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SC: पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच करेगी उच्च स्तरीय समिति; कौन होंगे शामिल, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Tue, 18 Aug 2026 02:23 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 18 Aug 2026 02:23 PM IST
सार
SC: दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की बात कही है। अधिकारी इस समिति को वीडियो फुटेज सौंपेंगे। समिति में कौन-कौन शामिल होंगे? पढ़िए रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाएगा। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज को उच्च स्तरीय समिति को सौंपने का निर्देश दिया जाएगा। यह समिति इन वीडियो की जांच करेगी।
ये भी पढ़ें: पेपर लीक के आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की मांग, शीर्ष अदालत ने केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह उच्च स्तरीय समिति 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने के आरोपों की भी जांच करेगी।
कल आदेश जारी कर सकता है कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की पीठ बुधवार को आदेश जारी करेगी। इससे पहले पीठ मामले में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के नाम को लेकर सभी पक्षों का सुझाव लेगी। पीठ ने यह भी कहा कि वह अधिकारियों को दिल्ली में 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग समिति को सौंपने का निर्देश देगी। समिति इन रिकॉर्डिंग की जांच करेगी।
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समिति में कौन-कौन होगा?
छात्रों के प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच करने वाली समिति में पूर्व जज, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक और किसी राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शामिल होंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज उन एफआईआर की जानकारी देने को कहा, जिन्हें रद्द किया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है। छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले रद्द करने का विरोध कर रहे एक वकील से पीठ ने कहा, यह छात्रों का जीवन है, जो दांव पर लगा है। हमें इस पर विचार करना होगा। आगे उनका भविष्य है। उन्हें अनुच्छेद 19 के तहत विरोध करने का अधिकार है।
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सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह उच्च स्तरीय समिति 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने के आरोपों की भी जांच करेगी।
कल आदेश जारी कर सकता है कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की पीठ बुधवार को आदेश जारी करेगी। इससे पहले पीठ मामले में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के नाम को लेकर सभी पक्षों का सुझाव लेगी। पीठ ने यह भी कहा कि वह अधिकारियों को दिल्ली में 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग समिति को सौंपने का निर्देश देगी। समिति इन रिकॉर्डिंग की जांच करेगी।
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समिति में कौन-कौन होगा?
छात्रों के प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच करने वाली समिति में पूर्व जज, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक और किसी राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शामिल होंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज उन एफआईआर की जानकारी देने को कहा, जिन्हें रद्द किया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है। छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले रद्द करने का विरोध कर रहे एक वकील से पीठ ने कहा, यह छात्रों का जीवन है, जो दांव पर लगा है। हमें इस पर विचार करना होगा। आगे उनका भविष्य है। उन्हें अनुच्छेद 19 के तहत विरोध करने का अधिकार है।