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Politics: 'चीन चिंता का विषय, चर्चा से क्यों डरती है सरकार?', राहुल की टिप्पणी पर क्या बोले विपक्षी सांसद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 02 Feb 2026 06:54 PM IST
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shashi tharoor, akhilesh yadav and other opposition mps on Rahul Gandhi's statement inside Parliament
शशि थरूर, अखिलेश यादव - फोटो : एएनआई
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लोकसभा में सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद विभिन्न दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। यादव ने कहा कि अगर कोई हम मुद्दा है तो उसे सदन में उठाया जाना चाहिए। वहीं, थरूर ने कहा कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया आई है। 
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने कहा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी अहम मुद्दे उठाना चाहते थे और जब बात सीमा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन सीमा के मुद्दे की आती है, तो यह और भी अहम हो जाता है। सांसदों ने समय-समय पर सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है कि हमें पाकिस्तान की तुलना में चीन को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि चीन की नजरें घात लगातार हमारी सीमा पर टिकी हैं और हमने इसे कई बार देखा है। 
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उन्होंने आगे कहा, भारत की जमीन का एक अहम हिस्सा चीन के पास चला गया है। इसलिए एक अहम सवाल बन जाता है- क्या विपक्ष के नेता सीमा सुरक्षा या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठा रहे थे? आंकड़ों से पता चलता है कि शायद चीन के साथ जितना व्यापार होता है, उतना किसी अन्य देश के साथ नहीं होता। इसलिए एक ओर हमारी सीमा चीन के साथ व्यापक रूप से जुड़ी हुई है, जिससे सीमा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और हमारा बाजार तीनों ही बेहद अहम हो जाते हैं। अगर हम अतीत पर नजर डालें, तो हमारे भारत का एक बड़ा हिस्सा हमसे छिन गया है।

यादव ने कहा, अगर कोई अहम मुद्दा है, तो उसे सदन में उठाया जाएगा और उठाया जाना चाहिए। हमें अहम सवालों को उठाने के लिए ही चुना गया है। शायद यह बात नई लोकसभा की दीवारों पर नहीं लिखी है। लेकिन अगर आप पुरानी लोकसभा की दीवाओं पर ऊपर दाएं और बाएं देखें तो यह लिखा है कि हमें बोलना चाहिए, हमें अपने विचार व्यक्त करने चाहिए। 

थरूर ने पूछा- चर्चा से क्यों डरती है सरकार?
वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, हमारी सरकार ऐसी क्यों है, जो चर्चा से डरती है? यह वाकई दुखद है। मुझे लगता है कि सरकार को इस तरह प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी। उन्हें चर्चा को बढ़ावा देना चाहिए था, स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, चीजों को स्पष्ट करना चाहिए था। चीन का मुद्दा पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। चीन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री..सभी को बोलने दें और जनता को बताएं कि क्या हो रहा है। ऐसी स्थिति न बनने दें, जहां हर बात को दबा दिया जाए। यह हमारे लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। यह संसद के कामकामज के लिए भी ठीक नहीं है। 

उन्होंने कहा, (देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल) नेहरू जी के शासनकाल में कांग्रेस का सबसे अहम काम संसद में बहस कराना था। 1962 में नवंबर तक चीन के साथ युद्ध हर दिन चल रहा था और संसद में बिना किसी व्हिप के बहस होती थी। सांसद भी सरकार और प्रधानमंत्री नेहरू की आलोचना करने में सक्षम थे। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भी हमारी संसद में संसदीय सत्र चलते रहे। संसद को जानकारी दी जाती थी। राष्ट्र को विश्वास में लिया जाता था। 

उन्होंने कहा, उन्हें अपनी चिंता को व्यक्त करने का मौका नहीं मिला। लेख में सेना या सैनिकों को बिल्कुल भी दोषी नहीं ठहराया गया है। यह मुद्दा केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसलों या न लिए गए फैसलों से जुड़ा है और स्पष्ट रूप से राहुल गांधी का यही मकसद था। मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि मुझे लगता हैकि सरकार को इतनी प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं थी। 

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कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, मुझे लगता है कि सरकार की ओर से जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया आई। राहुल गांधी जिस मुद्दे को उठाना चाहते थे, उसकी जानकारी पहले से सार्वजनिक रूप से मौजूद है।  वह एक पत्रिका में प्रकाशित लेख का हवाला दे रहे थे, जिसमें जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र है। इसलिए सरकार को किताब के प्रकाशित होने से पहले टिप्पणी करने पर आपत्ति जताने से पहले उन्हें बोलने देना चाहिए था, क्योंकि पत्रिका तो वैसे भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। कोई भी वह लेख पढ़ सकता है, जो राहुल गांधी ने पढ़ा है। मुझे लगता है कि सरकार की जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया ने आज दोपहर सदन को अनावश्यक रूप से ठप्प कर दिया। मेरे विचार से संसद के लिए यह बेहतर होता कि वह चर्चा को आगे बढ़ने देती, क्योंकि संसद का यही उद्देश्य है। अगर तथ्य गलत हैं, तो सबसे अच्छा समाधान तथ्यों को सही करना है, न कि उन्हें सामने आने से रोकना। 


 
 
 
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