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Islamic Nato: भारत से रिश्तों को दांव पर नहीं लगाएगा सऊदी अरब, पाकिस्तान के इस्लामी नाटो को लगा झटका

आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 30 Jan 2026 06:52 AM IST
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सार

सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह भारत के खिलाफ किसी मोर्चेबंदी में शामिल नहीं होगा। सऊदी अरब के इस बयान से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। भारत और सऊदी अरब ने कट्टरपंथ से मुकाबले को लेकर भी चर्चा की। 

Saudi Arabia will not risk its relationship with India Pakistan plans for Islamic NATO suffer a setback
भारत-सऊदी अरब - फोटो : freepik
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विस्तार
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रियाद में हुई भारत-सऊदी अरब सुरक्षा कार्य समूह की बैठक ने दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों में अहम संकेत दिए हैं। बैठक में आतंकवाद के सभी रूपों, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद, की कड़ी निंदा करते हुए दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। सऊदी अरब की ओर से भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट समर्थन और हाल की आतंकी घटनाओं की निंदा को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह रुख पाकिस्तान की तथाकथित ‘इस्लामी नाटो’ जैसी योजनाओं को कमजोर करता है।
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पाकिस्तान के इस्लामिक नाटो को झटका
  • बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग के खिलाफ कार्रवाई, कट्टरपंथ से मुकाबला जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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  • इन बिंदुओं पर साझा सहमति यह दर्शाती है कि सऊदी अरब क्षेत्रीय सुरक्षा के सवाल पर भारत के साथ तालमेल बढ़ाने के पक्ष में है। इस पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के लिए संदेश साफ माना जा रहा है।
  • बीते वर्ष सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक रक्षा समझौते की चर्चा हुई थी, जिसमें नाटो जैसी सामूहिक सुरक्षा की धारणा की बात कही गई।
  • पाकिस्तान चाहता था कि ऐसे प्रावधान भारत के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में काम करें। लेकिन रियाद बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि सऊदी अरब भारत के साथ अपने संबंधों को किसी भी सूरत में दांव पर नहीं लगाएगा।

पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये त्रिपक्षीय रक्षा व्यवस्था अधर में
पाकिस्तान की कोशिश सऊदी अरब और तुर्किये के साथ मिलकर त्रिपक्षीय रक्षा व्यवस्था बनाने की भी रही है, जिसमें सामूहिक सुरक्षा की शर्त शामिल हो। मौजूदा संकेत बताते हैं कि यह पहल भी आगे बढ़ती नहीं दिख रही। जानकार इसे पाकिस्तान की पैन-इस्लामिक कूटनीति की सीमाओं के रूप में देखते हैं।

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'भारत विरोधी किसी सैन्य गठबंधन की संभावना नहीं'
विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ने अमर उजाला से कहा कि सऊदी अरब भारत को एक ब्रदरली देश (भाई सरीखा देश) मानता है। वह भारत के खिलाफ नहीं जाएगा, पाकिस्तान भले चाहता रहे। वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे उनके भारत से रिश्ते बिगड़ें। इस्लामी नाटो यूं भी नहीं बन सकता। नाटो लोकतांत्रिक देशों का समूह है। वह सोवियत यूनियन के खिलाफ बना था, इस्लामी नाटो किसके खिलाफ बनेगा? भारत के खिलाफ इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि इस्लामी देश यह नहीं मानते कि पाकिस्तान को भारत से कोई खतरा है।


 
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