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पुराने हथियारों से की सर्जिकल स्ट्राइक, सेना के पास आधुनिक हथियारों की भारी कमी

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 11 Oct 2016 10:47 AM IST
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Special Forces wait for new weapons, 15 months after green signal
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सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना ने एलओसी पार जाकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। लेकिन इसी संबंध में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, सीमापार जाकर इस खतरनाक आपरेशन को अंजाम देने वाली स्पेशल फोर्स नए और अत्याधुनिक हथियारों की कमी से जूझ रही है। खबरों की मानें तो सेना ने 30 साल पुराने हथियारों से सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था।

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हालांकि जून 2015 में रक्षा मंत्री मनोहर प‌रिकर ने नए हथियार की खरीद के संबंध में निर्देश दिए थे लेकिन, अभी तक स्पेशल फोर्स को नए हथियारों की आपूर्ति नहीं हुई है। आपको बता दें कि प‌रिकर ने हथियारों के आधुनिकीकरण को फास्‍ट ट्रेक करने का निर्देश दे रखा है इसके बावजूद भी हथियार खरीद में लेटलतीफी जारी है।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पिछले साल जून में म्‍यांमार में 21 स्‍पेशल फोर्सेज बटालियन के सीमारेखा पारकर ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद सेना ने रक्षामंत्री प‌रिकर के सामने आधुनिकीकरण का प्रस्‍ताव रखा था। आपको बता दें कि म्‍यांमार में सेना ने मणिपुर में 18 जवानों के शहीद होने के बाद संदिग्‍ध एनएससीएन-के के ठिकानों पर हमला कर जवानों की शहादत का बदला लिया था। 

और सर्जिकल स्ट्राइक करने हैं, तो चाहिए नए हथियार

Special Forces wait for new weapons, 15 months after green signal

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सेना के एक अफसर ने बताया कि म्‍यांमार जैसा ऑपरेशन आगे भी करने के ‌लिए स्‍पेशल फोर्सेज की जरूरत के कुछ हथियारों को फौरन खरीदने का विचार था। यदि इस प्‍लान पर काम किया गया होता तो सर्जिकल स्‍ट्राइक करने वाले 4 एसएफ और 9 एसएफ के जवान ज्‍यादा आधुनिक और लाइटवेट रॉकेट लॉन्‍चर इस्‍तेमाल करते।

इसके बजाय उन्‍होंने इस ऑपरेशन में 30 साल पुराने कार्ल गुस्‍तोव 84 एमएम वर्जन से काम चलाना पड़ा। स्‍पेशल फोर्सेज के आधुनिकीकरण का प्रस्‍ताव विशेष बलों के प्रशिक्षण स्कूल, स्पेशल फोर्सेज बटालियन और स्टॉकहोल्डरों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद मिलिट्री ऑपरेशंस निदेशालय ने तैयार किया था।

इसके तहत 6 तरह के हथियार खरीदे जाने थे। जिसमें 1200 पर्सनल ऑटोमेटिक राइफल, 36 स्‍नाइपर राइफल, 36 ऑटोमैटिक जनरल पर्पज मशीन गन (जीपीएमजी), 24 लाइटवेट रॉकेट लॉन्‍चर, 24 शॉटगन और 500 पिस्‍तौल शामिल थीं। ये सभी हथियार दिन और रात दोनों में देखने की सुविधा से लैस होने थे।

12 हजार फ्री फाल पैराशूट चाहिए लेकिन 400 ही उपलब्ध

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एक अधिकारी ने बताया, "हमारी किसी एसएफ बटालियन के पास जीपीएमजी नहीं है। टेवर राइफल जो हमारे पास है वह 5.56 एमएम की है जबकि आतंक विरोधी ऑपरेशन में 7.62 एमएम वाला हथियार चाहिए। हमारे पास ट्रेनिंग के लिए एम्‍युनिशन भी सीमित होता है। साथ ही अंडर वाटर डाइविंग सामान और फ्री फाल पैराशूट की भी कमी है।

उदाहरण के लिए हमें 12 हजार फ्री फाल पैराशूट चाहिए लेकिन हैं केवल 400 ही और इनका भी समय पूरा होने वाला है। ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री इन्‍हें नहीं बना सकती इसलिए एक दर्जन पैराशूट सेना कमांडर के स्‍पेशल पावर्स फंड से खरीदे गए।”

अधिकारियों के मुताबिक, जून में नए रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) के लागू होने के बाद रक्षा मंत्रालय ने तय किया की वो इस प्रक्रिया (नए हथियार खरीद प्रक्रिया) को आगे बढ़ाएगी लेकिन, सेना की तरफ से इस प्रक्रिया को अभी तक शुरू नहीं किया गया। रक्षा मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, नए रक्षा खरीद के लिए सेना की तरफ से प्रपोजल मिलते ही इस प्रक्रिया को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। 

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