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नए कानूनों की सफलता: बीएनएस के तहत दर्ज हुए 74 लाख केस, 63 हजार जीरो एफआईआर में से 13 हजार अंतरराज्यीय
Tue, 30 Jun 2026 04:05 PM IST
Asmita Tripathi
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला,
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला,
Published by: Asmita Tripathi
Updated Tue, 30 Jun 2026 04:05 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में डिजिटल प्रक्रिया के साथ समयबद्ध न्याय, इस सफल स्टोरी की राह पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 74.66 लाख एफआईआर दर्ज की गई हैं।
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एफआईआर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में डिजिटल प्रक्रिया के साथ समयबद्ध न्याय, इस सफल स्टोरी की राह पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 74.66 लाख एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहली जुलाई 2024 से लेकर 29 जून 2026 तक 59.98 लाख चार्जशीट दाखिल की गई हैं। उक्त अवधि में 63572 जीरो एफआईआर दर्ज की गई हैं। खास बात है कि बीएनएस लागू होने के बाद जीरो एफआईआर की संख्या काफी बढ़ गई है। 2024 में 12821 जीरो एफआईआर दर्ज हुई थीं। इनमें से 13 हजार एफआईआर अंतरराज्जीय हैं।
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भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जुलाई 2024 के लागू होने के बाद ई साक्ष्य के माध्यम से 46.50 लाख साक्ष्य आईडी निर्मित की गई हैं। डिजिटल प्रक्रिया में 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करने की अनुपालन दर 2026 में 67.26 प्रतिशत हो गई है। 2024 में यह दर 50.92 प्रतिशत थी। 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करने की अनुपालन दर 2026 में 60.95 प्रतिशत है, जबकि 2024 में यह दर 39.56 प्रतिशत रही है।
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यौन अपराधों में दो महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की अनुपालन दर 2018 में 44 प्रतिशत थी। वहीं 2025 में यह दर 75.16 प्रतिशत है। मौजूदा समय में 621 पुलिस स्टेशन सीसीटीएनएस के जुड़ गए हैं। यह सौ प्रतिशत सफलता है। एक जनवरी 2027 तक नए कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़ी पांचों संस्थाएं पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और कारागार, ये सभी सौ फीसदी एकीकृत डिजिटल प्रणाली के साथ काम करेंगी।
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नए कानूनों को त्वरित गति से लागू करने वाले टॉप 5 राज्यों में हरियाणा का पहला स्थान है। दूसरे नंबर पर गोवा, तीसरे पर असम, चौथे स्थान पर चंडीगढ़ और पांचवें नंबर पर पंजाब है। 36 राज्यों/यूटी में से 23 राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं, जो तय मापदंडों के औसत से ऊपर काम कर रहे हैं। तीन चार राज्य ऐसे हैं, जो अभी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ये राज्य भी अगले चार पांच महीने में निर्धारित मापदंडों को पार कर लेंगे।