{"_id":"6a0eda1013423a72ea04c346","slug":"sc-bats-for-victim-centric-approach-refuses-to-entertain-plea-for-consolidation-of-firs-2026-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: पीड़ितों के अधिकारों का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट 53 प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने से किया इनकार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: पीड़ितों के अधिकारों का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट 53 प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने से किया इनकार
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 21 May 2026 03:40 PM IST
विज्ञापन
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों से कथित तौर पर 49 करोड़ की ठगी से जुड़ी 53 प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने की मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा कि हर धोखाधड़ी का मामला अलग होता है और पीड़ितों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पढ़िए रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 53 प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इन प्राथमिकियों में निवेशकों से कथित तौर पर 49 करोड़ डॉलर की ठगी का मामला दर्ज है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामलों में पीड़ितों को केंद्र में रखकर विचार करने की जरूरत है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने आरोपियों उपेंद्र नाथ मिश्रा और काली प्रसाद मिश्रा की ओर से पेश वकील अमन लेखी की दलीलों पर सहमति नहीं जताई। इसके बाद याचिका वापस ले ले ली गई।
विभिन्न राज्यों में आरोपियों के खिलाफ मामले
आरोपियों के खिलाफ ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और आंध्र प्रदेश में कई आपराधिक मामले चल रहे हैं।
शीर्ष कोर्ट ने पुराने फैसलों का जिक्र किया
पीठ ने बड़ी धोखाधड़ी के मामलों में प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को ध्यान में रखने के बजाय प्राथमिकियों के एकीकरण और जल्दी सुनवाई के नाम पर आरोपी पक्ष के हित में फैसले दिए जा रहे थे।
विज्ञापन
सीजेआई सूर्य कांत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, ऐसे अपराधों के पीड़ितों के अधिकारों का क्या होगा? उन्होंने प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने काया आदेश देने से इनकार किया। उन्होंने हाल ही में आपराधिक कानून में बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि अब पीड़ितों के अधिकारों को भी मान्यता दी गई है।
ये भी पढ़ें: माउंट एवरेस्ट पर नया रिकॉर्ड: एक दिन में 274 पर्वतारोहियों ने की चढ़ाई, तीन भारतीय भी शामिल
हर धोखाधड़ी का मामला अलग होता है: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, हर धोखाधड़ी का मामला अलग होता है, क्योंकि हर पीड़ित और ठगी की रकम अलग होती है। हालांकि, आरोपी वही हो सकते हैं। पीठ ने कहा, जांच के लिए हम प्राथमिकियों को एक साथ नहीं जोड़ सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी के शिकार लोग न्यायिक व्यवस्था के ऐसे अदृश्य पीड़ित हैं, जिनके बारे में पहले ज्यादा नहीं सोचा गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, क्या यह सही होगा कि आपके अपराध के पीड़ित अलग-अलग जगहों से सिर्फ आरोपी की सुविधा के लिए एक ही जगह आएं? न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि धोखाधड़ी, ठगी और साजिश का हर अपराध अलग और स्वतंत्र मामला है। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को क्यों परेशान होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने आरोपियों उपेंद्र नाथ मिश्रा और काली प्रसाद मिश्रा की ओर से पेश वकील अमन लेखी की दलीलों पर सहमति नहीं जताई। इसके बाद याचिका वापस ले ले ली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विभिन्न राज्यों में आरोपियों के खिलाफ मामले
आरोपियों के खिलाफ ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और आंध्र प्रदेश में कई आपराधिक मामले चल रहे हैं।
शीर्ष कोर्ट ने पुराने फैसलों का जिक्र किया
पीठ ने बड़ी धोखाधड़ी के मामलों में प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को ध्यान में रखने के बजाय प्राथमिकियों के एकीकरण और जल्दी सुनवाई के नाम पर आरोपी पक्ष के हित में फैसले दिए जा रहे थे।
Trending Videos
सीजेआई सूर्य कांत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, ऐसे अपराधों के पीड़ितों के अधिकारों का क्या होगा? उन्होंने प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने काया आदेश देने से इनकार किया। उन्होंने हाल ही में आपराधिक कानून में बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि अब पीड़ितों के अधिकारों को भी मान्यता दी गई है।
ये भी पढ़ें: माउंट एवरेस्ट पर नया रिकॉर्ड: एक दिन में 274 पर्वतारोहियों ने की चढ़ाई, तीन भारतीय भी शामिल
हर धोखाधड़ी का मामला अलग होता है: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, हर धोखाधड़ी का मामला अलग होता है, क्योंकि हर पीड़ित और ठगी की रकम अलग होती है। हालांकि, आरोपी वही हो सकते हैं। पीठ ने कहा, जांच के लिए हम प्राथमिकियों को एक साथ नहीं जोड़ सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी के शिकार लोग न्यायिक व्यवस्था के ऐसे अदृश्य पीड़ित हैं, जिनके बारे में पहले ज्यादा नहीं सोचा गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, क्या यह सही होगा कि आपके अपराध के पीड़ित अलग-अलग जगहों से सिर्फ आरोपी की सुविधा के लिए एक ही जगह आएं? न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि धोखाधड़ी, ठगी और साजिश का हर अपराध अलग और स्वतंत्र मामला है। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को क्यों परेशान होना चाहिए।