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चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग तैयारी: ममता को मिला कांग्रेस-सपा का साथ; विपक्ष लेगा मिलकर फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Wed, 04 Feb 2026 06:39 PM IST
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सार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विपक्ष एकजुट हो रहा है। ममता बनर्जी की मांग को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला है। कांग्रेस ने कहा है कि इस पर पूरा विपक्ष मिलकर फैसला करेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्ष का महाभियोग वाला दांव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
SIR Row in Bengal: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की थी। अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दल भी उनके समर्थन में आते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने कहा है कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष मिलकर फैसला लेगा।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर सामूहिक रूप से फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की ओर से उठाया गया यह एक बहुत ही प्रासंगिक मुद्दा है। हम इस पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इस बारे में कांग्रेस से संपर्क किया है।
अखिलेश यादव ने किया समर्थन
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी बीजेपी के काले कारनामों के खिलाफ लड़ रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों को आगे आना चाहिए। अपना वोट खोना अपना अधिकार खोना है। धीरे-धीरे सब कुछ खत्म हो जाएगा। आपकी नागरिकता पर सवाल उठाया जाएगा। हम ममता बनर्जी के साथ हैं।' हालांकि, जब इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।'
शिवसेना ने भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव आयोग को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। ममता जी यह लड़ाई लड़ रही हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में उन लोगों के वोट हटाए गए हैं जो पारंपरिक रूप से उनकी पार्टी को वोट देते हैं। प्रियंका ने कहा कि ममता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई हैं, जिसका हम स्वागत करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का संज्ञान लेगा ताकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनी रहे।
यह भी पढ़ें: SC में बोलीं ममता: 'व्हाट्सएप आयोग जैसा है चुनाव आयोग, सिर्फ नाम काटने के लिए हो रहा SIR, निशाने पर बंगाल'
क्यों उठी महाभियोग की मांग?
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार के विशेष अभियान से जुड़ा है। ममता बनर्जी इसका लगातार विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसी मुद्दे पर CEC ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। ममता बनर्जी का आरोप है कि बैठक के दौरान CEC का रवैया ठीक नहीं था। उन्होंने CEC को अभिमानी बताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया था। इसके बाद उन्होंने CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की और दूसरे विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा।
यह भी पढ़ें: SIR Row: ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले एसआईआर कराने पर उठाए सवाल, बोलीं- असम को क्यों छोड़ा गया?
क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए "साबित दुर्व्यवहार" या "अक्षमता" को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर सामूहिक रूप से फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की ओर से उठाया गया यह एक बहुत ही प्रासंगिक मुद्दा है। हम इस पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इस बारे में कांग्रेस से संपर्क किया है।
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अखिलेश यादव ने किया समर्थन
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी बीजेपी के काले कारनामों के खिलाफ लड़ रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों को आगे आना चाहिए। अपना वोट खोना अपना अधिकार खोना है। धीरे-धीरे सब कुछ खत्म हो जाएगा। आपकी नागरिकता पर सवाल उठाया जाएगा। हम ममता बनर्जी के साथ हैं।' हालांकि, जब इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।'
शिवसेना ने भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव आयोग को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। ममता जी यह लड़ाई लड़ रही हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में उन लोगों के वोट हटाए गए हैं जो पारंपरिक रूप से उनकी पार्टी को वोट देते हैं। प्रियंका ने कहा कि ममता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई हैं, जिसका हम स्वागत करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का संज्ञान लेगा ताकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनी रहे।
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क्यों उठी महाभियोग की मांग?
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार के विशेष अभियान से जुड़ा है। ममता बनर्जी इसका लगातार विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसी मुद्दे पर CEC ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। ममता बनर्जी का आरोप है कि बैठक के दौरान CEC का रवैया ठीक नहीं था। उन्होंने CEC को अभिमानी बताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया था। इसके बाद उन्होंने CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की और दूसरे विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा।
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क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए "साबित दुर्व्यवहार" या "अक्षमता" को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
