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ब्रिक्स बिजनेस फोरम: जयशंकर बोले- बढ़ेगी आर्थिक गतिविधि तो मजबूत होगी आत्मनिर्भरता, और क्या-क्या कहा?
Fri, 11 Sep 2026 12:28 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 11 Sep 2026 12:28 PM IST
सार
जयशंकर ने कहा कि दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और अस्थिरता व अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे समय में ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधि और सुरक्षा बढ़ाकर आत्मनिर्भरता मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कारोबार, आपूर्ति नेटवर्क, ऊर्जा सुरक्षा और पारदर्शी व्यापार को इसके लिए अहम बताया। 12 सितंबर से शुरू होने वाले शिखर सम्मेलन में इन्हीं आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर आगे चर्चा होने की उम्मीद है।
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एस जयशंकर, भारत के विदेश मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कहा कि दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता आज दुनिया की पहचान बनती जा रही है। विदेश मंत्री भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारी और जलवायु से जुड़ी परेशानियों का असर अब सीधे अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बढ़ता डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति विकास, उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि के लिए नई संभावनाएं खोल रही है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात ने ऐसा आर्थिक माहौल बनाया है, जहां जोखिम और अवसर दोनों पहले से ज्यादा व्यापक हो गए हैं।
कारोबार के लिए जोखिम और अवसर कैसे बढ़े?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस बदलती परिस्थिति में किसी भी देश और कारोबार के लिए पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है कि वह आने वाले बदलावों का अनुमान लगाए, उसके मुताबिक खुद को ढाले और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया दे। उन्होंने कहा कि दुनिया में आर्थिक जोखिम और अवसर अब अलग-अलग जगहों तक सीमित नहीं हैं। नतीजा यह है कि आर्थिक परिदृश्य ऐसा बन गया है, जहां जोखिम और अवसर दोनों अधिक व्यापक रूप से वितरित हो रहे हैं और अनुमान लगाने, बदलाव के मुताबिक ढलने तथा प्रतिक्रिया देने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
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ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या जरूरी?
विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के सामने साझा लक्ष्य यह होना चाहिए कि उनके कारोबारों के लिए दूसरे सदस्य देशों में साझेदार ढूंढना, नए बाजारों तक पहुंचना और आपूर्ति नेटवर्क से जुड़ना आसान हो। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की आर्थिक क्षमताओं को व्यावसायिक साझेदारी में बदलना जरूरी है। जयशंकर ने ब्रिक्स के संदर्भ में कहा कि ज्यादा आर्थिक गतिविधि और आर्थिक सुरक्षा का मतलब ज्यादा आत्मनिर्भरता है। इसका उद्देश्य ऐसा तंत्र तैयार करना है, जो झटकों को सह सके और साथ ही दुनिया से जुड़ा तथा प्रतिस्पर्धी भी बना रहे।
आत्मनिर्भरता के लिए किन चीजों पर जोर?
एस जयशंकर ने कहा कि इस लक्ष्य के लिए वास्तविक बाजार व्यवस्था, भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स और अनुमान लगाने योग्य कारोबारी माहौल जरूरी है। इसके साथ व्यापारिक रिश्तों में विविधता और व्यापार तथा निवेश में पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने ऊर्जा व्यवस्था को लेकर भी कहा कि ऐसी प्रणालियां जरूरी हैं, जो किसी भी तरह के व्यवधान और बदलाव का सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियों के मुताबिक ऊर्जा बदलाव का रास्ता तय किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ब्रिक्स की आर्थिक मजबूती का मकसद सिर्फ ज्यादा कारोबार करना नहीं, बल्कि ऐसे तंत्र तैयार करना भी है जो संकट के समय अर्थव्यवस्थाओं को संभाल सकें।
यह भी पढ़ें: ब्रिक्स देशों से पीयूष गोयल की अपील: 'बाजार खोलें, बाधाएं हटाएं, भुगतान प्रणाली आसान करें', बोले-टैरिफ एक बाधा
ब्रिक्स बिजनेस फोरम और शिखर सम्मेलन में क्या होगा?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम समूह में निजी क्षेत्र की भागीदारी का प्रमुख मंच है। यह हर साल उस देश में आयोजित होता है, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है और नेताओं की बैठक से ठीक पहले होता है। इसमें प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधि, सरकार के मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और टिकाऊ आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
