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'बदले के लिए हुई गिरफ्तारी?': सबरीमाला सोना चोरी मामले में तंत्री ने खोला मोर्चा, महिला प्रवेश से जोड़ा विवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 20 Feb 2026 02:22 PM IST
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सार
सबरीमाला मंदिर के तंत्री कंदरारु राजीवारु ने सोना गुम होने के मामलों में अपनी गिरफ्तारी को 2018 महिला प्रवेश विवाद से जोड़ा है। विजिलेंस कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए कहा कि ठोस सबूत नहीं हैं। तंत्री का आरोप है कि मंदिर परंपराओं की रक्षा के उनके रुख के कारण उन्हें फंसाया गया।
सबरीमाला मंदिर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना गुम होने के मामलों में गिरफ्तार किए गए तंत्री कंदरारु राजीवारु ने अपनी गिरफ्तारी को 2018 के महिला प्रवेश विवाद से जोड़ दिया है। उनका दावा है कि उस समय मंदिर परंपराओं की रक्षा को लेकर लिए गए उनके सख्त रुख के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। कोल्लम की विजिलेंस कोर्ट से हाल ही में जमानत मिलने के बाद यह मामला फिर चर्चा में है।
सबरीमाला के तंत्री कंदरारु राजीवारु दो मामलों में आरोपी बनाए गए थे। एक मामले में वह द्वारपालक देवता के स्वर्ण आभूषणों के कथित नुकसान के 16वें आरोपी हैं। दूसरे मामले में श्रीकोविल के दरवाजों से सोना गुम होने के 13वें आरोपी हैं। जमानत सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा उठा, तब तंत्री ने मंदिर परंपराओं की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि अगर स्थापित रीति-रिवाजों से छेड़छाड़ हुई तो वह पूजा नहीं करेंगे।
2018 विवाद से कैसे जोड़ा मामला?
तंत्री ने अदालत में कहा कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सत्तारूढ़ दल के कहने पर महिलाओं के प्रवेश को आसान बनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब मंदिर को हर दिन खोलने का प्रयास हुआ तो उन्होंने भगवान के ‘नित्य ब्रह्मचारी’ स्वरूप का हवाला देकर आपत्ति जताई। उनका दावा है कि इसी कारण कई लोग उनसे नाराज हुए और अब उनकी छवि खराब करने के लिए उन्हें इन मामलों में फंसाया गया।
ये भी पढ़ें- गृह मंत्री अमित शाह असम पहुंचे, वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम की करेंगे शुरुआत
एसआईटी और देवस्वोम बोर्ड पर आरोप
तंत्री का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पास है और उनका काम केवल शास्त्रों के अनुसार पूजा कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वर्ण आभूषणों के कथित गबन में कुछ बोर्ड अधिकारी और बाहरी लोग शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष जांच दल ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से उनकी जान-पहचान को मुद्दा बनाकर मामले को भटकाने की कोशिश की। तंत्री ने स्पष्ट किया कि पोट्टी की नियुक्ति उन्होंने नहीं की थी।
अदालत और विपक्ष की प्रतिक्रिया
कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि तंत्री के खिलाफ एक भी ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने माना कि एसआईटी आपराधिक साजिश साबित करने में नाकाम रही है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर तंत्री के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। वहीं केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि एसआईटी को बताना चाहिए कि तंत्री को 41 दिन जेल में क्यों रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच जब सीपीआई(एम) नेताओं की ओर बढ़ रही थी, तब मुख्यमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह तंत्री को निर्दोष नहीं बता रहे, लेकिन गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
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सबरीमाला के तंत्री कंदरारु राजीवारु दो मामलों में आरोपी बनाए गए थे। एक मामले में वह द्वारपालक देवता के स्वर्ण आभूषणों के कथित नुकसान के 16वें आरोपी हैं। दूसरे मामले में श्रीकोविल के दरवाजों से सोना गुम होने के 13वें आरोपी हैं। जमानत सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा उठा, तब तंत्री ने मंदिर परंपराओं की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि अगर स्थापित रीति-रिवाजों से छेड़छाड़ हुई तो वह पूजा नहीं करेंगे।
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2018 विवाद से कैसे जोड़ा मामला?
तंत्री ने अदालत में कहा कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सत्तारूढ़ दल के कहने पर महिलाओं के प्रवेश को आसान बनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब मंदिर को हर दिन खोलने का प्रयास हुआ तो उन्होंने भगवान के ‘नित्य ब्रह्मचारी’ स्वरूप का हवाला देकर आपत्ति जताई। उनका दावा है कि इसी कारण कई लोग उनसे नाराज हुए और अब उनकी छवि खराब करने के लिए उन्हें इन मामलों में फंसाया गया।
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एसआईटी और देवस्वोम बोर्ड पर आरोप
तंत्री का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पास है और उनका काम केवल शास्त्रों के अनुसार पूजा कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वर्ण आभूषणों के कथित गबन में कुछ बोर्ड अधिकारी और बाहरी लोग शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष जांच दल ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से उनकी जान-पहचान को मुद्दा बनाकर मामले को भटकाने की कोशिश की। तंत्री ने स्पष्ट किया कि पोट्टी की नियुक्ति उन्होंने नहीं की थी।
अदालत और विपक्ष की प्रतिक्रिया
कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि तंत्री के खिलाफ एक भी ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने माना कि एसआईटी आपराधिक साजिश साबित करने में नाकाम रही है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर तंत्री के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। वहीं केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि एसआईटी को बताना चाहिए कि तंत्री को 41 दिन जेल में क्यों रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच जब सीपीआई(एम) नेताओं की ओर बढ़ रही थी, तब मुख्यमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह तंत्री को निर्दोष नहीं बता रहे, लेकिन गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
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