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Iran Crisis: सोनिया गांधी बोलीं- खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, जिम्मेदारी से पीछे हटना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 03 Mar 2026 08:24 AM IST
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सार

कांग्रेस ने ईरानी धरती पर बमबारी और लक्षित हत्याओं की स्पष्ट निंदा की है और इन्हें क्षेत्रीय व वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक बताया है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से संप्रभु समानता, अहस्तक्षेप और शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही है। मौजूदा चुप्पी इन सिद्धांतों से असंगत दिखती है।

Sonia Gandhi on West Asia Crisis Modi government silence on Khamenei assassination not neutral but abdication
सोनिया गांधी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की लक्षित हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी को लेकर तीखी आलोचना की है। सोनिया गांधी ने कहा कि यह मौन तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
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एक अखबार में लिखे अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हुई। उन्होंने इसे चल रही वार्ताओं के बीच किसी सत्तारूढ़ राष्ट्राध्यक्ष की हत्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर विघटन करार दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की।
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पीएम मोदी पर साधा निशाना
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में अमेरिका-इस्राइल के हमलों का जिक्र किए बिना केवल ईरान की यूएई पर जवाबी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आगे कहा कि पीएम ने बाद में गहरी चिंता और संवाद-कूटनीति की सामान्य बात कही, जबकि हमलों से पहले यही प्रक्रिया जारी थी।

उन्होंने कहा कि बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) की भावना के विपरीत है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर ऐसे कृत्यों पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से सिद्धांत आधारित आपत्ति दर्ज नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों का क्षरण सामान्य होता जाएगा।

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भारत की विदेश नीति क्या बोलीं सोनिया गांधी?
उन्होंने यह भी कहा कि हत्या से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इस्राइल दौरे से लौटे थे, जहां उन्होंने पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया था। गांधी के अनुसार, वैश्विक दक्षिण के कई देशों और ब्रिक्स साझेदारों द्वारा दूरी बनाए रखने के बीच भारत का यह रुख चिंताजनक है और इससे गलत संकेत जाते हैं।

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