{"_id":"6ac895e2991307ded80d541e","slug":"starlink-license-india-elon-musk-jyotiraditya-scindia-monopoly-statement-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टारलिंक लाइसेंस विवाद: मस्क के आरोपों पर सिंधिया का जवाब, बोले- भारत में एकाधिकार नहीं; क्या है पूरा मामला?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
स्टारलिंक लाइसेंस विवाद: मस्क के आरोपों पर सिंधिया का जवाब, बोले- भारत में एकाधिकार नहीं; क्या है पूरा मामला?
Fri, 09 Oct 2026 12:51 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:51 PM IST
सार
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए जियो, वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस दिए गए हैं, जबकि अमेजन भी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में है। एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि कारोबारी हितों के कारण स्टारलिंक का लाइसेंस रोका जा रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी कंपनियों को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी।
विज्ञापन
ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर एलन मस्क के आरोपों पर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं होने देता। सिंधिया के मुताबिक, सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें रिलायंस जियो, वनवेब और एलन मस्क की स्टारलिंक शामिल हैं। इसके अलावा अमेजन भी इस क्षेत्र में उतरने के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में है।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए किन कंपनियों को मिला है लाइसेंस?
केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने बताया कि सरकार ने किसी एक कंपनी को चुनकर लाइसेंस नहीं दिया है। सैटेलाइट संचार सेवाएं देने की इच्छुक कंपनियों के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। फिलहाल तीन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं, जबकि अमेजन को लाइसेंस हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सिंधिया ने कहा कि सरकार सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए कीमतें तय करने की प्रक्रिया में है और इस पर अंतिम फैसला जल्द लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और दूरसंचार विभाग बातचीत कर रहे हैं। कंपनियों को सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा से जुड़ी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके बाद ही वे स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगी।
एलन मस्क ने भारत में लाइसेंस रोकने का आरोप क्यों लगाया?
एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि प्रभावशाली कारोबारी हितों के कारण उनकी कंपनी स्टारलिंक का लाइसेंस रोका जा रहा है। उनका कहना था कि कंपनी पांच साल से भारतीय नियमों और आवश्यकताओं का पालन करने में जुटी है, फिर भी उसे आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। इसके जवाब में संचार मंत्रालय पहले ही अनुचित व्यवहार के आरोपों को खारिज कर चुका है। मंत्रालय का कहना है कि लाइसेंस प्राप्त तीनों कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक ही चरण में हैं और सभी की सुरक्षा संबंधी जांच चल रही है।
यह भी पढ़ें: सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति: 'प्रक्रिया का नहीं हुआ पालन, देरी से दी गई सूचना', पुलिस ने बताए कारण
अब स्टारलिंक और दूसरी कंपनियों के सामने क्या चुनौती?
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को कीमतों से जुड़े अंतिम फैसले और सुरक्षा संबंधी शर्तों के पूरा होने का इंतजार है। प्रत्येक कंपनी की प्रगति और सुरक्षा नियमों के पालन की अलग-अलग जांच होगी। इसके बाद वे स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आगे बढ़ सकेंगी और व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की दिशा में कदम उठा सकेंगी। फिलहाल सरकार का जोर सभी कंपनियों के लिए तय प्रक्रिया और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर है।
पेम्मासानी ने मस्क के आरोपों पर दिया जवाब
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि सभी सैटेलाइट संचार कंपनियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। दूरसंचार विभाग सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस और प्रयोग के लिए अस्थायी स्पेक्ट्रम दे चुका है। अब कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरी का इंतजार है। पेम्मासानी ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक कंपनी से जुड़ा नहीं है।
विज्ञापन
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए किन कंपनियों को मिला है लाइसेंस?
केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने बताया कि सरकार ने किसी एक कंपनी को चुनकर लाइसेंस नहीं दिया है। सैटेलाइट संचार सेवाएं देने की इच्छुक कंपनियों के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। फिलहाल तीन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं, जबकि अमेजन को लाइसेंस हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विज्ञापन
- रिलायंस जियो: सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस प्राप्त तीन कंपनियों में शामिल है।
- वनवेब: इस कंपनी को भी सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस मिल चुका है।
- स्टारलिंक: एलन मस्क की कंपनी को भी लाइसेंस दिया गया है, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी।
- अमेजन: कंपनी इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए लाइसेंस लेना चाहती है। इसके लिए उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विज्ञापन
सिंधिया ने कहा कि सरकार सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए कीमतें तय करने की प्रक्रिया में है और इस पर अंतिम फैसला जल्द लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और दूरसंचार विभाग बातचीत कर रहे हैं। कंपनियों को सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा से जुड़ी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके बाद ही वे स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगी।
- स्पेक्ट्रम पर फैसला: सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी के बजाय प्रशासनिक तरीके से आवंटित किया जाएगा।
- कीमतों तय नहीं: ट्राई और दूरसंचार विभाग कीमतें तय करने पर काम कर रहे हैं। सिंधिया के अनुसार, इस पर अंतिम फैसला जल्द होने की उम्मीद है।
- सुरक्षा की शर्तें: सभी कंपनियों को सुरक्षा संबंधी नियमों और जरूरी शर्तों का अलग-अलग पालन करना होगा। इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही वे आगे बढ़ सकेंगी।
एलन मस्क ने भारत में लाइसेंस रोकने का आरोप क्यों लगाया?
एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि प्रभावशाली कारोबारी हितों के कारण उनकी कंपनी स्टारलिंक का लाइसेंस रोका जा रहा है। उनका कहना था कि कंपनी पांच साल से भारतीय नियमों और आवश्यकताओं का पालन करने में जुटी है, फिर भी उसे आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। इसके जवाब में संचार मंत्रालय पहले ही अनुचित व्यवहार के आरोपों को खारिज कर चुका है। मंत्रालय का कहना है कि लाइसेंस प्राप्त तीनों कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक ही चरण में हैं और सभी की सुरक्षा संबंधी जांच चल रही है।
यह भी पढ़ें: सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति: 'प्रक्रिया का नहीं हुआ पालन, देरी से दी गई सूचना', पुलिस ने बताए कारण
अब स्टारलिंक और दूसरी कंपनियों के सामने क्या चुनौती?
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को कीमतों से जुड़े अंतिम फैसले और सुरक्षा संबंधी शर्तों के पूरा होने का इंतजार है। प्रत्येक कंपनी की प्रगति और सुरक्षा नियमों के पालन की अलग-अलग जांच होगी। इसके बाद वे स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आगे बढ़ सकेंगी और व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की दिशा में कदम उठा सकेंगी। फिलहाल सरकार का जोर सभी कंपनियों के लिए तय प्रक्रिया और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर है।
पेम्मासानी ने मस्क के आरोपों पर दिया जवाब
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि सभी सैटेलाइट संचार कंपनियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। दूरसंचार विभाग सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस और प्रयोग के लिए अस्थायी स्पेक्ट्रम दे चुका है। अब कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरी का इंतजार है। पेम्मासानी ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक कंपनी से जुड़ा नहीं है।