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Pakistan: जब भारत मना रहा था चंद्रयान की सफलता का जश्न, तब पाकिस्तान का अधिकारी वेतन के लिए लगा रहा था गुहार
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23 अगस्त को जब भारत चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतर कर जश्न मना रहा था और अमेरिका समेत दुनिया के तमाम मुल्क भारत की तारीफ के कसीदे पढ़ रहे थे तो उसी अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तान के दूतावास की ओर से इस्लामाबाद को चिट्ठी लिखी जा रही थी कि कम से कम कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन का पैसा तो जारी कर दिया जाए। महीनों से बकाया बिल के चलते पाकिस्तान के इस दूतावास का खर्चा पानी तक चलना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हो गए हैं वेतन तो दूर की बात अधिकारियों के रहने के लिए किराया तक देने का संकट खड़ा हो गया है।
न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तान के काउंसलेट ने इस्लामाबाद के विदेश मंत्रालय के मुख्यालय और वित्त विभाग को चिट्ठी लिखकर तकरीबन चार लाख डॉलर के भुगतान की मांग करते हुए कहा अगर उनको यह फंड नहीं जारी हुआ तो यहां पर मिशन को चलाना मुश्किल हो जाएगा। दरसल पाकिस्तान में वित्तीय संकट इस तरीके का है कि वह अब अपने दूतावासों के खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहा है। पाकिस्तान में महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता के चलते युद्ध की स्थिति बनी हुई है।
चार लाख डॉलर का बकाया है न्यूयॉर्क दूतावास का...
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान का अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित दूतावास में इस वक्त जबरदस्त वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि दूतावास को चला पाना पाकिस्तान के लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान के सीनियर काउंसलेट ने 23 अगस्त को इस्लामाबाद में चिट्ठी लिखकर बीते तीन महीनो के तकरीबन 4 लाख डॉलर के बकाया भुगतान की बात कही है। इस दौरान पाकिस्तान के काउंसलेट की ओर से न सिर्फ अधिकारियों के वेतन बल्कि स्थानीय स्तर पर काम किए जाने वाले कर्मचारी और न्यूयॉर्क स्थित दूतावास में इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियों समेत खाने-पीने और नाश्ते के लिए खर्च होने वाले बकाया भुगतान को जल्द से जल्द किए जाने के लिए कहा है।
खर्चों की कटौती करने के लिए कहा गया था
सूत्रों के मुताबिक इस तरीके का रिमाइंडर इस्लामाबाद को न्यूयॉर्क के पीकिस्तानी दूतावास की ओर से मौखिक रूप से पहले भी दिया जा चुका है। तब पाकिस्तान की ओर से न्यूयॉर्क समेत अपने सभी विदेशी एस्टेब्लिशमेंट में खर्चों की कटौती करने के लिए कहा गया था। आर्थिक मामलों के जानकारो का मानना है कि पाकिस्तान में वित्तीय संकट इस तरीके का है कि वह अब अपने दूतावासों के खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहा है।
दरअसल अमेरिका पहला देश नहीं है जहां पर पाकिस्तान के दूतावास की ओर से फंड की कमी के लिए चिट्ठी लिखी गई हो। इससे पहले भी अल्जीरिया के पाकिस्तान एंबेसी ट्विटर हैंडल से फंड की कमी की बात खुलकर कही गई थी। जब अल्जीरिया के पाकिस्तान एंबेसी ट्विटर हैंडल समेत अन्य सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की फजीहत का यह मैसेज वायरल हुआ तो पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट को हैक कर दिया गया था।
हालांकि जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान लगातार न सिर्फ कर्ज में डूबता जा रहा है बल्कि अर्थव्यवस्था के स्तर पर टूटता भी जा रहा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर करीब से नजर रखने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रमन साहू कहते हैं की पाकिस्तान में उनका रूपया अब तक के सबसे कमजोर और निचले स्तर पर पहुंचता जा रहा है। अमेरिका के एक डॉलर के बदले पाकिस्तान के 300 सौ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। पाकिस्तान की वर्तमान परिस्थितियों के देखते हुए हालात तो नहीं लग रहे कि पाकिस्तान अब लाखों डॉलर महीने के खर्चे वाले किसी बड़े प्रोजेक्ट को या मिशन को आगे बढ़ा सकेगा।
इस्लामाबाद की ओर से फंड नहीं जारी हो पा रहा है
