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Supreme Court: 'देश में भगदड़ की रोकथाम पर अदालत नहीं जारी करेगी व्यापक निर्देश'; सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Thu, 22 Jan 2026 12:49 PM IST
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सार

उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर निर्देश देने से मना कर दिया। इस याचिका में सार्वजनिक आयोजनों में भगदड़ के रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। 

SC refuses to issue omnibus directions on stampede prevention
भगदड़ के रोकने के लिए निर्देशों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मना किया - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका निर्देश जारी करने से इनकार निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक रैलियों और यात्राओं में भगदड़ के रोकने के लिए निर्देशों की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने याचिकाकर्ता को केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग के पास इस मामले को ले जाने को कहा। 

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यह याचिका तुम्बलम गूटी वेंकटेश द्वारा दायर की गई थी। इसमें उच्चतम न्यायालय से मांग की गई थी कि केंद्र सरकार को सार्वजनिक समारोह में भीड़ नियंत्रण करने के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने और लागू करने के निर्देश दे। 
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बेंच ने कहा ने कहा आदर्श आचार सहिंता के दौरान देश भर में राजनीतिक रैलियों में एसओपी लागू करने के लिए भी इसी तरह के निर्देश मांगे गए हैं। याचिकाकर्ता ने रियल टाइम अपडेट के साथ राष्ट्रीय भीड़ प्रबंधन सुरक्षा कोड बनाने की भी मांग की है। इससे पहले भी याचिकाकार्ता इस तरह के मुद्दा उठा चुका है। आगे कहा गया कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी  राज्यों और केंद्र की होती है। 

सुनवाई के दौरान, बेंच ने ये भी पूछा कि क्या हम ऐसे निर्देश जारी कर सकते हैं? और भीड़ नियंत्रण के लिए अदालत द्वारा कोई दिशानिर्देश देना उचित है।

सवाल का जवाब देते हुए, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शीर्ष अदालत ने पहले भी नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप किया था जहां कमजोर लोगों की जान जोखिम में थी। उन्होंने एक पिछली जनहित याचिका का हवाला दिया, जहां अदालत ने एसओपी बनाने का निर्देश दिया था। 

इस परमुख्य न्यायाधीश ने पूछा, “मान लीजिए कुछ लोग अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं और दिल्ली में धरना देना चाहते हैं। हम इसे रेगुलेट कर सकते हैं ताकि किसी को कोई दिक्कत न हो, और साथ ही बोलने की आज़ादी की भी रक्षा हो। लेकिन यह कहना कि रैली चेन्नई में होनी है, मैदान में 10,000 लोग आ सकते हैं लेकिन 50,000 लोग आ जाते हैं, तो हम क्या करेंगे?”

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