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पश्चिम एशिया तनाव: US-ईरान जंग नहीं रुकी तो बुझ जाएंगे कई घरों के चूल्हे; भारत के रूख पर क्या बोले शशि थरूर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोल्लम Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 26 Mar 2026 02:01 PM IST
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सार

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के संकट पर चिंता जताई है। थरूर ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के आम आदमी की रसोई और जेब पर सीधा हमला करेगा। उन्होंने एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल की बात कही है।
 

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कांग्रेस नेता शशि थरूर - फोटो : PTI
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने अब भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने देश को आने वाले आर्थिक झटकों के प्रति आगाह किया है। थरूर का कहना है कि यह युद्ध सिर्फ मिसाइलों और बमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत के आम नागरिक के जीवन स्तर पर पड़ने वाला है।
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रसोई गैस पर सीधा प्रहार
शशि थरूर ने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 फीसदी लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात करता है। सबसे डराने वाली बात यह है इसका 90 फीसदी हिस्सा कतर और खाड़ी देशों से आता है। थरूर ने कहा, "आज जो युद्ध के हालात बने हैं, उससे आपकी रसोई के सिलेंडर, रेस्टोरेंट और ढाबों में गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई है। अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में एलपीजी की सप्लाई ठप हो सकती है।"
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हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो जाएगी-थरूर
थरूर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की तारीफ की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह तूफान से पहले की शांति जैसा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इसका सीधा असर भारत के ट्रांसपोर्टेशन और रसद पर पड़ेगा। इसके बाद हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो जाएगी।

थरूर ने दावा किया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के जरिए शांति वार्ता की खबर आ रही है। लेकिन, दूसरी तरफ हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने कहा, "ईरान की भाषा शांति का संकेत नहीं दे रही है।"

भारत की भूमिका पर सवाल
शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

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