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Jharkahnd: चाईबासा सदर अस्पताल की लापरवाही ने छिनी खुशियां, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से दंपती और नवजात HIV संक्रमित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झारखंड Published by: राँची ब्यूरो Updated Wed, 21 Jan 2026 11:02 PM IST
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सार

Jharkahnd: चाईबासा सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के आरोप से एक महिला, उसका पति और नवजात बच्चा एचआईवी संक्रमित हो गए। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं और रांची से एक विशेष टीम चाईबासा पहुंचकर अस्पताल व ब्लड बैंक से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। 
 

Negligence at Chaibasa Sadar Hospital couple and newborn infected with HIV due to blood transfusion Jharkhand
एचआईवी संक्रमित रक्त - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। कुछ दिन पहले चाईबासा सदर अस्पताल में तीन बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला सामने आया था। अब इसी क्रम में एक और चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है, जहां प्रसव के दौरान एक महिला को संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार का दावा है कि इसी लापरवाही के कारण महिला, उसका पति और नवजात बच्चा एचआईवी संक्रमित हो गए।
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जनवरी 2023 में महिला को चढ़ाया गया था संक्रमित रक्त 
पीड़ित परिवार के अनुसार, जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी चाईबासा सदर अस्पताल में ऑपरेशन के माध्यम से हुई थी। प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर अस्पताल के ब्लड बैंक से महिला को रक्त चढ़ाया गया। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान महिला को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया, जिससे वह संक्रमित हो गई।
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नवजात की हालत गंभीर 
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब महिला जून 2025 में दूसरी बार गर्भवती हुई। नियमित जांच के दौरान वह एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद पति की जांच कराई गई, जिसमें वह भी संक्रमित निकला। वहीं, 2 जनवरी को महिला ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया, लेकिन नवजात की हालत गंभीर बनी रही। जांच कराने पर नवजात भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरा परिवार सदमे में है।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेश 
मामला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। रांची से स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम चाईबासा पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। टीम अस्पताल और ब्लड बैंक से संबंधित दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल कर रही है। चाईबासा के सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर ब्लड बैंक को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को अस्पताल बुलाया गया है, जहां उनकी रिपोर्ट और पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी।

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पीड़ित परिवार मांग रहा न्याय  
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों और ब्लड बैंकों की विश्वसनीयता को लेकर आम लोगों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी ब्लड बैंक भी सुरक्षित नहीं हैं, तो मरीज आखिर भरोसा किस पर करें।
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