आर्थिक रूप से कंगाल हो रहे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की स्थिति बद से बदकर होती जा रही है। हालत यह हो गई है कि पाकिस्तान के विदेश में स्थित दूतावासों से लेकर अन्य मिशन में अब न सिर्फ वेतन का संकट शुरू हो गया है बल्कि तमाम तरह के जरूरी खर्चों के बाद भी इस्लामाबाद की ओर से फंड नहीं जारी हो पा रहा है।
विदेशी मामलों के जानकार कर्नल एसएन कपूर कहते हैं पाकिस्तान के जो हालात हो गए हैं उसमें अपने देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दूसरे देशों में रिश्ते रख पाना भी संभव नहीं हो पा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा संकट वित्तीय संकट ही है। कर्नल कपूर के मुताबिक जो चिट्ठी दूतावास की ओर से इस्लामाबाद को लिखी गई है वह निश्चित तौर पर पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था को ही दर्शाती है। क्योंकि पाकिस्तान की सरकार ने तो बीते कुछ दिनों में ऐसा ही आदेश भी निकाला था कि खर्चों में कटौती की जाए।
पाकिस्तान में महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के चलते त्राहि-त्राहि मची हुई है
बदहाल पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के चलते ही दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन ने स्कूल को भी बंद कर दिया था। इस दौरान भी यहां के कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन न दिए जाने की बात कही गई थी। दरअसल पाकिस्तान में महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के चलते त्राहि-त्राहि मची हुई है। आलू, प्याज, टमाटर, दूध और सब्जियों समेत रोजाना जरूरत की चीजें लोगों की पहुंच से बाहर हो रही हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने विदेशों में अपने दूतावासों और हाई कमीशन के अधिकारियों को न सिर्फ खर्चे में कटौती करने के निर्देश दिए, बल्कि उन सभी सेटअप को बंद करने का निर्देश दिया। जिन्हें चला पाने में पाकिस्तान वित्तीय रूप से और टूटता जा रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने दिल्ली में अपने हाई कमीशन के स्कूल को बंद करने का फैसला ले लिया था।
कई मंत्री और अधिकारी तो प्राइवेट एयरक्राफ्ट से भी यात्राएं कर रहे हैं
हालांकि पाकिस्तान के बदले मामलों को लेकर पाकिस्तान के भीतर ही अब आवाज बुलंद होने लगी है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपने ही मंत्रियों और आला अधिकारियों के खर्चों पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि जब सरकार ने खर्चों में कटौती करने की बात कही है तो उनके अधिकारी विदेश में जाकर लग्जरी में क्यों रह रहे हैं। पाकिस्तान के उक्त वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि पिछले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल अली भुट्टो अमेरिका दौरे पर न सिर्फ महंगे महंगे होटलों में रुके बल्कि कई मंत्री और अधिकारी तो प्राइवेट एयरक्राफ्ट से भी यात्राएं कर रहे हैं।
वह कहते हैं कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने अपने पूरे परिवार को सरकार के खर्चे पर हज की यात्रा कराई है। उनका कहना है जिस देश में आर्थिक स्थिति इतनी डांवाडोल है कि उनका रुपया लगातार टूटता और गिरता जा रहा है और ऊपर से आर्थिक रूप से मदद करने वाले देश भी धीरे-धीरे हाथ खड़े करते जा रहे हैं, वहां जब तक देश के बारे में सोचने वाली कोई सरकार नहीं होगी तब तक स्थितियां बेहतर नहीं हो सकती।
मूडीज ने इस साल पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग को भी घटा दिया था
पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक व्यवस्था के चलते ही कई संगठनों ने अपनी रिपोर्ट्स में पहले ही चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर है। आर्थिक मामलों के जानकार प्रोफेसर रमन साहू कहते हैं कि रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इसी साल पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग को भी घटा दिया था। वह कहते हैं कि इस साल की शुरुआत में हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्रालयों समेत कई विभागों में 15 फीसदी के कटौती वाले बिल को मंजूरी भी दी गई थी। हालांकि वह कहते हैं कि पाकिस्तान की बदहाल और कंगाल हो रही अर्थव्यवस्था के पीछे प्रमुख कारण आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है।