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Supreme Court: 'न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से 61 वर्ष करने पर करें विचार', अदालत ने किससे कहा?
Wed, 22 Jul 2026 04:10 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 22 Jul 2026 04:10 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर संबंधित उच्च न्यायालयों से विचार-विमर्श करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था होगी और अंतिम निर्णय बाद में दिया जाएगा। जहां राज्य सरकार और उच्च न्यायालय दोनों सहमत होंगे, वहां यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2026 से लागू की जा सकेगी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर विचार करने को कहा। अदालत ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें देशभर के जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा, "सभी राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के उच्च न्यायालयों से परामर्श कर इस मुद्दे पर फैसला लें। अगर वे सहमत होते हैं तो ऐसे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह व्यवस्था इस मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।"
न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति बढ़ाने पर क्यों हो रहा विचार?
पीठ ने कहा कि यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2026 से लागू होगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था इस कानूनी प्रश्न पर अंतिम सुनवाई को प्रभावित नहीं करेगी कि क्या पूरे देश में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु एक समान 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए।
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अदालत ने कहा, "हम स्पष्ट करते हैं कि शुरुआत में तय किए गए कानूनी प्रश्न पर यह अदालत स्वतंत्र रूप से फैसला करेगी, चाहे राज्यों या उच्च न्यायालयों का रुख कुछ भी हो।" सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे संबंधित उच्च न्यायालयों से परामर्श के बाद दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखें। संबंधित उच्च न्यायालयों को भी इसी अवधि में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए क्या निर्देश?
हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों और उच्च न्यायालयों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर पहले से सहमति है, उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने की जरूरत नहीं है। उनकी सहमति दर्शाने वाला संक्षिप्त बयान ही पर्याप्त होगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2002 के उस फैसले की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग की उस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसमें जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने का प्रस्ताव दिया गया था।
इसके बाद तेलंगाना और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। हालांकि यह भी बताया गया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय सहित कुछ उच्च न्यायालय इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अब भी 60 वर्ष या उससे कम है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मुद्दे का जल्द समाधान जरूरी
देशभर में अलग-अलग रुख अपनाए जाने का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इस मुद्दे का जल्द समाधान जरूरी है। इसलिए जहां राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय दोनों सहमत हों, वहां अंतरिम व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। पिछले वर्ष 20 नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष कर दी थी।
अंतरिम आदेश में पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के इसी तरह के फैसले का भी उल्लेख किया था। पीठ ने कहा था कि जब राज्य सरकार स्वयं ऐसा करने को तैयार है तो न्यायिक अधिकारियों को इसका लाभ देने से क्यों वंचित रखा जाए। अदालत ने कहा था, "यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि न्यायिक अधिकारियों और राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों का वेतन एक ही सरकारी खजाने से दिया जाता है।" साथ ही पीठ ने यह भी उल्लेख किया था कि राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा, "सभी राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के उच्च न्यायालयों से परामर्श कर इस मुद्दे पर फैसला लें। अगर वे सहमत होते हैं तो ऐसे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह व्यवस्था इस मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।"
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न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति बढ़ाने पर क्यों हो रहा विचार?
पीठ ने कहा कि यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2026 से लागू होगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था इस कानूनी प्रश्न पर अंतिम सुनवाई को प्रभावित नहीं करेगी कि क्या पूरे देश में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु एक समान 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए।
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अदालत ने कहा, "हम स्पष्ट करते हैं कि शुरुआत में तय किए गए कानूनी प्रश्न पर यह अदालत स्वतंत्र रूप से फैसला करेगी, चाहे राज्यों या उच्च न्यायालयों का रुख कुछ भी हो।" सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे संबंधित उच्च न्यायालयों से परामर्श के बाद दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखें। संबंधित उच्च न्यायालयों को भी इसी अवधि में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए क्या निर्देश?
हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों और उच्च न्यायालयों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर पहले से सहमति है, उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने की जरूरत नहीं है। उनकी सहमति दर्शाने वाला संक्षिप्त बयान ही पर्याप्त होगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2002 के उस फैसले की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग की उस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसमें जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने का प्रस्ताव दिया गया था।
इसके बाद तेलंगाना और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। हालांकि यह भी बताया गया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय सहित कुछ उच्च न्यायालय इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अब भी 60 वर्ष या उससे कम है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मुद्दे का जल्द समाधान जरूरी
देशभर में अलग-अलग रुख अपनाए जाने का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इस मुद्दे का जल्द समाधान जरूरी है। इसलिए जहां राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय दोनों सहमत हों, वहां अंतरिम व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। पिछले वर्ष 20 नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष कर दी थी।
अंतरिम आदेश में पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के इसी तरह के फैसले का भी उल्लेख किया था। पीठ ने कहा था कि जब राज्य सरकार स्वयं ऐसा करने को तैयार है तो न्यायिक अधिकारियों को इसका लाभ देने से क्यों वंचित रखा जाए। अदालत ने कहा था, "यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि न्यायिक अधिकारियों और राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों का वेतन एक ही सरकारी खजाने से दिया जाता है।" साथ ही पीठ ने यह भी उल्लेख किया था कि राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।