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Viral Video : 'शवयात्रा में चार कंधे नहीं मिले' के वीडियो की हकीकत निकली कुछ और; वायरल करने वाला गायब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गिरिडीह/रांची/पटना Published by: झारखंड ब्यूरो Updated Thu, 22 Jan 2026 01:49 PM IST
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सार

Socical Media Viral Video : सोशल मीडिया और मुख्य धारा की मीडिया का अंतर समझना है तो यह खबर पढ़ें। 'शवयात्रा में चार कंधे नहीं मिले'... यह वीडियो कई दिनों से वायरल था। बिहार के सारण का बताकर। लेकिन, हकीकत पूरी तरह उलटी निकली।

Jharkhand Giridih Shocking Viral Video Woman Body Carried on Bamboo News Updates in Hindi
मृत महिला के मकान में फिलहाल कोई नहीं। उसके घर की जानकारी देते जन-प्रतिनिधि। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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करीब एक सप्ताह से एक वीडियो वायरल है। उसमें दो लोग एक शव को चचरी पर उठा रहे हैं और वह गिर जा रहा है। शव महिला का था। कहा गया कि यह वीडियो बिहार के छपरा का है। 'अमर उजाला' ने पहले सारण जिला और फिर भाषा को समझते हुए बिहार के छह जिलों- भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, पूर्णिया में खोजा। भाषा विशेषज्ञ को भी वीडियो भेजा। इतनी मेहनत इसलिए, ताकि सच्चाई सामने ला सकें कि समाज की गलती है या नहीं और अगर यह वास्तविक वीडियो है तो परिजनों तक मदद पहुंचे। भाषा विशेषज्ञों से लीड मिला कि इसमें मुंगेर-बांका की ग्रामीण भाषा तो है, लेकिन झारखंड का भी प्रभाव है। फिर झारखंड में भी बिहार से सटे देवघर, दुमका, गिरिडीह तक पड़ताल की गई। और, आखिरकार सच सामने ला रहे हैं।

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गिरीडीह जिले के सुदूर गांव का है वीडियो
बिहार और झारखंड के 10 जिलों में करीब 100 अफसरों के नंबरों पर कॉल कर पूछा। दर्जनों जन-प्रतिनिधियों से पूछताछ की। अंत में जाकर यह वीडियो निकला झारखंड के गिरीडीह के एक सुदूर गांव का। उग्रवाद प्रभावित गिरिडीह जिले के देवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत दुलोरी गांव का यह वीडियो है, जिसे बिहार के सारण का बताकर वायरल किया गया था। समाज को असंवेदनशील करार देते वायरल किए गए वीडियो की हकीकत यह है कि सोशल मीडिया पर व्यूज़ बटोरने के लिए असंवेदनशील होकर एक मृत महिला के अंतिम संस्कार का मजाक बना दिया गया।
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दिखाया गया कि चचरी पर रखे शव को उठाने के लिए सिर्फ दो ही लोग थे, जबकि हकीकत यह है कि इस महिला के शव के दाह-संस्कार में भी तीन दर्जन से ज्यादा लोग थे। उनमें से कुछ लोगों ने बताया कि किसी युवक ने बाइक रोक कर यह वीडियो बनवाया और कहा कि ऐसा करेंगे तो सरकारी सहायता मिलेगी। शव को चार पुरुष और तीन महिलाएं तो मायके से लेकर ही आए थे, लेकिन इस तरह वीडियो बनाने से यह वायरल हो गया। वीडियो वायरल हो गया तो खोजबीन के डर से वह युवक भी गायब हो गया। उसके बाद से वह नहीं दिखा है। यह रविदास टोले की घटना है, जहां दो दर्जन से ज्यादा घर इसी जाति-वर्ग से हैं। 

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बिहार के छपरा का बताकर वीडियो किया गया था वायरल। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

वीडियो बनाया नहीं, फिल्माया गया... देखें क्या हुआ
मृतक महिला दुलोरी गांव निवासी स्वर्गीय बिनोद दास की पत्नी पिंकी देवी थीं। इसी 10 जनवरी को लंबी बीमारी के बाद पिंकी देवी का निधन हो गया था। पिंकी देवी अपने माता-पिता के साथ गिरिडीह जिले के दराईसरन गांव में रह रही थीं। निधन के पश्चात उनके भाई परिजनों के साथ अंतिम दर्शन के लिए शव को उनकी ससुराल दुलोरी गांव लेकर आए थे। ग्रामीणों की सहभागिता से उनका अंतिम संस्कार किया गया। ससुराल से निकलते समय यह वीडियो बनाया गया। या, यह कहें कि फिल्माया गया। इसमें मृतक और परिजन सही थे, लेकिन बाकी बातें काल्पनिक थीं कि शव उठाने तक के लिए कोई नहीं।

अंतिम संस्कार से पूर्व घर के बाहर बांस से बनी चचरी पर रखे शव को केवल दो व्यक्तियों द्वारा कंधा देते हुए दिखाया गया, जबकि चेचरी के चारों ओर रस्सी बांधकर एक बांस फंसाया गया था। वीडियो में शव के नीचे गिरने का दृश्य भी कैद है, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर समाज के खिलाफ टिप्पणियां आ रही थीं। अब जब 'अमर उजाला' ने मौके पर जांच शुरू हुई तो ग्रामीण इस विषय में कुछ भी कहने से बचते नजर आए। कांग्रेस के दुलोरी प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुमार राय एवं पंचायत अध्यक्ष बच्चू राय ने बताया कि गांव में लगभग 20 से 25 रविदास परिवार रहते हैं। पिंकी देवी के अंतिम संस्कार में 50 से 60 लोग उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में वास्तविक घटनाक्रम को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। 



पति के बाद पत्नी का निधन, दोनों बच्चे मानसिक बीमार
वीडियो बनाने वाले ने सरकारी सहायता की बात कही थी। वीडियो बनाने का ढंग जरूर गलत था, लेकिन मौके पर गांव वालों ने बताया कि वास्तव में परिवार को मदद की जरूरत है। पहले पिता और मां को खोने वाले दोनों बच्चे मानसिक रूप से बीमार हैं। 13 और 11 साल के बच्चे मामा के घर में ही रहते हैं। अंतिम संस्कार के बाद सभी लोग वापस लौट भी चुके हैं। उस मकान में कोई नहीं है। इस स्थल तक पहुंचने में मदद करने वाले मनोज कुमार राय एवं बच्चू राय ने वीडियो को गलत तरीके से भले बनाया गया, लेकिन यह मामला सामने आया है कि दोनों बच्चे मानसिक बीमार हैं। बच्चों को सरकार की ओर से सहायता दिलाने के लिए प्रयास करेंगे। 

"घटना दुखद है। आपने संज्ञान में लाया है तो इस बारे में अधिकारियों को भेजकर जांच भी कराई जा रही है। गिरिडीह जिला प्रशासन मृतका के दोनों बच्चों के पुनर्वास, इलाज एवं संरक्षण सुनिश्चित करेगा। साथ ही, वीडियो वायरल करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

रामनिवास यादव, उपायुक्त, गिरिडीह, झारखंड

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