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सलबोनी भूमि कब्जा: अभिषेक बनर्जी के करीबी सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया निर्देश?
Thu, 06 Aug 2026 01:37 PM IST
Pavan
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:37 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुमित रॉय को राहत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह कथित अपराध कई वर्ष पहले हुआ था, लेकिन उस समय की सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने अदालत से कहा कि मामले की सही जांच के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय को सलबोनी भूमि कब्जा मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सुमित रॉय को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत
इससे पहले 3 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला सलबोनी पुलिस द्वारा कथित सरकारी जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच से जुड़ा है। सुमित रॉय के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
यह भी पढ़ें- 'मैं 62 साल का हूं': तरुण तेजपाल ने कोर्ट से मांगी नरमी, कहा- खुद को पीड़ित मानता हूं; सरकार ने क्या रखी मांग?
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने आदेश दिया कि सुमित रॉय जांच में पूरा सहयोग करेंगे। पूछताछ के दौरान उनके साथ कोई वकील या अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं रहेगा। उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (सामान्य विश्राम के समय को छोड़कर) जांच के लिए उपलब्ध रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
सुमित रॉय की ओर से क्या दलील दी गई?
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को कथित 'नौकरी के बदले नकद' मामले में पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा भूमि कब्जा मामले में एफआईआर नई सरकार के सत्ता में आने के बाद दर्ज की गई।
पश्चिम बंगाल सरकार ने किया विरोध
तुषार मेहता ने यह भी दावा किया कि पहले जब कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से उसमें बाधा डाली गई थी। उन्होंने इस संबंध में हलफनामे के जरिए संबंधित सामग्री रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति भी मांगी।
यह भी पढ़ें- लखीमपुर खीरी हिंसा केस: आरोपी आशीष मिश्रा को फिलहाल राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने से किया इनकार
फिलहाल क्या स्थिति है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुमित रॉय को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित होकर हर तरह का सहयोग करना होगा। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत जांच की प्रगति और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
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हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत
इससे पहले 3 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला सलबोनी पुलिस द्वारा कथित सरकारी जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच से जुड़ा है। सुमित रॉय के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने आदेश दिया कि सुमित रॉय जांच में पूरा सहयोग करेंगे। पूछताछ के दौरान उनके साथ कोई वकील या अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं रहेगा। उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (सामान्य विश्राम के समय को छोड़कर) जांच के लिए उपलब्ध रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
सुमित रॉय की ओर से क्या दलील दी गई?
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को कथित 'नौकरी के बदले नकद' मामले में पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा भूमि कब्जा मामले में एफआईआर नई सरकार के सत्ता में आने के बाद दर्ज की गई।
पश्चिम बंगाल सरकार ने किया विरोध
तुषार मेहता ने यह भी दावा किया कि पहले जब कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से उसमें बाधा डाली गई थी। उन्होंने इस संबंध में हलफनामे के जरिए संबंधित सामग्री रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति भी मांगी।
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फिलहाल क्या स्थिति है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुमित रॉय को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित होकर हर तरह का सहयोग करना होगा। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत जांच की प्रगति और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।