सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Backs Idea of Uniform Civil Code but Warns Against Legal Vacuum for Muslim Women

Supreme Court: 'UCC लागू करने का सही समय', सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी; मुस्लिम महिलाओं के लिए कही ये बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Tue, 10 Mar 2026 01:23 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता पर विचार का समय आ गया है, लेकिन अदालत ने इसे संसद के अधिकार क्षेत्र का विषय बताया।

Supreme Court Backs Idea of Uniform Civil Code but Warns Against Legal Vacuum for Muslim Women
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में अब इस विषय पर लंबित से विचार करने का समय आ गया है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शरीयत कानून की धाराओं को रद्द करने जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम फैसला लेना विधायिका का अधिकार क्षेत्र है।
Trending Videos


मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें जॉयमाल्या बागची और आर. महादेवन भी शामिल थे। पीठ 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इन्हें मुस्लिम महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण बताया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुस्लिम महिलाओं के लिए कही ये बात
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि न्यायालय शरियत कानून के उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को रद्द कर देता है, तो इससे एक कानूनी खालीपन पैदा हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अन्य स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से कहा कि सुधार की जल्दबाजी में ऐसा कदम उठाना उचित नहीं होगा जिससे महिलाओं को वर्तमान से भी कम अधिकार मिल जाएं। उन्होंने पूछा कि यदि 1937 का शरियत कानून समाप्त हो जाता है तो उसके स्थान पर क्या व्यवस्था लागू होगी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि याचिका में भेदभाव का मुद्दा मजबूत है, लेकिन इस विषय पर निर्णय लेना संसद के लिए अधिक उपयुक्त होगा, क्योंकि संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में समान नागरिक संहिता लागू करने का दायित्व विधायिका को दिया गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि पहले भी कई बार न्यायालय संसद से समान नागरिक संहिता लागू करने पर विचार करने की सिफारिश कर चुका है। पीठ के अनुसार, सामाजिक और व्यक्तिगत कानूनों में व्यापक सुधार के लिए विधायी प्रक्रिया ही सबसे उपयुक्त रास्ता है। इस दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि अदालत यह घोषणा कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के बराबर उत्तराधिकार अधिकार मिलना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि शरियत कानून की विवादित धाराएं हटाई जाती हैं तो ऐसे मामलों में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम लागू किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed