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Babri Masjid: हैदराबाद में बनेगी बाबरी मस्जिद स्मारक, तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष बोले- औपचारिक घोषणा जल्द
Sat, 06 Dec 2025 11:58 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: लव गौर
Updated Sat, 06 Dec 2025 11:58 PM IST
सार
Hyderabad Babri Masjid: हैदराबाद में बाबरी मस्जिद स्मारक निर्माण की घोषणा पर तहरीक मुस्लिम शब्बन के अध्यक्ष मौलाना मुस्ताक मलिक ने कहा कि जब आधारशिला रखी जाएगी, तो सभी धर्मों के लोग मौजूद रहेंगे। यह नफरत की जगह नहीं होगी। मस्जिद प्रेम की जगह है और सभी धर्मों के लोगों को वहां आमंत्रित किया जाएगा।
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तहरीक मुस्लिम शब्बन के अध्यक्ष मौलाना मुस्ताक मलिक
- फोटो : ANI-वीडियो ग्रैब
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विस्तार
बाबरी मस्जिद के विध्वंस की बरसी पर 'तहरीक मुस्लिम शब्बन' के अध्यक्ष मौलाना मुस्ताक मलिक ने कहा कि ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद का एक स्मारक बनाया जाएगा। शनिवार (06 दिसंबर) को उन्होंने बताया कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 33वीं बरसी मनाई गई और हैदराबाद की मस्जिद में एक नियमित जनसभा हुई। उस बैठक में हमने तय किया कि ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद का एक स्मारक बनाया जाएगा और उसके भीतर कुछ कल्याणकारी संस्थाएं भी बनाई जाएंगी। हम जल्द ही इसकी घोषणा करेंगे कि यह कैसे और कितने समय के लिए बनेगा।
रामायण में राम मंदिर के विध्वंस का कोई जिक्र नहीं- मुस्ताक मलिक
मुश्ताक मलिक ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबर का नाम राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जा रहा है, जबकि ऐतिहासिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर के कहने या उनके खर्च से हुआ हो। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति का नाम बाबर रहा हो, जिसे लेकर बाद में भ्रम खड़ा किया गया।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि बाबर के नाम से किसी को परेशान नहीं होना चाहिए। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने के लिए बाबर की तरफ से कोई राजस्व आया हो। हो सकता है कि किसी स्थानीय व्यक्ति का नाम बाबर रखा गया हो, लेकिन भाजपा और आरएसएस बाबर को मुद्दा बनाना चाहते हैं। बाबर का शासनकाल बहुत छोटा था। अगर हम तुलसीदास की रामायण देखें, तो वह बाबरी मस्जिद के निर्माण के 60 साल बाद लिखी गई थी। उस रामायण में राम मंदिर के विध्वंस का कोई जिक्र नहीं है।
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उन्होंने दावा किया कि तुलसीदास की रामायण बाबरी मस्जिद के निर्माण के लगभग 60 साल बाद लिखी गई, लेकिन उसमें कहीं भी राम मंदिर तोड़े जाने का उल्लेख नहीं है। मुगल शासन के इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बाबर के बाद हुमायूं और फिर अकबर का शासन रहा, जहां धार्मिक सहिष्णुता के कई उदाहरण मिलते हैं।
ये भी पढ़ें: West Bengal: बंगाल में रखी गई नई बाबरी मस्जिद की नींव, MLA हुमांयू कबीर बोले- अब इस्लामिक अस्पताल-होटल भी...
'यह देश को बांटने का राजनीतिक दुष्प्रचार'
मौलाना मुस्ताक मलिक ने कहा कि बाबर के बाद हुमायूं का शासन आया और उसके बाद अकबर का। अकबर के शासनकाल में महल में रस्में और नमाजें होती थीं। जोधाबाई अकबर के महल में थीं। वहां अनुष्ठान, प्रार्थनाएं और हवन होते थे... उस समय तुलसीदास भी जीवित थे। अकबर के काल में, तुलसीदास अकबर से बात कर सकते थे। मान सिंह उस समय सेनापति थे। वे उनसे पूछ सकते थे... ऐसी बात तुलसीदास की रामायण में नहीं आती। इसलिए, यह देश को बांटने का राजनीतिक दुष्प्रचार है। इससे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और दलितों के बीच जो भाईचारा था, वह बिखर गया है और नफरत के बीज बोए गए हैं।
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रामायण में राम मंदिर के विध्वंस का कोई जिक्र नहीं- मुस्ताक मलिक
मुश्ताक मलिक ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबर का नाम राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जा रहा है, जबकि ऐतिहासिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर के कहने या उनके खर्च से हुआ हो। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति का नाम बाबर रहा हो, जिसे लेकर बाद में भ्रम खड़ा किया गया।
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उन्होंने अपने बयान में कहा कि बाबर के नाम से किसी को परेशान नहीं होना चाहिए। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने के लिए बाबर की तरफ से कोई राजस्व आया हो। हो सकता है कि किसी स्थानीय व्यक्ति का नाम बाबर रखा गया हो, लेकिन भाजपा और आरएसएस बाबर को मुद्दा बनाना चाहते हैं। बाबर का शासनकाल बहुत छोटा था। अगर हम तुलसीदास की रामायण देखें, तो वह बाबरी मस्जिद के निर्माण के 60 साल बाद लिखी गई थी। उस रामायण में राम मंदिर के विध्वंस का कोई जिक्र नहीं है।
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#WATCH | Hyderabad, Telangana | On announcement of Babri Masjid in Hyderabad, President Tahreek Muslim Shabban Mushtaq Malik says, "The 33rd anniversary of the demolition of the Babri Masjid was celebrated, and a routine public meeting was held at the mosque in Hyderabad. At that… pic.twitter.com/EwzgWdSc5w
— ANI (@ANI) December 6, 2025
उन्होंने दावा किया कि तुलसीदास की रामायण बाबरी मस्जिद के निर्माण के लगभग 60 साल बाद लिखी गई, लेकिन उसमें कहीं भी राम मंदिर तोड़े जाने का उल्लेख नहीं है। मुगल शासन के इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बाबर के बाद हुमायूं और फिर अकबर का शासन रहा, जहां धार्मिक सहिष्णुता के कई उदाहरण मिलते हैं।
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'यह देश को बांटने का राजनीतिक दुष्प्रचार'
मौलाना मुस्ताक मलिक ने कहा कि बाबर के बाद हुमायूं का शासन आया और उसके बाद अकबर का। अकबर के शासनकाल में महल में रस्में और नमाजें होती थीं। जोधाबाई अकबर के महल में थीं। वहां अनुष्ठान, प्रार्थनाएं और हवन होते थे... उस समय तुलसीदास भी जीवित थे। अकबर के काल में, तुलसीदास अकबर से बात कर सकते थे। मान सिंह उस समय सेनापति थे। वे उनसे पूछ सकते थे... ऐसी बात तुलसीदास की रामायण में नहीं आती। इसलिए, यह देश को बांटने का राजनीतिक दुष्प्रचार है। इससे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और दलितों के बीच जो भाईचारा था, वह बिखर गया है और नफरत के बीज बोए गए हैं।