवों के बाद अब समय आपसी मतभेदों में उलझने का नहीं, बल्कि एकजुट होकर मुकाबला करने का है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर बातचीत से फैसला होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों का चयन स्वयं करेगी और किसी अन्य दल को इसमें हस्तक्षेप नहीं करने दिया जाएगा।
2017 की हार स्वीकार की
उत्तर प्रदेश दौरे पर पहुंचे ओवैसी ने माना कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि उस चुनाव से पार्टी ने काफी कुछ सीखा है और अब अपनी कमजोरियों तथा गलतियों को सुधार लिया है। ओवैसी ने कहा कि 2017 में एआईएमआईएम ने चुनाव लड़ा था, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब पार्टी पहले से अधिक मेहनत कर रही है और अपनी पुरानी कमियों को दूर कर चुकी है।
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2027 चुनाव की तैयारी में जुटी एआईएमआईएम
ओवैसी ने बताया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली और पूरी संगठनात्मक टीम राज्यभर में सक्रिय है। पार्टी बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और जनसंपर्क बढ़ाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जीतकर विधानसभा में प्रतिनिधित्व हासिल करना है।
विपक्षी गठबंधन के लिए तैयार
ओवैसी ने साफ कहा कि यदि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कोई व्यापक विपक्षी गठबंधन बनता है तो एआईएमआईएम उसमें शामिल होने को तैयार है। उन्होंने कहा कि बिहार में भी उन्होंने विपक्षी दलों को साथ आने का प्रस्ताव दिया था। एआईएमआईएम की ओर से गठबंधन के लिए पत्र भी लिखा गया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। बाद में चुनाव परिणामों ने दिखाया कि विपक्षी एकता की कमी का नुकसान हुआ।
वोट काटने के आरोपों का जवाब
एआईएमआईएम पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि वह चुनाव लड़कर विपक्षी वोटों का बंटवारा करती है और इसका फायदा भाजपा को मिलता है। इस आरोप पर जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि केवल उनकी पार्टी को दोष देना गलत है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार उनकी पार्टी बाबू सिंह कुशवाहा के साथ गठबंधन में थी, जो आज समाजवादी पार्टी के सांसद हैं। ओवैसी ने कहा कि कई बार विपक्षी दलों के अपने विधायक भी क्रॉस-वोटिंग करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है। उन्होंने बिहार के हालिया राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद के कुछ विधायकों ने भी अपने गठबंधन का साथ नहीं दिया था।
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कांग्रेस ने गठबंधन की संभावना खारिज की
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने एआईएमआईएम के साथ किसी भी गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया। मसूद ने कहा कि अगर सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़नी है तो हर प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करना होगा। केवल एक प्रकार की सांप्रदायिकता का विरोध करके दूसरी के साथ हाथ नहीं मिलाया जा सकता।
विपक्षी एकता पर जोर
हालांकि, इमरान मसूद ने विपक्षी दलों की एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावी अनुभवों के बाद अब समय आपसी मतभेदों में उलझने का नहीं, बल्कि एकजुट होकर मुकाबला करने का है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर बातचीत से फैसला होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों का चयन स्वयं करेगी और किसी अन्य दल को इसमें हस्तक्षेप नहीं करने दिया जाएगा।