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Supreme Court: फेक कंटेंट से जुड़े IT नियम के फैसले की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र की याचिका पर नोटिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Tue, 10 Mar 2026 01:11 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने फेक कंटेंट को नियंत्रित करने वाले आईटी नियमों को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

Supreme Court to Review Centre Appeal Against Bombay High Court Verdict on IT Rules for Fake Content
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक सामग्री को नियंत्रित करने से जुड़े आईटी नियमों को रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। हालांकि शीर्ष अदालत ने फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ ने की, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल थे। पीठ ने इस मामले में मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया है, जिनमें स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगज़ीन्स (AIM) जैसे संगठन शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस पूरे विवाद का अंतिम समाधान जल्द होना बेहतर रहेगा। इसी वजह से कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया।
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दरअसल, 26 सितंबर 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर सरकार से जुड़े फर्जी या भ्रामक कंटेंट की पहचान और नियंत्रण के लिए बनाए गए संशोधित आईटी नियमों को रद्द कर दिया था। अदालत ने इन नियमों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें लागू करने पर रोक लगा दी थी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की। उनका तर्क था कि सरकार का उद्देश्य कंटेंट को पूरी तरह ब्लॉक करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत जानकारी को नियंत्रित करना है। बताया गया कि ये संशोधन 6 अप्रैल 2023 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत लाए गए थे। इन नियमों के अनुसार फैक्ट चेक यूनिट (FCU) को सरकार से जुड़े किसी भी कथित फर्जी या भ्रामक कंटेंट की निगरानी और पहचान करने का अधिकार दिया गया था।

यदि किसी सामग्री को फर्जी या भ्रामक करार दिया जाता, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे हटाना या उस पर डिस्क्लेमर लगाना पड़ता। नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता था।

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