फोरम से मिले सुझाव ब्रिक्स की आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करने में मदद करते हैं। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें भी नीति निर्माताओं के सामने रखी जाती हैं। 12 सितंबर से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा। इसमें भारत की अध्यक्षता की पहलों, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सीमा पार भुगतान, राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल, एमएसएमई, डिजिटल कारोबार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु से निपटने की क्षमता, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और बहुपक्षीय वित्तीय एवं राजनीतिक संस्थानों में सुधार भी अहम मुद्दे रहेंगे।
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साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बढ़ता डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति विकास, उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि के लिए नई संभावनाएं खोल रही है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात ने ऐसा आर्थिक माहौल बनाया है, जहां जोखिम और अवसर दोनों पहले से ज्यादा व्यापक हो गए हैं।
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कारोबार के लिए जोखिम और अवसर कैसे बढ़े?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस बदलती परिस्थिति में किसी भी देश और कारोबार के लिए पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है कि वह आने वाले बदलावों का अनुमान लगाए, उसके मुताबिक खुद को ढाले और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया दे। उन्होंने कहा कि दुनिया में आर्थिक जोखिम और अवसर अब अलग-अलग जगहों तक सीमित नहीं हैं। नतीजा यह है कि आर्थिक परिदृश्य ऐसा बन गया है, जहां जोखिम और अवसर दोनों अधिक व्यापक रूप से वितरित हो रहे हैं और अनुमान लगाने, बदलाव के मुताबिक ढलने तथा प्रतिक्रिया देने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
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ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या जरूरी?
विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के सामने साझा लक्ष्य यह होना चाहिए कि उनके कारोबारों के लिए दूसरे सदस्य देशों में साझेदार ढूंढना, नए बाजारों तक पहुंचना और आपूर्ति नेटवर्क से जुड़ना आसान हो। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की आर्थिक क्षमताओं को व्यावसायिक साझेदारी में बदलना जरूरी है। जयशंकर ने ब्रिक्स के संदर्भ में कहा कि ज्यादा आर्थिक गतिविधि और आर्थिक सुरक्षा का मतलब ज्यादा आत्मनिर्भरता है। इसका उद्देश्य ऐसा तंत्र तैयार करना है, जो झटकों को सह सके और साथ ही दुनिया से जुड़ा तथा प्रतिस्पर्धी भी बना रहे।
आत्मनिर्भरता के लिए किन चीजों पर जोर?
एस जयशंकर ने कहा कि इस लक्ष्य के लिए वास्तविक बाजार व्यवस्था, भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स और अनुमान लगाने योग्य कारोबारी माहौल जरूरी है। इसके साथ व्यापारिक रिश्तों में विविधता और व्यापार तथा निवेश में पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने ऊर्जा व्यवस्था को लेकर भी कहा कि ऐसी प्रणालियां जरूरी हैं, जो किसी भी तरह के व्यवधान और बदलाव का सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियों के मुताबिक ऊर्जा बदलाव का रास्ता तय किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ब्रिक्स की आर्थिक मजबूती का मकसद सिर्फ ज्यादा कारोबार करना नहीं, बल्कि ऐसे तंत्र तैयार करना भी है जो संकट के समय अर्थव्यवस्थाओं को संभाल सकें।
यह भी पढ़ें: ब्रिक्स देशों से पीयूष गोयल की अपील: 'बाजार खोलें, बाधाएं हटाएं, भुगतान प्रणाली आसान करें', बोले-टैरिफ एक बाधा
ब्रिक्स बिजनेस फोरम और शिखर सम्मेलन में क्या होगा?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम समूह में निजी क्षेत्र की भागीदारी का प्रमुख मंच है। यह हर साल उस देश में आयोजित होता है, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है और नेताओं की बैठक से ठीक पहले होता है। इसमें प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधि, सरकार के मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और टिकाऊ आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
फोरम से मिले सुझाव ब्रिक्स की आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करने में मदद करते हैं। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें भी नीति निर्माताओं के सामने रखी जाती हैं। 12 सितंबर से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा। इसमें भारत की अध्यक्षता की पहलों, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सीमा पार भुगतान, राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल, एमएसएमई, डिजिटल कारोबार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु से निपटने की क्षमता, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और बहुपक्षीय वित्तीय एवं राजनीतिक संस्थानों में सुधार भी अहम मुद्दे रहेंगे।